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जमशेदपुर जेल में हुई कैदी मनोज सिंह की हत्या मामले में क्या पूर्व जेलर पर होगी कोई कार्रवाई !

Ranchi: 25 जून को जमशेदपुर स्थित घाघीडीह सेंट्रल जेल में कैदी मनोज सिंह की पीट-पीट कर हत्या के मामले में चार कक्षपाल और 26 बंदियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. जिसके बाद चारों कक्षपाल को जेल भेज दिया गया. वहीं जेल के उपप्रभारी कक्षपाल शिवदत्त शर्मा को जेल आईजी के द्वारा कार्रवाई करते हुए 26 जुलाई को सस्पेंड भी कर दिया गया है.

मृतक के पिता अनिरूप सिंह ने घाघीडीह सेंट्रल जेल के जेलर बालेश्वर प्रसाद सिंह के खिलाफ परसुडीह थाना में हत्या का मामला दर्ज कराया था. मामला तो दर्ज कर लिया गया लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या जेलर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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जेलर ने साजिश के तहत करवायी मनोज सिंह की हत्या

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परसुडीह थाना में मृतक मनोज सिंह के पिता अनिरूप सिंह के द्वारा दिये गये आवेदन में कहा गया है कि 25 जून को मुझे 7:00 बजे शाम में फोन आया कि आप एमजीएम अस्पताल चले जाइये और अपने बेटे को देख लीजिए.

जब उन्होंने पूछा कि आप कौन बोल रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि मैं जेलर बालेश्वर सिंह बोल रहा हूं. जिसके बाद मृतक मनोज सिंह के पिता एमजीएम अस्पताल पहुंचे वहां पर एक कैदी सुमित सिंह का इलाज चल रहा था.

जब उन्होंने कैदी सुमित सिंह से पूछा कि मनोज सिंह कहां है, तो कैदी सुमित सिंह बोला कि पुलिसवाले ने मनोज सिंह को लाठी से मार-मार कर मार दिया है. जब मनोज सिंह के पास गया तो उसकी मौत हो चुकी थी.

इस मामले में मनोज सिंह के पिता का कहना है कि मेरे बेटे की हत्या जेलर बालेश्वर सिंह ने साजिश के तहत करवायी है एवं इसका जिम्मेवार जेलर बालेश्वर सिंह और जेल के कुछ सिपाही और कैदियों का हाथ है.

मनोज सिंह की हत्या के पीछे जेलर बालेश्वर सिंह का हाथ

परसुडीह थाना में मृतक मनोज सिंह के पिता अनिरूप सिंह के द्वारा दिये आवेदन में कहा गया है कि जब मैं मनोज सिंह से मिलने जेल गया था तब मेरा बेटा बोला था कि पापा मुझे जल्दी से जल्दी जेल से निकलवा लीजिए क्योंकि जेलर साहब की नीयत मेरे प्रति ठीक नहीं है.

वह हमेशा मुझे तंग करते हैं. मनोज सिंह के पिता ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे बेटे की हत्या में जेलर बालेश्वर सिंह का पूरा हाथ एवं साजिश है. जेलर ने साजिश करके उसकी हत्या करायी है.

जेल में कैदी के अनुसार मनोज सिंह ने चिल्ला-चिल्ला कर कहा था कि जेलर साहब आप मारने की धमकी देते थे, लेकिन आज जान से ही मरवा दिये. आप जल्दी से मुझे अस्पताल ले चलिए कि मेरी जान बच जाये. जिसके बाद मनोज सिंह को अस्पताल ले जाया गया जहां पर उसकी मौत हो गयी.

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जेलर ने बनायी थी मारपीट की योजना

कैदी हरीश सिंह के द्वारा लिखे पत्र के अनुसार, जेलर ने पंकज दुबे, अमन मिश्रा सहित कुछ विश्वासी कैदियों के साथ मिलकर हरीश सिंह के साथ मारपीट की योजना बनायी थी.

ताकि पगली घंटी बजाकर उसकी पिटाई की जा सके. लेकिन हरिश सिंह ने किसी तरह गुमटी पर जाकर अपनी जान बचायी और शिकायत की.

