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हमारे बिना सपा-बसपा गठबंधन अधूरा,  एकजुट सेक्युलर फ्रंट ही भाजपा को हरा सकता है : शिवपाल यादव 

सपा-बसपा गठबंधन प्रगतिशील समाजवादी पार्टी-लोहिया (पीएसपी-एल) के बिना अधूरा है. सपा नेता व पूर्व सीएम अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती द्वारा भाजपा के खिलाफ गठबंधन का एलान करने के बाद पूर्व सपा नेता और अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव ने यह बात कही

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 Lucknow :  सपा-बसपा गठबंधन प्रगतिशील समाजवादी पार्टी-लोहिया (पीएसपी-एल) के बिना अधूरा है. सपा नेता व पूर्व सीएम अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती द्वारा भाजपा के खिलाफ गठबंधन का एलान करने के बाद पूर्व सपा नेता और अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव ने यह बात कही है. इस क्रम में कहा कि केवल एकजुट सेक्युलर फ्रंट ही भाजपा को हरा सकता है.  अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल ने उनसे नजदीकी बढ़ाने के संकेत दिये हैं. शिवपाल यादव ने कहा कि हमारे बिना गठबंधन पूरा नहीं होगा. शिवपाल यादव के इस बयान से सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वे अपने भती जे अखिलेश से मेल बढ़ाना चाहते हैं.बता दें कि गठबंधन में शिवपाल सिंह यादव के शामिल होने के सवाल पर मायावती ने शनिवार को तंज कसा था कि उनकी पार्टी को भाजपा फंड दे रही है. यह केवल वोटों को बांटने के लिए साजिश रची जा रही है.

हालांकि, कुछ दिन पहले ही शिवपाल ने सपा में शामिल होने की संभावना से तो इनकार कर दिया था, लेकिन गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जरूर जाहिर की थी. शिवपाल ने कहा था,

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का सपा में विलय करने या मेरी सपा में वापसी का कोई सवाल ही नहीं उठता. हालांकि, मैं भाजपा जैसी सांप्रदायिक शक्ति को सत्ता से दूर रखने के लिए समान विचारधारा वाली पार्टियों से गठबंधन करने को तैयार हूं. मगर वह भी तब होगा, जब हमें सम्मानजनक संख्या में सीटें मिलेंगी. उन्होंने कहा कि प्रसपा के गठन के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के लगभग हर जिले का दौरा किया है. उन्हें हर जगह उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली हैं.

प्रसपा प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी

कहा कि अगर किसी पार्टी से गठबंधन नहीं हुआ तो प्रसपा प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव का आशीर्वाद हासिल होने या ना होने के सवाल पर पूर्व कैबिनेट मंत्री ने कहा था, अब यह कोई सवाल नहीं रह गया है. मैंने कदम आगे बढ़ा दिये हैं. अब सवाल प्रदेश और देश का है. साथ ही इस बात का भी सवाल है कि हम साम्प्रदायिक शक्तियों को कैसे रोकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह मुलायम से प्रसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने का आग्रह करेंगे. अगर वह इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते तो उनकी पार्टी चुनाव में उनका समर्थन करेगी, चाहे वह जहां से भी मैदान में उतरें. बता दें, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगी.

इन दोनों पार्टियों ने राज्य की दो सीटें छोटी पार्टियों के लिए छोडी हैं, जबकि अमेठी और रायबरेली की दो सीटें कांग्रेस पार्टी के लिए छोड़ने का फैसला किया है. बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में यह घोषणा की. मायावती ने बसपा-सपा गठबंधन को नयी राजनीतिक क्रांति का आगाज करार देते हुए कहा कि इस गठबंधन से गुरू-चेला (नरेंद्र मोदी और अमित शाह) की नींद उड़ जायेगी. उन्होंने कहा, नये वर्ष में यह एक प्रकार की नयी राजनीतिक क्रांति की शुरुआत है.

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