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आत्‍महत्‍या क्‍यों करते हैं लोग, अपने बच्‍चों को सुसाइड करने से कैसे रोकें

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Ranchi: सामूहिक आत्महत्या बिल्कुल भी संभव नहीं है. कोई व्यक्ति अगर आत्महत्या कर रहा है, तो उसकी पत्नी साथ दे सकती है, लेकिन बच्चे नहीं. बच्चों का अपना जीवन है. वे जिंदगी जीना चाहते हैं. किसी का भय दिखाकर कोई ऐसा करता है, तो वह गलत है. अगर परिवार में कोई मानसिक रोगी है, तो उसका उचित इलाज कराना चाहिए, न कि डिप्रेशन में आकर पूरे परिवार को ही खत्म कर दें. ये बातें सामूहिक आत्‍महत्‍या, रेप जैसे ज्‍वलंत अपराध से जुड़े सवालों पर मनोचिकित्‍सक डॉ उषा नारसरिया ने न्‍यूजविंग से खास बातचीत में कहीं. प्रस्तुत हैं बातचीत के कुछ अंश-

सवाल: छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार करनेवाले क्या मानसिक रोगी होते हैं?

जवाब: जी बिल्कुल. यह एक मानसिक विकृति है. जो लोग जो छोटी-छोटी बच्चियों के साथ रेप करते हैं, वे मानसिक रूप से बीमार होते हैं. छोटी बच्चियां ऐसे लोगों के टारगेट में होती हैं, क्योंकि छोटी बच्चियां ज्यादा विरोध नहीं कर पाती हैं.

सवाल: क्या ऐसे लोगों के लिए कोई मेडिकल ट्रीटमेंट है?

जवाब: हां है. इसमें पहला ट्रीटमेंट मां-बाप द्वारा अपने बच्‍चों को देना चाहिए. मां-बाप सोचते हैं बच्चों को अच्छी बातें सिखायेंगे, तो बच्चा बड़ा होकर अच्छा व्यक्ति बनता है. जबकि, ऐसा नहीं है. सिर्फ अच्छी बातें बताने से नहीं, बल्कि बच्चों को अच्छे संस्कार भी देने की जरूरत है.

सवाल: छोटे बच्चों के लिए क्‍या मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, खरनाक हैं?

जवाब: छोटे बच्चों के लिए मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, ये सभी खतरनाक हैं. बच्चों को इनसे दूर रखना चाहिए. मोबाइल, टीवी में सबकुछ साकार रूप से दिख जाता है, जो बच्चों के मन पर बुरा प्रभाव डालता है. बच्चे जैसा देखते हैं, वैसा ही सीखते हैं और करने की कोशिश करते हैं. जब तक बच्चों की बुद्धि का विकास प्रोपर न हो जाये, उन्हें इन सबसे दूर रखना चाहिए. आवश्यकता के अनुसार ही ये सब सुविधा बच्चों को देनी चाहिए.

सवाल: बच्चे परीक्षा में फेल होने के बाद आत्महत्या जैसे रास्ते अपना रहे हैं, क्या कारण है?

जवाब: बच्चों की इच्छा को शुरू से ही पूरा किया जाता है. इससे बच्चे में सोच आ जाती है कि हमें सबकुछ मिल जाता है. बच्चों को कभी ‘नो’ नहीं सुनने को मिलता है. अचानक जैसे ही उन्हें ‘नो’ सुनने को मिलता है, वैसे ही उनके मन में निगेटिव थॉट्स आने लगते हैं, और फिर वे सुसाइड अटेंप्ट कर बैठते हैं. ऐसा नहीं है कि सारा सुसाइड अटेंप्ट सक्सेसफुल हो जाता है.

सवाल: मानिसक बीमारी जन्मजात भी होती है क्या?

जवाब: नहीं, मानसिक बीमारी जन्मजात तो नहीं होती, लेकिन कई बार ऐसा पाया गया कि परिवार में किसी व्यक्ति को कोई मानसिक बीमारी होती है, तो वह जिनेटिक आ जाता है. बच्चे के जन्म लेने के साथ ही तीन साल तक का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है. जड़ को जैसा सींचा जायेगा, वैसा ही वह पेड़ आगे चलकर फल देगा. बच्चों को बात-बात पर मारना-पीटना या डराना या उसके मांगने से पहले ही उसका सबकुछ पूरा करना कर देना, ये सब नहीं होना चाहिए.

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