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क्या विपक्ष के सैलरी नहीं लेने से जनता के 192 सवालों के जवाब मिल जायेंगे?

विपक्ष ने सत्र के छह दिनों की सैलरी नहीं लेने का निर्णय लिया है. इससे विधानसभा अध्यक्ष को अवगत भी करा दिया है.

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kumar Gaurav

Ranchi : विपक्ष ने सत्र के छह दिनों की सैलरी नहीं लेने का निर्णय लिया है. इससे विधानसभा अध्यक्ष को अवगत भी करा दिया है. पर सवाल यह उठता है कि क्या विपक्ष के सैलरी नहीं लेने से जनता के 192 सवालों के जवाब मिल जायेंगे, क्या प्रश्नकाल और शून्यकाल चल पायेगा, ध्यानाकर्षण सूचनाओं पर बहस हो पायेगी,  जनता के हित में आने वाली बातों पर विचार हो पायेगा?  जनता विपक्ष से यह जानना चाहेगी. सत्ता पक्ष की भूमिका जनसेवा की होती है,  वहीं विपक्ष की भूमिका सुधार करने और करवाने की, पर क्या विपक्ष अपनी भूमिका को लेकर प्रतिबद्ध था. क्या जनता को हो रही परेशानियों के उपाय के लिए बहस हो पायेगी,  सिर्फ सैलरी नहीं लेने मात्र से मानसून सत्र की उपयोगिता पूरी हो जायेगी?

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सदन मात्र 590 मिनट तक ही चल पाया

विपक्ष के विरोध और सत्ता पक्ष के अड़ियल रवैये के कारण जनता के 192 सवालों के जवाब नहीं मिल पाये. जहां छह दिनों में 1440 मिनट तक कार्यवाही चलनी थी, वहीं सदन मात्र 590 मिनट के तक ही चल पाया. भूमि अधिग्रहण बिल वापस लेने की मांग को लेकर विपक्ष हंगामा करता रहा और सत्ता पक्ष हमेशा कहता रहा कि ये अब कानून बन चुका है, इसपर बहस अनुचित है. दोनों पक्षों के इस रवैये की वजह से सदन की कार्यवाही चल नहीं पायी. इसी में जनता के मुददे और सवाल गौण हो गये.

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चलते रहे विधायी कार्य, पारित हुए 21 विधेयक

पूरा मानसून सत्र हंगामेदार रहा, आरोप प्रत्यारोप के दौर  भी चले. सदन के अंदर अमर्यादित भाषा का भी प्रयोग हुआ, बात अलग है कि कुछ को प्रोसिडिंग से हटा लिया गया. सत्र में होने वाले सारे विधायी कार्यो को अच्छे से कर लिया गया. इस दौरान कुल 21 विधेयक भी पारित हुए. जो नहीं हुआ, वो सिर्फ जन मुददों और जनसरोकारों को लेकर वाद विवाद. विधायक, मंत्री, सीएम और नेता प्रतिपक्ष सभी व्यक्तिगत हो गये. जिस सवा तीन करोड़ जनता ने इन 81 प्रतिनिधियों को चुनकर भेजा है, उनकी बातों और समस्याओं से सत्ता और विपक्ष दोनों को लेना देना नहीं था.

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