Opinion

धार्मिक स्वतंत्रता पर ट्रंप करेंगे मोदी से बात, ये मसला एकसाथ कई निशाने साधता है

Faisal Anurag

अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप भारत यात्रा के दौरान धार्मिक स्वतंत्रता, लोकतंत्र और संविधान के संदर्भ में नरेंद्र मोदी से बात करेंगे. ट्रंप के स्वागत के लिए जिस तरह की तैयारियां अहमदाबाद में की गयी हैं, उसे देखते हुए अमेरिका का इस विषय को बातचीत में उठाना कई कुटनीतिक और राजनीतिक सवाल पैदा करता है.

आमतौर पर द्विपक्षीय वार्ताओं में सार्वजनिक बयान देकर इस तरह की बातें करने का कम ही रिवाज है. लेकिन ट्रंप तो ट्रंप हैं. और उनकी नजर नवबंर में हाने वाले चुनाव पर टिकी है.

इसे भी पढ़ेंःतो क्या रघुवर दास और राजबाला वर्मा ने 35 लाख लोगों को तीन साल तक भूखे रखने का पाप किया

भारत की इस यात्रा को भी एकतरह से अमेरिकी चुनाव प्रचार के हिस्से के रूप में मीडिया का एक तबका देख रहा है. भारतीय मूल के मतदाताओं का महत्व अमेरिका में बढ़ता जा रहा है. ओबामा ने भी अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में भारत की यात्रा की थी.

दुनिया के कुटनीतिक इतिहास में इस तरह के दौरों का जो महत्व बढ़ा है वह प्रचलित मान्यताओं के अनुरूप नहीं है. अमेरिका ने पहले तो कहा कि वह भारत के दौरे में कोई बड़ी डील नहीं करेगा, लेकिन अब कह रहा है कि अमेरिका के हितों को ध्यान में रखकर आर्थिक डील कर सकता है.

अमेरिकी प्रेसिडेंट ने मोदी को पसंदीदा बताने के बावजूद कहा कि भारत का अमेरिका के प्रति व्यवहार अच्छा नहीं है. इस तरह के अंतरविरोधी बयानों के बीच धार्मिक स्वतंत्रता के सवाल को बातचीत में शामिल करने की बात कर अमेरिका एक साथ कई निशाना साधने का प्रयास कर रहा है.

ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा, “मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप लोकतंत्र और धार्मिक आज़ादी को लेकर हमारी साझी परंपरा के बारे में सार्वजनिक रूप से और निश्चित रूप से निजी बातचीत में भी बात करेंगे. वे ये मुद्दे उठाएंगे, ख़ासकर धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर बात होगी. इस प्रशासन के लिए ये एक अहम मुद्दा है.”

इसे भी पढ़ेंःखेल प्रशिक्षकों के लिए 20 सालों में नहीं बनी नियोजन नियमावली, कैसे मिलेंगे द्रोणाचार्य?

ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मुलाकात में राष्ट्रपति ट्रंप इस बात की तरफ़ ध्यान दिलाएंगे कि लोकतांत्रिक परंपराओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए सम्मान को बरकरार रखने के लिए दुनिया भारत की तरफ़ देख रही है. बेशक ये भारत के संविधान में भी है- धार्मिक आज़ादी, धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए सम्मान और सभी धर्मों के लिए बराबरी का दर्जा.”

सीएए और एनआरसी के सवाल पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, ‘हम आपके द्वारा उठाए कुछ मुद्दों को लेकर चिंतित हैं. मुझे लगता है कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी बैठक में इन मुद्दों को उठाएंगे. दुनिया अपनी लोकतांत्रिक परम्पराओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों का सम्मान बनाए रखने के लिए भारत की ओर देख रही है.’

सीएए आने के बाद दुनिया के कई देशों ने इसे लेकर जो कुछ कहा है वह भारत के लिए सामान्य परिघटना नहीं है. अमेरिका में ट्रंप के मुख्य प्रतिद्वंदी डेमोक्रेट पार्टी के कई नेताओं ने भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के सवाल को उठाया है. अमेरिकी ड्रीम न केवल अपने लोगों के समान अवसर की बात करता है, बल्कि दुनिया में लोकतंत्र और अधिकारों को लेकर चिंतित रहता है.

सोवियत संघ के जमाने में इसी लोकतंत्र की बात करते हुए अमेरिका ने लंबे समय तक शीतयुद्ध का नेतृत्व किया.

इसे भी पढ़ेंःधनबाद: मरम्मत को तरस रहा चेक डैम, गुहार के बाद भी नेता-अधिकारियों का रवैया सुस्त

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button