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ट्विटर पर चलने वाली सरकार, रोजगार के लिए चल रहे आंदोलन से क्यों कर रही इंकार

Rahul Guru

Ranchi : झारखंड सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से तकरीबन दो माह पहले विज्ञप्ति जारी की गयी थी. इस विज्ञप्ति में बताया गया था कि कैसे हेमंत सोरेन की सरकार न केवल कागजों पर काम कर रही है बाकि ट्विटर सहित दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर आये मामले को भी संज्ञान में लेती है. लोगों की समस्याएं सुन रही है. कई उदाहरण भी दिए गये थे.

लेकिन, यही सरकार रोजगार देने की मांग को लेकर आंदोलनरत राज्य के तीन लाख से अधिक युवाओं की आवाज नहीं सुन रही है. मजेदार बात यह है कि जिस ट्विटर पर सरकार चल रही है उसी ट्विटर पर जारी आंदोलन से सरकार नजरें फेरे हुई है. पिछले 24 घंटे में रोजगार की मांग को लेकर ट्विटर पर युवा अभियान चलाये हुए हैं. युवाओं का कहना है ट्विटर पर चलने वाली सरकार, रोजगार के लिए चल रहे आंदोलन से क्यों इन्कार कर रही है?

क्या है युवाओं का अभियान

ट्विटर पर झारखंड के युवा सोमवार से #jharkhandi_yuva_mange_rojgar अभियान चला रहे हैं. यह अभियान तीन जुलाई तक चलेगा. युवाओं की मानें तो वे इस अभियान के माध्यम से हेमंत सोरेन सरकार की ओर से घोषित नियुक्ति वर्ष का अंतिम संस्कार कर रही है. इस आंदोलन की रूप रेखा कुछ ऐसी है कि सोमवार से ही यह अभियान ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है. आलम यह है कि 24 घंटे में तीन लाख से अधिक राज्य के बेरोजगार युवा इससे जुड़े और यह संख्या बढ़ ही रही है. इसके बाद भी यह आंदोलन राज्य सरकार की नज़र में नहीं आ सका है.

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क्यों हो रहा यह आंदोलन

इस आंदोलन से जुड़े उम्मीदवारों के मुताबिक राज्य के बेरोजगार युवा सरकार को यह याद दिलाना चाहती है कि 2021 नियुक्तियों का साल है. जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कर रखी है. आंदोलनरत युवाओं का कहना है कि राज्य में दर्जनों नियुक्तियां नीतिगत पेच में फंसी हुई है. परीक्षा दे कर युवा सालों से नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं.

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पेच में फंसी नियुक्तियां

1. सातवीं से 10 वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के आवेदन को महीनों हुए परीक्षा तिथि तय नहीं.
2. जेएसएससी- सीजीएल पिछले 6 वर्षों से अधर में लटकी है. सरकार उस पर बिलकुल निष्क्रिय बनी हुई है.
3. पंचायत सचिव जिनकी चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. पर सरकार मेरिट लिस्ट जारी नहीं कर रही. 
4. जेएसएससी द्वारा लगभग 2 वर्ष पूर्व स्पेशल ब्रांच और एक्साइज कांस्टेबल की परीक्षा ली गयी लेकिन आज तक न उनका परीक्षाफल प्रकाशन हो पाया है और न ही कोई प्रक्रिया ही आगे बढ़ी है.

5. जेटेट पास अभ्यर्थी को भी सीधी नियुक्ति का वादा किया गया था लेकिन उनकी नियुक्ति को भी रोक दिया गया है.
6. जूनियर इंजिनियर की परीक्षा हुए लगभग 7 वर्ष बीत चुके है लेकिन उनकी सुध लेने वाला भी कोई नहीं है.
7. विभिन्न टेक्निकल कोर्स किये विद्यार्थियों की भी स्थिति कम बदतर नहीं है. उनकी नियुक्ति के लिए भी पहली बार वर्ष 2015 में जेएसएससी सीजीएल के साथ परीक्षा ली गयी थी जो रद्द कर दी गयी. आज तक उसका पुनः विज्ञापन नहीं आ पाया है.
8. एएनएम-जीएनएम नियुक्ति भी पेच में फंसी

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