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विंड एनर्जी से सस्ती दर में मिल रही बिजली, 3.43 से 2.72 रुपये तक प्रति यूनिट दे रहे उपभोक्ता

सेकी से किये एग्रीमेंट के तहत राज्य को मिल रही 350 मेगावाट बिजली

Ranchi :  राज्य को विंड एनर्जी के तहत 350 मेगावाट बिजली मिल रही है. साल 2018 में विंड एनर्जी के लिए जेबीवीएनएल और सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) के बीच एग्रीमेंट किया गया. इसके लिए अलग-अलग चरणों में एग्रीमेंट किया गया. पहले और दूसरे चरण को मिलाकर राज्य को 350 मेगावाट बिजली मिल रही है. राज्य को इन अलग अलग एग्रीमेंट के जरिये पांच सौ मेगावाट बिजली मिलनी है. इन स्रोतों से मिलने वाली बिजली कम दर में है. जिससे उपभोक्ताओं को राहत है. कोरोना लॉकडाउन के पहले तक जेबीवीएनएल को ये 350 मेगावाट बिजली मिलनी लगी.

जेबीवीएनएल से जानकारी मिली की लॉकडाउन के कारण काम प्रभावित रहा. ऐसे में 500 मेगावाट बिजली आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन अब विंड एनर्जी के तहत इस लक्ष्य को अगले साल जून तक पूरा किया जायेगा. बता दें राज्य में पिछले कुछ साल से सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है. राज्य में सौर ऊर्जा के अपने स्रोत हैं. वहीं पवन ऊर्जा में अन्य राज्यों की सहायता ली जा रही है.

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अलग-अलग चरणों में किया गया एग्रीमेंट

विंड एनर्जी के लिए एग्रीमेंट अलग अलग चरणों में किया गया. पहले चरण में पांच सौ मेगावाट बिजली के लिए जुलाई 2018 में एग्रीमेंट किया गया. वहीं नवंबर 2018 में सौ मेगावाट पवन बिजली के लिए फिर से एग्रीमेंट हुआ. इस साल जनवरी तक जेबीवीएनएल को मात्र 200 मेगावाट बिजली ही पवन स्रोतों से मिल रही थी. जिसमें पिछले कुछ महीनों में वृद्धि हुई.

एग्रीमेंट से वर्तमान में 250 मेगावाट बिजली मिल रही है. उपभोक्ताओं को यह बिजली प्रति यूनिट कीमत 3.43 रुपये मिल रही है. जबकि दूसरे चरण से 50 मेगावाट बिजली मिल रही है. इसकी कीमत 2.72 रुपये प्रति यूनिट है. वहीं थर्मल बिजली पांच रुपये प्रति यूनिट तक है. हालांकि नियामक आयोग की ओर से फिर से नयी दर तय की जायेगी. सौर ऊर्जा की बात करें तो इसके तहत सात सौ मेगावाट बिजली सेकी की ओर से राज्य को दी जायेगी. इसके लिए जेबीवीएनएल और सेकी के बीच पिछले साल दिसंबर में एग्रीमेंट किया गया.

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ट्रांसमिशन से लेकर परचेजिंग कॉस्ट तक नहीं

जेबीवीएनएल से जानकारी मिली की पवन और सौर ऊर्जा के बिजली सप्लाई के लिए राज्य को ट्रांसमिशन चार्ज नहीं देना है. न ही अलग से ट्रांसमिशन की व्यवस्था करनी है. ऐसे में राज्य में बिजली संकट का समाधान भी होगा और राज्य को सस्ती दर में सौर और पवन ऊर्जा भी मिल रही है.

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