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बच्चों के लिए कोरोना के बाद क्यों आसान नहीं होगा स्कूल में पढ़ाई करना, जानें क्या कहते हैं मनोचिकित्सक

दो साल के बाद खुल रहे स्कूल बच्चों को मानसिक रूप से कर सकते हैं परेशान, लर्निंग डिसेबिलिटी के साथ डिसिप्लीन होगी मुख्य चुनौती

Avinash, Jamshedpur: दो साल घर में रहने के बाद स्कूल जाने को तैयार लाखों विद्यार्थियों के साथ ही शिक्षकों के लिए भी क्लासरूम में पढ़ाई आसान नहीं होगी. टाटा मेन हॉस्पिटल टीएमएच के मनोचिकित्सक डॉ संजय अग्रवाल कहते हैं कि स्कूल तो खुल रहे हैं, मगर स्कूलों को कई तरह की चुनौतियों से दो चार होना पड़ेगा. पढ़ाई तो बाद की बात है, सबसे बड़ी चुनौती बच्चों के अनुशासन की होगी. दो साल घर में रहने के बाद बच्चों में स्कूल का अनुशासन खत्म हो गया है. अधिकतर बच्चे घरों में मोबाइल के सहारे रहे. उनकी कोई खास रूटीन नहीं थी. अब यकायक उन्हें फिर से एक रूटीन और डिसिप्लीन में आना होगा. इसे बनाने में स्कूल के साथ ही पैरेन्ट्स के सामने भी चुनौती होगी. जूनियर क्लास के पैरेन्ट्स पर बच्चों को सुबह उठाकर स्कूल के लिए तैयार करने की चुनौती होगी तो शिक्षकों के सामने क्लासरूम मैनेजमेंट की सबसे बड़ी चुनौती होगी.

लर्निंग डिसेबिलिटी की चुनौती
दूसरी सबसे बड़ी चुनौती लर्निंग डिसेबिलिटी की होगी. दो साल की ऑनलाइन पढ़ाई के चलते बच्चों में विषयों की समझ बहुत कम है. क्लासरूम में अब उनके सामने इन विषयों की परीक्षा और होमवर्क बनाने की होगी. इसके चलते कुछ बच्चों में घबराहट और तनाव हो सकता है, क्योंकि अब उन्हें क्लासरूम में एक्जाम देने का दबाव होगा. ऑनलाइन परीक्षाओं में पैरेन्ट्स या घर का कोई दूसरा सदस्य मदद कर देता था. बकौल डॉ संजय अग्रवाल, पिछले नवम्बर-दिसंबर माह में जब छठवीं के ऊपर की कक्षाएं कुछ दिनों के लिए खुलीं तो कई तरह के मामले सामने आए, जिसमें बच्चों में घबराहट देखी गई. सातवीं कक्षा की एक छात्रा में यह घबराहट इतनी ज्यादा हो गई कि पैरेन्ट्स को मनोचिकित्सक के पास लाना पड़ा. वह बच्ची इतनी परेशान थी कि दो रोज तक रोती रही और स्कूल नहीं जाना चाहती थी. ऐसे में शिक्षकों को बेहद संवेदनशील होने की जरूरत होगी. शिक्षकों का कड़ा व्यवहार उन्हें और परेशान कर सकता है. शिक्षकों के साथ ही पैरेन्ट्स को भी बेहद संजीदा होकर कुछ माह बच्चों को डील करना होगा. उनमें मानसिक रूप से कई बदलाव आएंगे, लेकिन इसका प्यार से ही सामना किया जा सकता है.

धीरे-धीरे ही मोबाइल से डिटैचमेंट बढ़ाना होगा
अब जबकि फिजिकल क्लसेस शुरू होने जा रहे हैं तो बच्चों को मोबाइल से दूर रखना होगा. यह रातोरात संभव नहीं है, क्योंकि दो साल में बच्चे मोबाइल से दोस्ती कर लिए हैं और वे पढ़ाई के साथ ही वीडियो गेम वगैरह खेलते रहे हैं. ऐसे में बेहद सावधानी पूर्वक बच्चों को मोबाइल से डिटैच करना होगा. यकायक करने पर बच्चों में मानसिक विकार हो सकते हैं. कई ऐसे मामले आए हैं, जिसमें बच्चे मोबाइल पर पोर्न देखते हुए पकड़े गए हैं.

स्कूल तो खुल रहे हैं, मगर स्कूलों को कई तरह की चुनौतियों से दो चार होना पड़ेगा. पढ़ाई तो बाद की बात है, सबसे बड़ी चुनौती बच्चों के अनुशासन की होगी. दो साल घर में रहने के बाद बच्चों में स्कूल का अनुशासन खत्म हो गया है.
– डॉ संजय अग्रवाल, टाटा मेन हॉस्पिटल टीएमएच के मनोचिकित्सक

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