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बिहार में सत्ता समीकरण बदलने के साथ ही बाहुबलियों की बल्ले-बल्ले, अनंत के करीबी मंत्री बने तो आनंद मोहन कायदे को ताक पर रख करीब 47 घंटे रहे जेल के बाहर

Patna: बिहार में सत्ता का समीकरण बदलने के साथ ही बाहुबलियों ने तेबर दिखाना शुरू कर दिया था. एक ओर सरकार पर अनंत सिंह के करीबी कार्तिकेय सिंह को कानून मंत्री बनाए जाने पर चौतरफा हमला हो रहा है तो दूसरी ओर आनंद मोहन सिंह ने जेल मैनुअल को धता बताकर सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है. इतना ही नहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस बात के लिए भी आलोचना हो रही है कि उनकी राजद गठजोड़ वाली सरकार के 32 मंत्रियों में 23 दागी हैं. जिन पर कोई न कोई आपराधिक मामले दर्ज हैं.

 

कहा जा रहा है कि लालू व तेजस्वी के दबाव में कार्तिकेय सिंह को मंत्री पद देना पड़ा. इधर, जांच में खुलासा हुआ कि आनंद मोहन न्यायिक अभिरक्षा में करीब 48 घंटे जेल से बाहर रहे. इनमें महज तीन घंटे पटना कोर्ट में पेशी में लगा बाकी समय वह सहरसा से पटना आने जाने व मनमानी करने में बिताए. सहरसा पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि वह पेशी के लिए 11 अगस्त की शाम 5.45 बजे जेल से चले व 13 अगस्त की शाम के बाद वापस जेल गए. हालांकि इस मामले में दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, लेकिन इससे साफ जाहिर हो रहा है कि सत्ता परिवर्तन के साथ ही बाहुबलियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं. मालूम हो कि आनंद मोहन के पुत्र राजद से विधायक हैं.

 

जांच रिपोर्ट के अनुसार आनंद मोहन पटना पहुंचने के बाद स्वास्थ्य का हवाला देकर अपने पाटलिपुत्र स्थित आवास गए. अगले दिन कोर्ट में पेशी के बाद फिर से आवास गए. पटना आवास से शाम पांच बजे सहरसा के लिए निकले फिर रास्ते में बीमारी का हवाला देकर वह समस्तीपुर के मुसरीघरारी में दो घंटे तक रुके. फिर खगड़िया परिसदन में भी रूक, खगड़िया में राजद कार्यालय भी गए. इसके बाद सोनवर्षा में भी एक घंटे रूके. गाड़ी में खराबी का हवाला दिया गया. यहां से निकल जेल पहुंचे. यह भी बताया जा रहा है कि इस दौरान वह पुलिस की गाड़ी पर नहीं अपनी निजी एसयूवी पर घूमते रहे.

Sanjeevani

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