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लोकसभा चुनाव से पहले कोयलांचल बीजेपी में हंगामा क्यों है बरपा

कुर्सी के लिए साम दाम दंड भेद सब चलता है

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: कहते हैं कि राजनीति में सब जायज है. कुर्सी के लिए साम दाम दंड भेद सब चलता है. कोयलांचल के बीजेपी की बात करें तो आज-कल यहां यही सब हो रहा है. लोकसभा चुनाव से पहले यहां कोयले की तपिश से ज्यादा राजनीति गर्म है. बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो, धनबाद के मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल, गिरिडीह सांसद रवींद्र पांडे और धनबाद सांसद पीएन सिंह अखबार में काफी जगह ले रहे हैं. कोयलांचल से लेकर राजधानी रांची तक राजनीतिक झगड़े की स्क्रिप्ट पढ़ी और गढ़ी भी जा रही है. जिस राजनीतिक नूरा-कुश्ती में सभी लगे हैं, उससे साफ जाहिर है कि बात सिर्फ सांसद सीट की नहीं है बल्कि उस लूट की भी है, जिसके बारे जानते तो सभी हैं, लेकिन कोई बात नहीं करना चाहता.

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ढुल्लू महतो Vs रवींद्र पांडे

लोकसभा चुनाव से पहले कोयलांचल बीजेपी में हंगामा क्यों है बरपा

22 फरवरी को कोयलांचल में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने बिगुल फूंका. मौका प्रमंडल स्तरीय पंचायत सम्मेलन का था. उसी के बाद से लोकसभा टिकट के लिए जोर आजमाइश शुरू हो गयी. धनबाद के धनसार में एक शादी समारोह में जहां रवींद्र पांडे के अलावा धनबाद के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह भी मौजूद थे. वहां बात ढुल्लू महतो की निकल गयी. किसी ने रवींद्र पांडे से कह दिया कि ढुल्लू महतो आपको नाटा पांडे कहता है. गुस्से में रवींद्र पांडे ने जवाब दिया कि मैं ब्राहमण हूं जिंदा में भी खाता हूं और मुर्दा में भी खाता हूं. धनबाद जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह से रवींद्र पांडे ने कार्रवाई करने को कहा. वहीं अब उन दोनों की बीच की लड़ाई साफतौर से जगजाहिर है. वजह साफ है. ढुल्लू महतो गिरिडीह सीट से बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ना चाहता है. इस काम में सबसे बड़ा रोड़ा रवींद्र पांडे हैं. वहीं धनबाद जिले के बीसीसीएल के ब्लॉक-2 जो गोविंदपुर और बरोड़ा एरिया पड़ता है, उस इलाके में वर्चस्व को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच अदावत चल रही है. पहले तो सारा खेल पर्दे के पीछे हो रहा था, लेकिन चुनाव नजदीक आने की वजह से अब खुल्मखुल्ला ललकार का दौर जारी है. माना जा रहा है कि ढुल्लू महतो की रांची से नजदीकी होने की वजह से वो ज्यादा रेस हैं. वहीं अपना तजुर्बा और राजनीतिक रसूख के दम पर रवींद्र पांडे ताल ठोक रहे हैं.

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चंद्रशेखर अग्रवाल Vs पीएन सिंह

लोकसभा चुनाव से पहले कोयलांचल बीजेपी में हंगामा क्यों है बरपा

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कोयलांचल बीजेपी में एक और अदावत ने अखबारों में जगह लेना शुरू कर दिया है. धनबाद के मेयर चंद्रशेखर सिंह की राजनीति में आगे बढ़ने की चाहत की वजह से ऐसा हो रहा है. उनके सामने पीएन सिंह हैं. पीएन सिंह के बारे कहा जाता है कि उनसे राजनीति में दो-दो हाथ करना मुश्किल है. क्योंकि राजनीति के अलावा वो कुछ करते ही नहीं हैं. चंद्रशेखर अग्रवाल धनबाद के मेयर हैं. प्रदेश बीजेपी में वो अच्छी पैठ रखते हैं. ऐसे में मेयर से सांसद बनने की चाहत उन्हें क्यों ना हो. वो भी जब उनकी नजदीकियां सीएम हाउस से हो. अच्छा खासा कारोबार और बैंक बैलेंस हो. धनबाद जिले की लोकल राजनीति की बात की जाए तो मेयर और सांसद में जरा भी मेल नहीं है. ऐसे कई कार्यक्रमों में देखा गया है कि मेयर की मौजूदगी हो तो सांसद की नहीं और सांसद की हो तो मेयर की नहीं. लोकसभा चुनाव नजदीक आते-आते हो सकता है कि कई और जबानी जंग दोनों दिग्गजों के बीच देखने को मिले. लेकिन इस शह और मात की खेल जीत उसी की होगी जिसे बीजेपी टिकट देती है.

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तो, जगरनाथ महतो क्या करेंगे

लोकसभा चुनाव से पहले कोयलांचल बीजेपी में हंगामा क्यों है बरपा

बीजेपी से गिरिडीह लोकसभा सीट के लिए टिकट लेना इतना भी आसान इस बार नहीं होगा. माना जा रहा है कि पिछले लोकसभा में चंद वोट से हारने वाले विपक्ष के दिग्गज नेता जगरनाथ महतो इस बार झामुमो का दामन छोड़ बीजेपी का हाथ थाम सकते हैं. राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा काफी जोर-शोर से हो रही है. अगर ऐसा होता है तो इसे एक तरह से राजनीतिक भूचाल ही माना जाएगा. इस फैसले से पहले सभी की आंखे एक और फैसले पर टिकी हुई है. दरअसल एक दारोगा की मौत में जगरनाथ महतो आरोपी हैं. तेनुघाट न्यायालय में ये मामला लंबित है. सारा खेल उस फैसले पर ही टिका हुआ है. अगर लोकसभा चुनाव से पहले कोर्ट का फैसला जगरनाथ महतो के पक्ष में आता है, तो ये कहा जा रहा है कि गिरिडीह लोकसभा सीट के लिए बीजेपी जगरनाथ महतो पर भरोसा कर सकती है. ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए झामुमो और कांग्रेस का गठबंधन हो रहा है.

कांग्रेस के दिग्गज नेता राजेंद्र सिंह इस बार लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो झामुमो को अपना उम्मीदवार नहीं उतारना होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और विधानसभा चुनाव में झामुमो किसी तरह का कोई रिस्क नहीं लेना चाहेगी. झामुमो की राजनीति से ये साफ हो चुका है कि लोकसभा चुनाव से ज्यादा उनके लिए विधानसभा चुनाव जरूरी है. दोनों चुनाव से पहले कोयलांचल में बीजेपी की राजनीति देखना दिलचस्प होगा.

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