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बगैर अनुमति के 20 एकड़ जमीन में लगे कीमती पेड़ काट डाले संतोष जैन की कंपनी ने

झारखंड में लागू नहीं है प्रोटेक्शन ऑफ कंजरवेशन ऑफ ट्रीज एक्ट, मामला: इंडिकोन-वेस्टफालिया कंपनी की खरीद कर वहां लगे पेड़ काटने का

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Ranchi: थापर समूह की अनुषंगी इकाई इंडिकोन वेस्टफालिया कंपनी को खरीदने के बाद वहां पर लगे हजारों कीमती पेड़ इलिका इस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड ने कटवा दिये हैं. संतोष जैन की कंपनी इलिका इस्टेट्स की तरफ से इंडिकोन वेस्टफालिया परिसर के 20 एकड़ जमीन में लगे कीमती पेड़ कटवा दिये गये. काटे गये पेड़ की कीमत करोड़ों में बतायी जा रही है. इसके लिए वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को किसी तरह की कोई सूचना नहीं दी गयी.

टाटीसिलवे स्थित इंडिकोन वेस्टफालिया परिसर में टीक, सिसम, एकासिया, साल, गम्हार, आम, कटहल समेत अन्य फलदार और मौसमी पेड़ लगे थे. ये सिर्फ फॉरेस्ट एक्ट 1927 नियमों का ही नहीं, बल्कि नन फॉरेस्ट एक्सेस (प्रोटेक्शन एंड कंजरवेशन ऑफ ट्रीज एक्ट) का न सिर्फ उल्लंघन है, बल्कि सरकारी नियमों का अनुपालन नहीं करने की खास जुर्रत भी है.

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि झारखंड में नन फॉरेस्ट एक्सेस (प्रोटेक्शन एंड कंजरवेशन ऑफ ट्रीज एक्ट) लागू ही नहीं है. यह पश्चिम बंगाल और नयी दिल्ली में ही लागू है. इसी का फायदा अधिकतर लोग अपनी जमीन पर लगे वृक्ष को काटने में उठा रहे हैं. लेकिन झारखंड में कटे हुए पेड़ के ट्रांसपोर्टेशन को लेकर प्रतिबंध है. इस पर जुर्माना से लेकर फौजदारी मुकदमे तक का प्रावधान किया गया है.

जानकारी के अनुसार, इलिका इस्टेट्स ने थापर समूह की अनुषंगी इकाई को हाल ही में खरीदा है. इस डील में इंडिकोन के वित्तीय प्रमुख मनोज जैन, बिजनेस हेड संदीप चौधरी, लायजन अधिकारी राजीव गुप्ता, इलिका इस्टेटस के संतोष जैन, आकाश आडुकिया और अन्य की सहभागिता रही. 250 करोड़ से अधिक की कंपनी को इलिका ने खरीदा है. जानकारों का कहना है कि 105 करोड़ से अधिक की लागत में यह सौदा तय हुआ था. इसके बाद ही कंपनी की जमीन की लगान रसीद भी इलिका इस्टेट्स की तरफ से कटवायी गयी.

इतना ही नहीं, इंडिकोन की तरफ से माइनिंग और कंटेनर डिविजन की आठ एकड़ जमीन भी इलिका इस्टेट्स को ट्रांसफर कर दी गयी. साथ ही साथ 20.29 एकड़ से अधिक की वह भूमि भी दे दी गयी, जिस पर जंगल- झाड़ी और अन्य पेड़ लगे हुए थे. इलिका इस्टेट्स की तरफ से दोनों डिविजनों के कार्यालय, कबाड़ और अन्य चीजें ध्वस्त कर दी गयी और सभी पेड़ काट दिये गये हैं.

क्या कहता है फॉरेस्ट एक्ट

वन अधिनियम 1927 के तहत किसी भी पेड़ को काटने के लिए फॉरेस्ट सेटेलमेंट ऑफिसर अथवा डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर की अनुमति लेनी जरूरी है. एक्ट के नियम 11 से लेकर नियम 25 तक इसके विस्तृत प्रावधान किये गये हैं. इसमें यह कहा गया है कि यदि कोई जमीन लीज पर, मॉर्रगेज पर अथवा बिक्री की गयी है, तो उस पर लगे पेड़, वन और अन्य के लिए नियम 24 के तहत सरकार को सूचित करना जरूरी है. ऐसा नहीं करने पर अथवा पेड़ काट दिये जाने पर छह महीने की कारावास की सजा अथवा जुर्माना हो सकता है.

क्या कहता है प्रोटेक्शन ऑफ कंजरवेशन ऑफ ट्रीज एक्ट

इस कानून के तहत स्थानीय प्रशासन (नगर निगम, जिला प्रशासन) और प्रमंडलीय वन अधिकारी को सूचना देना जरूरी है. इस आधार पर ही किसी पेड़ को सरकार की आधारभूत संरचना विकसित करने के लिए काटा जा सकता है. अपने उपयोग के लिए पेड़ अथवा वृक्ष को काटने पर प्रतिबंध है. इतना ही नहीं, काटे गये पेड़ को दूसरी जगह ले जाने, टिंबर तक पहुंचाने के लिए संबंधित वन प्रमंडल की अनुमति अनिवार्य है. इसमें 10 हजार रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है.

इलिका इस्टेट्स के संचालक से पूछे गये सवाल

न्यूजविंग संवाददाता ने इलिका इस्टेट्स के संचालक संतोष जैन से इस संबंध में एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिये उनका पक्ष लेने की कोशिश की, पर उन्‍होंने कोई जवाब नहीं दिया. उनका जवाब मिलने पर न्यूज विंग उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा.

जो सवाल पूछे गये:

  • आपकी कंपनी ने इंडिकोन वेस्टफालिया खरीदी है. कंपनी के कैंपस में लगे फलदार और कीमती वृक्ष काटने के लिए क्या किसी तरह की परमिशन आपने ली थी ?
  • यदि परमिशन लेने का आवेदन दिया गया था, तो वन विभाग के अधिकारी से क्या जवाब मिला ?
  • कंपनी के 20.29 एकड़ से अधिक भूमि पर टीक, साल, गम्हार, शीशम, आम, कटहल और अन्य कीमती पेड़ लगे थे. क्या आपने बिना अनुमति दो हजार से अधिक पेड़ कटवा दिये ?
  • काटे गये पेड़ का क्या किया गया?

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