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शीतकालीन सत्र 11 दिसंबर से आठ जनवरी तक, क्या राम मंदिर पर अध्यादेश लायेगी मोदी सरकार?  

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली सीसीपीए की बैठक उनके आवास पर हुई और सत्र की तारीख पर विचार-विमर्श हुआ

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NewDelhi :  संसद का शीतकालीन सत्र 11 दिसंबर से आठ जनवरी तक चलेगा.  यह जानकारी बुधवार को केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने दी.  कहा कि संसदीय मामलों पर कैबिनेट कमेटी का फैसला है कि अगला शीतकालीन सत्र 11 दिसंबर, 2018 से आठ जनवरी, 2019 तक आयोजित किया जायेगा.  बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली सीसीपीए की बैठक उनके आवास पर हुई और सत्र की तारीख पर विचार-विमर्श हुआ.  वैसे आमतौर पर शीतकालीन सत्र नवंबर के महीने में होता है, लेकिन पिछले दो बार से इसे दिसंबर में आयोजित किया जा रहा है. जान लें कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पूर्व प्नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए यह आखिरी शीतकालीन सत्र होगा. यह संसद का आखिरी सत्र ही होगा, क्योंकि बजट सत्र अभी आयेगा तो  उसका कोई महत्व नहीं रहेगा. इस तरह से राजनीतिक गलियारों में कामकाज के लिहाज से शीतकालीन सत्र काफी अहम होने जा रहा है.

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सरकार के सामने चुनौती होगी कि सत्र शांतिपूर्वक ढंग से कैसे चलाया जाये

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जानकारों के अनुसार मोदी सरकार की यह कोशिश रहेगी कि इस सत्र में कई अहम बिल चर्चा के लिए लाये जाये. साथ ही राज्यसभा में लटके बिलों को भी पास कराया जाये. कहा जा रहा है कि सरकार के सामने चुनौती होगी कि सत्र शांतिपूर्वक ढंग से कैसे चलाया जाये.  सर्वाधिक महत़्वपूर्ण बात यह कि शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार पर सबसे ज्यादा नजर इस बात के लिए रहेगी कि क्या सरकार राम मंदिर पर कोई कानून लाकर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करती है या फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ही इंतजार करेगी.  बता दें कि सरकार पर लगातार इस बात का दबाव है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए संसद के जरिए कानून लाया जाये. या अध्यादेश लाकर राम मंदिर बनाया जाये.

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