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 क्या 2026 में लोकसभा और विधानसभाओं की सीटें बढ़ायी जायेंगी!

 84वें संविधान संशोधन में सीटों में वर्ष 2026  तक परिवर्तन नहीं करने का प्रावधान  

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NewDelhi :  यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में लोकसभा सीटें बढ़ जायें, वहीं तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना जैसे राज्यों की लोकसभा सीटें घट जायें तो आश़्चर्य नहीं होना चाहिए. बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 81 के तहत ऐसी व्यवस्था की गयी है कि प्रत्येक राज्य को लोकसभा में स्थानों का बंटवारा इस तरह से किया जायेगा कि स्थानों की संख्‍या से उस राज्य की जनसंख्‍या का अनुपात सब जगह लगभग बराबर हों. अगर आज के संदर्भ में इन वास्तविक प्रावधानों को लागू किया जाता है तो देश के कई राज्यों में जबरदस्त रूप से बदलाव देखने को मिल सकता है.  इसे लागू किया जाये तो यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में लोकसभा सीटें अचानक बढ़ जायेंगी, वहीं तमिनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना जैसे राज्यों को कई लोकसभा सीटें खोनी पड़ सकती हैं.

जान लें कि ऐसा इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि 1976 में आपातकाल के दौरान संविधान में 42वें संशोधन के तहत 1971 की जनगणना के आधार पर 2001 तक विधानसभाओं और लोकसभा की सीटों की संख्या को स्थिर कर दिया गया. उसके बाद 2001 में हुए 84वें संशोधन में लोकसभा और विधानसभा की सीटों में वर्ष 2026 तक कोई परिवर्तन नहीं करने का प्रावधान किया गया.

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राजस्थान में 30 लाख की जनसंख्या पर एक और केरल में 18 लाख की आबादी पर एक सांसद

आबादी के हिसाब से सीटें स्थिर रखने से कई राज्यों में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिले;  उदाहरण स़्वरूप 1971 की जनसंख्या गणना के अनुसार हर बड़े राज्य में लगभग 10 लाख की जनसंख्या पर एक सांसद प्रतिनिधि था.  सीटों की संख्या वही रहने और जनसंख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी से भी कई राज्यों में बड़े पैमाने पर बदलाव नजर आया. अगर आज की जनसंख्या की बात करें तो राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में करीब 30 लाख की जनसंख्या पर एक सांसद प्रतिनिधि हैं, वहीं केरल या तमिलनाडु में सिर्फ 18 लाख की आबादी पर एक सांसद प्रतिनिधि हैं.  2008 परिसीमन से पहले कई जगह स्थिति और बदतर हो गयी.  दिल्ली इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. दिल्ली में चांदनी चौक मतदान क्षेत्र में जहां 3.4 लाख मतदाता थे, वहीं बाहरी दिल्ली में इससे 10 गुना करीब 33.7 लाख मतदाता थे. ऐसे में 2026 में चुनावों के दौरान क्या स्थिति होगी इसे समझा जा सकता है.

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