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शीतकालीन सत्र एक औपचारिकता, सभी संस्थाओं में सबसे ज्यादा मजबूत CMO : सरयू

विपक्ष का सहयोग मिला, तो होंगे बहुत काम : चंद्रप्रकाश चौधरी

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Akshay Kumar Jha

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Ranchi : इस बार झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र सिर्फ तीन दिनों का होनेवाला है. 24 दिसंबर से 27 दिसंबर तक के लिए सत्र बुलाया जा रहा है. ऐसे में कहा जा रहा है कि सरकार ने शीतकालीन सत्र का सिर्फ कोरम पूरा करने और अनुपूरक बजट पास करने के लिए यह सत्र बुलाया है. कुछ का कहना है कि सरकार ने तो पहले मन बना लिया था कि सत्र बुलाया ही नहीं जाये. बाद में यह फैसला लिया गया कि तीन दिनों के लित्र सत्र बुलाया जाये. बता दें कि पहला दिन शोक प्रस्ताव के बाद स्थगित कर दिया जाता है. किसी तरह का कोई काम सत्र में नहीं होता. 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी है. 26 और 27 दिसंबर को ही सदन की कार्यवाही चलेगी. कयास लगाये जा रहे हैं कि ये दो दिन भी विपक्ष के हंगामे की वजह से किसी काम के नहीं रह जायेंगे. सरकार इस बीच अपना अनुपूरक बजट पास करायेगी. मामले पर न्यूज विंग ने राज्य की अलग-अलग पार्टियों से बात की. जानते हैं क्या कहा उन्होंने.

विधानसभा से ज्यादा मजबूत सीएम सचिवालय हो गया है : सरयू राय

बीजेपी से विधायक और सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने कहा कि किसी भी सत्र का छोटा होना आजकल आम बात हो गयी है. झारखंड में ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों में भी यही चल रहा है. ऐसा होने से संसदीय परंपरा का महत्व धीरे-धीरे कम हो रहा है. सत्र सिर्फ एक औपचारिकता पूरा करने के लिए बुलाया जा रहा है. चुनाव हुआ, तो विधानसभा की औपचारिकता पूरी हुई सरकार बनाने तक. मन में अगर संसदीय प्रणाली और दूसरी संस्थाओं के प्रति आदर है, तो छोटे सत्र में भी काम हो सकता है. सबसे बड़ी बात है कि सदन के अंदर विपक्ष और सरकार का रवैया सिर्फ लड़ाई का हो गया है. उससे सत्र की सार्थकता भी खत्म होती जा रही है. विधायकों की मानसिकता हो गयी है कि दो दिन का सत्र हो या दस दिन का, करनी वही लड़ाई है. केंद्र में फिर भी कई चीजें होती हैं, लेकिन राज्यों में नहीं हो पातीं. सबसे मजबूत संस्था अब सीएम का सचिवालय हो गया है, बाकी संस्थाएं गौण हो गयी हैं.

सत्र नहीं, इसे रूटीन कहें : आलमगीर आलम

पाकुड़ से कांग्रेस विधायक आलमगीर आलम ने कहा कि जब से बीजेपी की सरकार आयी है, सत्र के वर्किंग डे में लगातार गिरावट देखी जा रही है. पहले तो यह सत्र होना ही नहीं था. गनीमत है कि तीन दिनों के लिए हो रही है. इसे कहा जा सकता है कि यह एक रूटीन काम को पूरा करने की कोशिश सरकार कर रही है. राज्य में इतने सारे मुद्दे हैं, लेकिन उनपर बहस तक नहीं हो पायेगी. सरकार ने यह सत्र सिर्फ और सिर्फ अनुपूरक बजट पास कराने के लिए बुलाया है.

सत्र बुलाया, यही गनीमत, चलना तो है नहीं : जगरनाथ महतो

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जेएमएम से डुमरी विधायक जगरनाथ महतो ने कहा कि गनीमत है सत्र बुला तो लिया. सरकार का जो रवैया है, उससे सदन चलना तो है नहीं. इतने सारे मुद्दे हैं, लेकिन एक भी मुद्दा सदन में नहीं आनेवाला. एक कोरम पूरा करने के लिए सरकार ने यह सत्र बुलाया है. सदन कम से कम पांच दिनों का होना ही चाहिए. इस सत्र में सिर्फ अनुपूरक बजट पास होगा और कहानी खत्म.

विपक्ष चाहे, तो दो दिनों में भी हो सकते हैं कई काम : चंद्रप्रकाश चौधरी

रामगढ़ से आजसू विधायक और राज्य के जल संसाधन मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने कहा कि विपक्ष चाहे, तो दो दिनों में भी जनता से जुड़े कई काम हो सकते हैं. दो दिन भी काफी होते हैं. लेकिन, विपक्ष सदन को चलने नहीं देता. इस वजह से जनता का काम नहीं हो पाता. विपक्ष के सहयोग के बगैर कोई भी सदन नहीं चल सकता. वैसे भी फिर तो जनवरी में बजट सेशन होगा ही. इसलिए ठीक ही है छोटा सत्र.

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