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Jharkhand: विकास की दौड़ में क्यों पीछे रह गया झारखंड, सीआईआई के सेमिनार में मंथन

Jamshedpur: प्राकृतिक और खनिज संसाधनों के बावजूद विकास की दौड़ में पीछे रह गये झारखंड की वजह को तलाशेंगे विशेषज्ञ. भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) झारखंड चैप्टर की ओर से सोमवार 7 मार्च को अलकोर होटल में झारखंड की संभावनाओं पर विशेषज्ञ बात करेंगे. अगले 25 साल में झारखंड के विजन स्टेटमेंट पर चर्चा होगी कि जब 2047 में भारत अपनी आजादी का शताब्दी समारोह मनाएगा, उस वक्त झारखंड देश-दुनिया में विकास की पंक्ति में कहां खड़ा रहेगा.

40 फीसदी खनिज संसाधन
झारखंड सबसे युवा भारतीय राज्यों में से एक है, जो 2000 में तत्कालीन बिहार से अलग होकर बना था. राज्य में देश के कुल खनिज संसाधनों का लगभग 40 फीसदी हिस्सा है. झारखंड, देश में यूरेनियम और कोकिंग कोल का एकमात्र उत्पादक भी है. राज्य में प्रचूर मात्रा में पानी, ऊर्जा भंडार, वन और उपजाऊ भूमि है, जो राज्य को देश के सबसे विकसित राज्यों में से एक बनने में मदद कर सकता है.किसी भी राज्य के लिए औद्योगिक विकास न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बल्कि उसके लोगों के रोजगार और आजीविका पैदा करने के लिए भी महत्वपूर्ण है. इसे ध्यान में रखते हुए सीआईआई झारखंड ने उभरते झारखंड पर यह सत्र रखा है. इसमें विभिन्न क्षेत्र के लीडर और विशेषज्ञ भाग लेंगे. झारखंड में विकास की वर्तमान चुनौतियों के साथ ही ईओडीबी और सरकारी भागीदारी पर वृद्धि के सुझावों, मौजूदा औद्योगिक बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, झारखंड को एक औद्योगिक विकास के रूप में बढ़ावा देने में स्टार्टअप और नवाचार संस्कृति और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श होगा.

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