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क्यों न बीमार पड़े झारखंड? भगवान भरोसे मरीजों का इलाज, न नर्स, न डॉक्टर, न ही जरूरत भर पारा मेडिकल स्टाफ

आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के लिए पांच लाख.  108 एंबुलेंस सेवा, 104 टेली मेडिसिन योजना, 101 मोबाइल मेडिकल यूनिट, ये चंद योजनाएं हैं

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Kumar Gaurav

Ranchi : आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के लिए पांच लाख.  108 एंबुलेंस सेवा, 104 टेली मेडिसिन योजना, 101 मोबाइल मेडिकल यूनिट, ये चंद योजनाएं हैं जिनके दम पर झारखंड राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने का दावा सरकार और अधिकारी करते रहे हैं. निश्चित तौर पर राज्य के लोगों को आयुष्मान और 108 एंबुलेंस का लाभ भी मिल रहा है, पर स्वास्थ्य सिस्टम की आत्मा  डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पारा मेडिकल स्टाफ ही नहीं हो , तो स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर इन योजनाओं का होना कतई मायने नहीं रखता. डॉक्टरों के नाम पर राज्य में 1316 के स्थान पर मात्र 300 डॉक्टर ही मौजूद हैं. डॉक्टरों की संख्या भी आधे से कम है. जहां राज्य में मानकों के हिसाब से 3686  डॉक्टर होने चाहिए वहां सिर्फ 1600 डॉक्टरों ही मौजूद हैं.

सरकारी मानकों को देखा जाये तो 1126 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होने चाहिए पर मौजूद सिर्फ 330 ही है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नहीं होने से ग्रामीणों को इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भर रहना पड़ता है.

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महज दस प्रतिशत नर्स, आठ प्रतिशत पारा मेडिकल स्टाफ

कहा जाता है कि अस्पतालों की रीढ़ नर्सिंग और पारा मेडिकल स्टाफ होते हैं. पर राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इससे कोई लेना देना नहीं है. पारा मेडिकल और नर्सिंग स्टॅाफ की संख्या महज नाम मात्र की है. स्टाफ नर्सों की संख्या 4707 के स्थान पर 407 ही है, जो कुल जरूरत का महज दस प्रतिशत ही है, वहीं पारा मेडिकल स्टाफ के नाम पर जहां 4133 होने चाहिए वहां मात्र 350 ही मौजूद हैं.

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राज्य में जितने प्रखंड उससे भी कम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

राज्य में 263 प्रखंड हैं. अगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की बात की जाये तो 168 ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं. जहां डॉक्टर भी कभी कभार ही जाते हैं. ग्रामीण स्तर स्वास्थ्य सुविधा देने में तो सरकार पूरी तरह से नाकाम रही है. राज्य के गांवों में अभी भी इलाज गांव के झोलाछाप डॉक्टरों के जिम्मे ही है.

मल्टीपरपस वर्कर्स नहीं होने से मरीजों के परिजनों को ही करना पड़ता है काम

राज्य में कुल मल्टीपरपस वर्कर की  जरूरत  7088 की है. जिनकी संख्या वर्तमान में मात्र 722 ही है. इनके नहीं होने से राज्य में मरीजों के परिजनों को ही मरीज की साफ सफाई, दवाई और जररूरत के सभी काम खुद से करने पड़ते हैं. राज्य में एएनएम की कुल जरूरत राष्ट्रीय मानकों के हिसाब से 14176 हैं, पर उनकी उपलब्धता आधी ही है.

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