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पारा शिक्षकों की मांग को लेकर राज्यपाल से मिला कांग्रेस विधायकों का प्रतिनिधिमंडल, की स्थायीकरण की मांग

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Ranchi : राज्य भर में आंदोलनरत पारा शिक्षकों की मांगों को लेकर बुधवार को कांग्रेस विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मिल ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन सौंपने के बाद विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने मीडिया से कहा कि जिस तरह राज्य सरकार ने इन पारा शिक्षकों पर लाठी बरसाने का काम किया है, वह काफी कायरतापूर्ण है. यहां तक कि कई पारा शिक्षकों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार ने अब तक इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है. पहले कई बार सरकार इन पारा शिक्षकों को आश्वासन दे चुकी है. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमिटी भी बनी थी, फिर भी इनकी स्थिति जस की तस बनी हुई है.

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स्थायी करने की प्रक्रिया है लंबित

आलमगीर आलम ने कहा कि इन दिनों राज्य के 67000 पारा शिक्षक आंदोलनरत हैं, लेकिन आज भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है. ये पारा शिक्षक ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं, लेकिन न्यूनतम मजदूरी को भी तरस रहे हैं, जो राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. अनेक राज्यों, जैसे- बिहार, पंजाब, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में पारा शिक्षकों का स्थायीकरण किया गया है. राज्य सरकार ने इनके स्थायीकरण को लेकर मई 2018 में सरकार ने एक उच्चस्तरीय कमिटी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनायी थी. समिति ने रिपोर्ट बनाने के लिए इन राज्यों का दौरा तो किया, लेकिन अभी तक प्रतिवेदन नहीं दिया है, जिसके कारण पारा शिक्षकों की सेवा स्थायी करने की प्रक्रिया अभी भी लंबित है.

शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है आंदोलन ने : सुबोधकांत सहाय

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय ने कहा कि पारा शिक्षकों का आंदोलन राज्य की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है. सारे स्कूल में ताले लग चुके हैं. इस सरकार के कार्यकाल में कहीं भी शिक्षा नाम की कोई चीज नहीं बची है. सरकार स्कूलों (प्राइमरी, मिडिल) को बंद करने का काम कर रही है. कांग्रेस पार्टी ने गांव के नजदीक स्कूल खोला, वहां मिड डे मील जैसी योजना को लागू किया. इसके विपरीत भाजपा सरकार कांग्रेस की सोच के विपरीत चल रही है. राज्य में शिक्षा का कितना नुकसान हो रहा है, लेकिन सरकार कोई नीति नहीं बना रही है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है.

ग्रामीण पत्रकार की हत्या का मामला भी उठा, कहा- खामोश बैठी है सरकार

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ज्ञापन सौंपते वक्त कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू के समक्ष खूंटी के ग्रामीण पत्रकार अमित टोपनो की हत्या का मामला भी उठाया. कहा कि खूंटी के पत्थलगड़ी की रिपोर्ट करनेवाले ग्रामीण पत्रकार अमित टोपनो की 13 दिसंबर को हुई हत्या ने राज्य को झकझोर कर रख दिया है. यह केवल चौथे स्तंभ पर हमला नहीं था, बल्कि गांव से राजधानी तक खबर पहुंचानेवाले एक सजग प्रहरी की नृशंस हत्या थी. हत्यारे अब तक गिरफ्त से बाहर हैं, फिर भी राज्य सरकार खामोश बैठी है.

ज्ञापन सौंप कांग्रेस ने की निम्न मांग

  • छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पारा शिक्षकों की सेवा स्थायी करते हुए वेतनमान दिया जाये.
  • पारा शिक्षकों को समान काम का समान वेतन मिले. (पारा शिक्षकों को भी सरकारी शिक्षकों के समान वेतन दिया जाये)
  • स्कूलों के समायोजन की प्रक्रिया चल रही है, उसे रोका जाये.
  • शहीद हुए पारा शिक्षकों के परिजनों को 25 लाख मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले.
  • खूंटी के पत्रकार अमित टोपनो की नृशंस हत्या की उच्चस्तरीय जांच हो, साथ ही उनके परिजनों को 25 लाख रुपये मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी मिले.

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