रिटायरमेंट से पहले करवाएंगे बड़ी घटना

हरिश सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि एक बंदी ने उसे सतर्क रहने की हिदायत दी थी. साथ ही कहा था कि जेलर साहब अपने रिटायरमेंट से पहले फिर मारपीट की घटना करवाएंगे. जिसके बाद हरीश सिंह के द्वारा कारा महानिरीक्षक को पत्र लिखा गया था.

जिसमें कहा गया था कि मेरे साथ कोई अप्रिय घटना हो उससे पहले उचित कार्रवाई कर मेरी जान की हिफाजत करें. हालांकि इस पत्र को जेल गेट पर ही रोक दिया गया था.

अगर समय रहते यह पत्र अधिकारियों को मिल जाता तो जेल में गैंगवार और मनोज सिंह की हत्या जैसी घटनाओं पर रोक लग सकती थी.

मनोज सिंह की मौत का असल जिम्मेदार कौन

घाघीडीह सेंट्रल जेल में बंदियों और कक्षपालों ने सजायाफ्ता मनोज सिंह की पीट-पीटकर हत्या कर दी. इसमें हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई और चार कक्षपालों को जेल भी भेज दिया गया.

कानूनी औपचारिकता पूरी कर ली गई. जांच टीम भी गठित की गई. लेकिन हत्या में मुख्य बातें गौण हो गयी. सही मायने में आखिर मनोज सिंह की हत्या का जिम्मेदार कौन? उसकी सुरक्षा की जिम्मेदार किसकी थी? सुरक्षा में कौन लोग थे? ऐसे में क्या जेल प्रशासन के बड़े अधिकारी भी सुरक्षा में चूक के जिम्मेदार नहीं?

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जेल के अंदर सुरक्षा का जिम्मा जेल प्रशासन का

कानूनी जानकारों की मानें तो न्यायालय के आदेश पर ही न्यायिक हिरासत में किसी भी आरोपित को जेल भेजा जाता है. मतलब कि उसकी सुरक्षा का जिम्मा जेल प्रशासन का होता है.

हर बंदी की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर खाने-पीने, सोने तक की व्यवस्था जेल प्रबंधन की जिम्मेदारी है. बंदी को तो सरकारी मुलाजिम का दर्जा होता है. इस व्यवस्था को दरकिनार कर अगर किसी बंदी की पीट-पीटकर हत्या कर दी जाए तो लापरवाही किसकी मानी जाएगी? व्यवस्था की या फिर सुरक्षा में सेंध लगाने वालों की. कहा जाएगा दोनों की. तो फिर लापरवाह रहने वाले लोग कानूनी घेरे से आखिर अब तक अछूते कैसे रह गये?

क्या कहते हैं जेल आईजी

मनोज सिंह हत्याकांड मामले में जेल आईजी वीरेंद्र भूषण ने कहा कि हमें तो पता नहीं जेलर के ऊपर हत्या का मामला दर्ज हुआ है, अगर हुआ भी है तो जेलर की सेवा जमशेदपुर जेल से समाप्त हो गई है.अब कानून को जो कार्रवाई करना होगा वह करेगी.

दोषी पाए जाने के बाद जेलर पर भी होगी कार्रवाई

जेलर बालेश्वर प्रसाद सिंह के पर हत्या की साजिश को लेकर दर्ज कराये गए मामले में परसुडीह थाना प्रभारी का कहना है कि 26 जून को ही मामला दर्ज हो चुका था. जिसके बाद मनोज सिंह के पिता ने 20 जुलाई को जेलर के खिलाफ लिखित बयान दिया था.

उनका भी बयान रिसीव कर लिया गया है. इस मामले में जो एफआईआर दर्ज हुआ है, उसमें कई आरोपियों पर कार्रवाई भी की गयी है. जहां तक जेलर के खिलाफ कार्रवाई करने की बात है तो मामले का अनुसंधान जारी है. जांच में दोषी पाए जाने के बाद जेलर पर भी कार्रवाई की जाएगी.

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