Ranchi

एनोस के बाहर आने से खूंटी और लोहरदगा में हो सकती है कांग्रेस को परेशानी!

Ranchi: उम्र कैद की सजा काट रहे पूर्व मंत्री एनोस एक्का को हाइकोर्ट से मिली जमानत के बाद प्रदेश राजनीति में परिवर्तन आने की बातें हो रही है.

झारखंड पार्टी (झापा) के अध्यक्ष एनोस एक्का की खूंटी और लोहरदगा संसदीय पर अच्छी पकड़ मानी जाती है.

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इन इलाकों में कुल 11 विधानसभा सीटें (कोलेबिरा, सिम़डेगा, तोरपा, खूंटी, खरसांवा और तमाड़ और गुमला, सिसई, विशुनपूर, लोहरदगा) आती हैं. यहां के पार्टी कार्यकर्ता और यहां का प्रभार मिलने वाले झापा नेताओं में इस बात की खुशी है कि मोदी लहर के बावजूद पार्टी ने छह सीटों  (कोलेबिरा, सिमडेगा, खूंटी, तोरपा, गुमला और सिसई) पर बेहतर प्रदर्शन किया था.

पार्टी नेताओं का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भी पार्टी यहां अच्छा प्रदर्शन करेगी. लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी को यहां लीड मिलने का एक कारण सभी 6 सीटों का ईसाई और मुसलमान बहुल होना माना जाता है.

वहीं एऩोस एक्का के जेल से बाहर आने और चुनावी मैदान में उतरने के बाद कांग्रेस को इन सीटों पर कुछ नुकसान होने की बात सामने आ रही है.
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14 में 2 संसदीय सीटों पर हार का अंतर था कम

लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें, तो खूंटी और लोहरदगा के उक्त विधानसभाओं में पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया था. मोदी लहर के बावजूद संसदीय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों (खूंटी से कालीचरण मुंडा और लोहरदगा से सुखदेव भगत) को बीजेपी प्रत्याशियों से काफी बढ़त मिली थी.

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हालांकि इन दोनों संसदीय सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी, लेकिन राज्य के 14 लोकसभा सीटों में 12 (लोहरदगा और खूंटी) पर पार्टी को काफी कम अंतर से हार मिली थी.

बता दें कि लोहरदगा पर कांग्रेस के सुखदेव भगत को 10363 वोटों से करारी शिकस्त मिली है. चुनाव में बीजेपी के सुदर्शन भगत को 371595 वोट मिले थे. जबकि सुखदेव भगत को 361232 वोट मिले.

वहीं खूंटी में कांटे की टक्कर की लड़ाई में बीजेपी से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा लोकसभा चुनाव जीते थे. उन्होंने कांग्रेस के कालीचरण मुंडा को मामूली अंतर से हराया था.

अर्जुन मुंडा को कुल 381045 वोट और कालीचरण मुंडा को 378970 वोट मिले था. इस तरह अर्जुन मुंडा को केवल 2075 वोट से विजय मिली थी.

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झापा के चुनाव लड़ने से कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध

उपरोक्त 6 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की मजबूती का एक कारण यहां के जातीय समीकरण को बताया जाता है. इन सीटों को ईसाई और मुस्लिम बहुल माना जाता है. दोनों ही कांग्रेस के कोर वोटर रहे हैं.

वही झापा के एनोस एक्का खुद ईसाई धर्म को अपनाएं हुए हैं. ऐसे में उनकी पार्टी के चुनाव लड़ने से कांग्रेस के कोर वोट बैंक में सेंघमारी होने की बात हो रही है. जाहिर है कि इसका सीधा फायदा बीजेपी को हो सकता है.

लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को देखे, तो इन दो संसदीय सीटों पर कांग्रेस के कम अंतर से हार में एक प्रमुख कारण इन 6 विधानसभा सीटों में पार्टी को मिली बढत रही. बीजेपी प्रत्याशियों की तुलना में कांग्रेस ने दो लोकसभा संसदीय सीटों के तोरपा विधानसभा में 21158,  खूंटी में 21402,  सिमडेगा में 5772,  कोलेबिरा में 24932,  गुमला में 6685 और सिसई में 10474 की बढ़त ली थी.

पार्टी की मजबूती पर नहीं पड़ेगा असर: राजेश ठाकुर

एनोस एक्का के जेल से बाहर आने पर इन सीटों को लेकर कांग्रेस पर पड़ने वाले असर के सवाल पर पार्टी कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर का कहना है कि ऐसा नहीं है कि लोकसभा चुनाव में ही पार्टी ने बढ़त ली थी.

इससे पहले कोलेबिरा उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी विक्सल कोगाड़ी ने एनोस की पत्नी मेनन एक्का को करारी शिकस्त दी थी. मेनन का स्थान उपचुनाव में तीसरा था. जातीय समीकरण की बात को नकारते हुए राजेश ठाकुर ने कहा कि बीजेपी के शोषणात्मक रवैये से गरीब, दबे-कुचले लोग हशिये पर हैं.

जिसका नतीजा इन सीटों पर कांग्रेसी की मजबूती के रूप में है. उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव में पार्टी अन्य विधानसभा सीटों पर ऐसा ही प्रदर्शन करेगी.

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