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रिम्स को एम्स बनाने से पहले सरकार का भरोसा जीतना रिम्स निदेशक के लिए होगी सबसे बड़ी चुनौती

रिम्स डायरेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी सरकार का भरोसा जितना

Ranchi:  राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में नये डायरेक्टर ने पदभार ले लिया है. पदभार लेते ही नए डायरेक्टर ने कई सारे परिवर्तन करते देखे जा रहे हैं. उन्होंने रिम्स को एम्स के तर्ज पर स्थापित करने की बात कही है. इसके अलावा डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस सहित ओपीडी के समय का पूरी तरह मरीजों को मिल सके यह भी व्यवस्थित करने पर जोर है.

नए डायरेक्टर का कहना है कि रिम्स में ऐसी व्यवस्था कर दी जाएगी कि किसी भी मरीज को राज्य के बाहर ईलाज कराने न जाना पड़े. अगर उनकी बातें अमल में आ जाती हैं तो राज्य के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर गिना जाएगा. पर, नए डायरेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती लोगों के खोये हुए भरोसे को कायम करना होगा.

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क्यों होगी चुनौती

सरकार के नीति नियंताओं, मंत्रियों, विधायकों को अब तक इस राज्य के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान पर भरोसा नहीं हो पाया है. सरकार के अधिकतर मंत्री, अधिकतर विधायक, बड़े बड़े नेता उनके परिजन, प्रषासनिक पदाधिकारी, राज्य सरकार के अफसर रिम्स में ईलाज कराना तो दूर वहां जाने से भी बचते हैं.

राज्य के षिक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, कोरोना संक्रमित हुए पर वे रिम्स में ईलाज कराने से बचे. हलांकि शिक्षा मंत्री दो दिनों तक रिम्स में एडमिट रहे, पर उन्होंने बाद में प्राइवेट अस्पताल जाना उचित समझा. वित्त मंत्री सीधा प्राइवेट अस्पताल पहुंचे. हालांकि स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, मंत्री मिथिलेष ठाकुर ने रिम्स में ईलाज कराया था.

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रिम्स के कोविड सेंटर को राज्य डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाया गया था. तत्कालिन रांची डीसी ने सभी संक्रमितों को रिम्स जाने के लिए प्रोत्साहित किया. जब वे खुद कोरोना संक्रमित हुए तो उन्होंने रिम्स जाना सही नहीं समझा, वे खुद प्राइवेट अस्पताल चले गये. राज्य के कई आईएएस अधिकारी भी कोरोना संक्रमित हुए पर किसी ने भी रिम्स का रुख नहीं किया.

रांची जिला के सिविल सर्जन खुद रिम्स में भरोसा नहीं जता सके, उन्होंने रिम्स के बजाया निजी अस्पताल जाने में भलाई समझा. इसके अलावा रिम्स के एक सीनियर डॉक्टर भी रिम्स के बाहर अपना ईलाज कराया.

पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन एक दिन भी रिम्स में भर्ती होना उचित नहीं समझा, वे मेदांता में ईलाज के लिए भर्ती हुए.

रिम्स के ही डॉक्टरों से ही सभी वीआईपी और सरकार के तंत्र से जुड़े लोग चिकित्सकीय सलाह ले लेते हैं पर वहां जाकर ईलाज कराना नहीं चाहते.

राज्य के सबसे अच्छे डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति होने के बाद भी किसी भी तरह की बिमारी होने पर सरकार से जुड़े लोग रिम्स आने से बचते हैं. हलांकि पिछले कुछ दिनों में कार्डियो विभाग में राज्य के कई बड़े नेताओं ने अपना ईलाज कराया है.

भरोसा नहीं करने के पीछे भी कई कारण हैं जिसमें से एक कई सारे जांच के लिए रिम्स में मषीनें उपलब्ध नहीं है, है भी तो अधिकतर खराब हैं, और सही है तो जांच रिपोर्ट मिलने में देरी हो जाती है.

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