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“तीसरी सरकार को सशक्त किये बगैर गांव गणराज्य की स्थापना नहीं की जा सकती”

गांव सशक्त नहीं होगा, तो जनसरोकार के मसलों को हल नहीं कर पायेंगी केंद्र और राज्य सरकारें

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Ranchi : संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को संविधान और गांव गणराज्य विषयक परिचर्चा में वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि तीसरी सरकार को सशक्त किये बगैर गांव गणराज्य की स्थापना नहीं की जा सकती है. गांव गणराज्य ऊपर के दोनों सरकारों की रीढ़ है. मंथन युवा संस्थान और तीसरी सरकार अभियान के तत्वावधान में आयोजित परिचर्चा का उदघाटन करते हुए झारखंड खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ ने कहा कि लोगों में संविधान और नागरिक होने की भावना को जगाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि गांव सशक्त नहीं होगा, तो केंद्र और राज्य सरकारें जन सरोकार के मसलों को हल नही कर पायेंगी. इस मौके पर तीसरी सरकार अभियान के राष्ट्रीय संयोजक डॉ चंद्रशेखर प्राण ने बड़े ही रोचक और विस्तार से संविधान में गांव गणराज्य के प्रावधानों को रखा. उन्होंने संविधान सभा की चर्चाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि संविधान सभा में ज्यादातर लोग गांव की स्तिथि से वाकिफ नहीं थे. दूसरे, उस समय तक समाज और संस्कृति की जगह यूरोपिय कानूनों का चलन बढ़ गया था. संसदीय लोकतंत्र ने तत्कालीन नेताओं को इस व्यवस्था के प्रति अनुकूलित कर दिया था. उन्होंने कहा कि तीसरी सरकार अभियान को मजबूत बनाकर हम गांव गणराज्य को लागू कर पायेंगे.

व्यापक राजनीतिक संशोधन की जरूरत : प्रो जयराम तिवारी

इस अवसर पर प्रोफेसर जयराम तिवारी ने व्यापक राजनीतिक संशोधन की जरूरत बतायी. उन्होंने कहा कि गांव गणराज्य की व्यवस्था तभी कायम हो सकती है, जब गांव को निर्णय लेने, निर्णय को लागू करने और निर्णय को लागू करने के लिए संसाधन जुटाने का अधिकार हो. इस मौके पर सुधीर पाल, नदीम खान, बशीर भाई, अरबिंद कुमार, अफजल अनीस, अनिल भगत आदि ने विचार व्यक्त किया. कार्यक्रम में रेणु प्रकाश, राजीव कर्ण, डॉ वीपी पांडेय, आरके तिवारी सहित विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

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