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बकोरिया कांड में सरकार के आदेश के बाद भी आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट नहीं जा रहा पुलिस विभाग

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Ranchi : हाई कोर्ट ने बकोरिया कांड को लेकर सीबीआई से जांच कराने के आदेश दिया, जिसके बाद सरकार की तरफ से कहा गया कि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेगी. मामले ने खूब तूल पकड़ा. खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने इस मामले को लेकर सीएम को एक चिट्ठी भी लिखी. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में जाने का सरकार का फैसला गलत है. अगर बकोरिया कांड सही है, तो सीबीआई से जांच कराने से सरकार क्यों बचना चाहती है? सरकार की सुप्रीम कोर्ट जाने की बात को करीब एक महीना होने को है, लेकिन सरकार ने अभी तक सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया है. इन सबके बीच सवाल यह उठ रहा है कि आखिर क्यों पुलिस विभाग सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा रहा है. इधर गृह विभाग के आला अधिकारी की मानें, तो विभाग की तैयारी जारी है. एक हफ्ते के बाद सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए अपील की जा सकती है.

सीआईडी ने कहा- पुलिस मुख्यालय से पता चलेगा

मामले पर न्यूज विंग ने सीआईडी के एडीजी अजय कुमार सिंह से बात की. उन्होंने कहा कि सीआईडी से इस बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं मिल पायेगी. पुलिस मुख्यालय ही बता पायेगा कि मामले में देरी क्यों हो रही है. वहीं, केस को देख रहे सीआईडी एसपी सुनील भास्कर ने भी कुछ नहीं कहा. उन्होंने मीटिंग में होने की बात कही. इधर, 19 नवंबर को सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. सीआईडी ने इस मामले की जांच करके मुठभेड़ को सही बताया है और झारखंड पुलिस के अफसरों को क्लीन चिट दे चुकी है. 22 अक्टूबर को झारखंड हाई कोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिये थे. जांच का आदेश देते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने टिप्पणी की थी कि सीआईडी ने सही दिशा में जांच नहीं की है. इससे लोगों का जांच एजेंसी पर से भरोसा उठ गया है. लोगों का भरोसा कायम रखने के लिए मामले की सीबीआई जांच जरूरी है.

क्या था मामला

पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया गांव में आठ जून 2015 की रात एक नक्सली और 11 निर्दोष लोगों को कथित पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया था. इस कांड की जांच सीआईडी पहले ही कर चुकी है, जिसमें इसने झारखंड पुलिस की कार्रवाई को क्लीन चिट दे दी. इसके बाद 22 अक्टूबर 2018 को झारखंड हाई कोर्ट ने इस फर्जी मुठभेड़ की सीबीआई जांच का आदेश दिया था, जिसके बाद सीबीआई ने 19 नवंबर को मामले में प्राथमिकी दर्ज की, जिसकी संख्या RC.4(S)/2018/SC-1/CBI/NEW DELHI  है. प्राथमिकी भादवि की धारा 147, 148, 149, 353, 307, आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-B)A/26/27/35 और एक्सप्लोसिव सब्सटांस एक्ट की धारा 4/5 के तहत दर्ज की गयी है. इस कांड की जांच सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच नयी दिल्ली की तरफ से की जा रही है.

पुलिस नहीं चाहती थी जांच

बकोरिया कांड की जांच में कई बार अनुसंधान को प्रभावित करने की घटना हुई. पूरे प्रकरण में पुलिस महानिदेशक डीके पांडेय की भूमिका भी पारदर्शी नहीं रही. राज्य सरकार के कई आला अधिकारियों को भी जांच को बाधित करने के लिए जिम्मेदार माना जा रहा था. सीआईडी को काफी दिनों तक जांच शुरू करने के लिए इंतजार करना पड़ा. पहले भी ढाई साल तक जांच में सीआईडी की टीम ज्यादा सक्रिय नहीं रही. सीआईडी के तत्कालीन एडीजी एमवी राव के पदभार ग्रहण करने के बाद जांच में तेजी आयी थी. इस प्रकरण में बाद में श्री राव का भी तबादला हो गया.

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