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नेताजी की जंयती को लेकर भाजपा और तृणमूल में क्यों मचा है सियासी घमासान ? जानिए पीछे की राजनीति

Uday Chandra

New Delhi : 23 जनवरी को नेता जी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती को लेकर केंद्र और बंगाल सरकार के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है. केंद्र की मोदी सरकार ने जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है वहीं ममता बनर्जी ने इसे ‘देश नायक दिवस’ के तौर पर मनाने का एलान किया है. दोनों दलों की नजर पश्चिम बंगाल चुनाव पर है.

 

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केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने कहा है कि अब हर साल 23 जनवरी को नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पराक्रम दिवस के रूप में मनायी जायेगी. केंद्र सरकार द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन भी किया गया है जिसमें इसमें राजनाथ सिंह, अमित शाह, ममता बनर्जी, जगदीप धनकड़, मिथुन चक्रवर्ती, काजोल और एआर रहमान सहित 84 लोग सदस्य के तौर पर शामिल किए गये हैं.

 

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हालांकि केंद्र के इस फैसले पर  नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस का कहना है कि काफी सालों से भारत की जनता नेताजी का जन्मदिन देश प्रेम दिवस के रूप में मना रही है. इस घोषणा से हम खुश हैं लेकिन अगर भारत सरकार 23 जनवरी की देश प्रेम दिवस के रूप में घोषणा करती तो ज़्यादा उपयुक्त होता.

लेकिन ममता बनर्जी नहीं चाहती कि चुनावी साल में भाजपा नेताजी सुभाष चंद्र बोस का कोई फायदा बंगाल में उठाए. ममता बनर्जी 23 जनवरी को योजना आयोग की तर्ज पर एक संगठन की स्थापना का एलान करने की तैयारी में है. ममता बनर्जी की दलील है कि इसके माध्यम से नेताजी के विजन को दुनिया के बीच ले जाने की कोशिश की जायेगी.

दरअसल, पराक्रम दिवस की घोषणा ऐसे समय में की गयी है  जब बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गरम है. भाजपा बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को हटाकर राज्य में ‘कमल’ खिलाने की पूरी कोशिश कर रही है. इसे लेकर बीजेपी के बड़े नेता राज्य का लगातार दौरा कर रहे हैं. टीएमसी के कई बड़े नेता भी पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. कहा जा रहा है कि बीजेपी इस बार ममता बनर्जी को सबसे कड़ी चुनौती देने वाली है. ममता को अपना सियासी परिवार बचाकर रखने के लिए जूझना पड़ रहा है.

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इस कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जनवरी को पश्चिम बंगाल का दौरा कर सकते हैं. पीएम मोदी  कोलकाता के विक्टोरियल मेमोरियल में होने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जयंती समारोह में हिस्सा लेकर बंगाल में बीजेपी के लिए माहौल बनाने की कोशिश करेंगे.

हालांकि ममता ने मोदी सरकार को घेरने के लिए एक और दांव खेल दिया है. उन्होंने नेता जी की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किए जाने की मांग की है. उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भी लिखी है. ममता बनर्जी इस मुद्दे का अपनी सभी रैलियों में भी इस्तेमाल करती हैं.

 

हालांकि देखा जाए तो बंगाल की राजनीति में महापुरुषों की विरासत पर पहले भी  सियासी संग्राम होता रहा है. ईश्वरचंद्र विद्यासागर और रविन्द्रनाथ ठाकुर के नाम पर बंगाल की राजनीति इससे पहले गरम हो चुकी है. ऐसे में चुनावी साल में नेता जी सुभाष चंद्र बोस पर अपना ‘अधिकार जमाने’ को लेकर बीजेपी और टीएमसी अगर राजनीति कर रही है, तो कोई आश्चर्य नहीं है.

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