Opinion

सोने का रेट इतना क्यों बढ़ रहा है, जब घरेलू डिमांड कम है!

Hasan Jamal Zaidi

Jharkhand Rai

‘सर्राफा बाज़ार में कल 24 कैरेट सोने का भाव 56600 रु तोला (10 ग्राम) दिखा रहा है. वहीं इंटरनेशनल मार्केट में भी 1 ओंस गोल्ड का रेट 1800 $ से ऊपर ट्रेंड कर रहा है.

इतने क्यूं बढ़ रहे हैं गोल्ड के रेट? जबकि घरेलू डिमांड तो इतनी नहीं है. और कोरोना के चलते पिछले 2 महीने से गोल्ड इंपोर्ट भी नहीं किया गया? फिर भी रेट इतने हाई क्यूं जा रहे हैं ? सवाल तो बनता है?

ऐसा पहले भी लिखा गया हैः गोल्ड बढ़ेगा और डॉलर टूटेगा. कंडीशन उसी तरफ जाती हुई लग रही है. गोल्ड दो वजह से ही बढ़ता है. या तो फाइनेंशियल क्राइसिस हो (मतलब मंदी) या इंटरनेशनल लेवल पर युद्ध जैसे हालात हो. और यहां दोनों बातें हैं.

Samford

भारत सोने का बड़ा खरीदार है. और हम 99% सोना आयात करते हैं.

क्योंकि हमारे यहां तो माइनिंग होती नहीं. और गोल्ड का रेट इंटरनेशनल मार्केट से तय होता है.

हमारे देश में 10 बड़े ज्वेलर्स की एक एसोसिएशन पिछले 100 साल से बनी हुई है. वही भारत में सोने का रेट निकालती है. इंटरनेशनल मार्केट के रेट डालर का रेट और टैक्स के अनुसार बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन तय करती है.

इस समय यूरोप और अमेरिका के इन्वेस्टर गोल्ड में इन्वेस्ट कर रहे हैं. इस वजह से वहां रेट हाई जा रहे हैं, तो जाहिर सी बात है भारत में भी रेट बढ़ेंगे.

यूरोप अमेरिका में फिजिकल गोल्ड खरीदने का इतना चलन नहीं है. जैसे चाइना और भारत में है. वहां गोल्ड ईटीएफ में ज्यादा निवेश करते हैं लोग. मतलब पेपर गोल्ड, वैसे पेपर गोल्ड खरीदने का सिस्टम हमारे यहां भी है और बहुत लोग इसमें भी खरीदते हैं.

क्योंकि भारत में सोना संस्कार से जुड़ा है. इसलिए यहां लगभग हर घर में थोड़ा बहुत सोना तो मिल ही जायेगा. एक अनुमान के मुताबिक, भारत में घरेलू सोना 24 से 25 हजार रुपये टन होने का अनुमान लगाया गया है.

इसलिए ये आईएमएफ जैसी संस्थाओं ने हमारी सरकार पर प्रेशर बनाया है कि आप अपने यहां गोल्ड का ब्योरा दें. सरकार ने ज्वेलर्स को तो इस दायरे में ले आये. उन्हें अब सोने की खरीद बेच का हिसाब देना पड़ता है. लेकिन आम लोगों को अभी तक इस दायरे में नहीं ला पाए.

अब सुना है सरकार इस पर भी कानून लाने जा रही है. अब सब नागरिकों को बताना होगा कि किसके पास कितना सोना है ?

भले ही सरकार अपने सोने का हिसाब जनता से छुपाए. रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने 2019 के फाइनेंशियल ईयर में 40 से 45 टन के करीब सोना खरीदा था.

मौजूदा समय में सरकार के पास 653 टन के लगभग सोना रिजर्व है. देखिए कितना अंतर है सरकार और पब्लिक के बीच सोने में ? और अभी इसमें मंदिरों का सोना नहीं जोड़ा है.

और ये भी सुना है कि 68 टन सोना विदेश में रख आये हैं. खैर जाने दीजिए हमें क्या मतलब?

दुनिया में गोल्ड का सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाला देश चाइना है. क्योंकि गोल्ड एक लिमिटेड कमोडिटी है. चाइना विश्व का लगभग 6.5 % गोल्ड प्रोडयूस करता है. इसके बाद मैक्सिको, अमेरिका आस्ट्रेलिया, रूस और अफ्रीका आते हैं.

जब मैक्सिको के कैर्लीफोर्निया में सोना निकला तो अमेरिका ने कैर्लीफोर्निया को हड़प लिया. ऐसे ही अफ्रीका में खाना जंगी फैला दी. जिससे उनका सोना लूट सके. बेसिकली ये लुटेरे ही हैं.

हमारा देश भी मुगल काल में सोने की चिड़िया कहलाता था. कारण यही था हमारे पास सोना बहुत था. हमारी टेक्सटाइल मतलब कपड़े की इंडस्ट्री उनसे बहुत बेहतर थी. यहां से कपड़ा जाता था और  बदले में हम सोना लेते थे.

ऐसे ही साउथ की रियासतों में भी था. जैसे विजय नगर साम्राज्य. साउथ में मसाले बहुत थे. जब पुर्तगाली और डच पानी के रास्ते यहां आये. तो उन्होंने गोश्त भूनने में मसालों का उपयोग किया. उन्हें स्वाद आने लगा. और हम मसालों के बदले गोल्ड लेने लगे. इसलिए आज भी साउथ में नॉर्थ से ज्यादा सोना है. वहां के मंदिरों के तो तहखाने तक भरे पड़े हैं. जिसका कोई ऑडिट नहीं है.

अब फिर कंडीशन वैसी ही बन रही है. जब डॉलर में इंटरनेशनल ट्रेड कम होगी तो डालर गिरेगा. अभी ईरान ने वेनेजुएला को तेल और दूसरा सामान दिया. लेकिन उसकी ट्रेड गोल्ड में की. रुस, चाइना, ईरान और कुछ देश में तय कर चुके हैं कि वो तेल और दूसरी चीजों के आयात निर्यात डालर में नहीं करेंगे. इससे डॉलर डिच होगा और गोल्ड बढ़ेगा.

दूसरी करेंसी यूहान, रुबल,  रुपया, रियाल मजबूत होंगे. क्रिफ्टो करेंसी भी बढ़ेगी. ये फिफ्थ जनरेशन वॉर इसी तरह लड़ी जायेगी. परमाणु बम शायद कोई न फोड़े. क्योंकि अगर एक फोड़ेगा तो बाकी भी फोड़ेंगे और फिर तो सारा मामला ही खत्म हो जायेगा.

डिस्क्लेमर : ये लेखक के निजी विचार हैं.

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