Jamshedpur

दुमका में संताली लेखकों के सम्मेलन में क्यों नहीं उठा सरना धर्म कोड का मुद्दा : सलखन मुर्मू

आदिवासी सेंगेल अभियान झारखंड, बंगाल, बिहार, ओड़िशा और असम में 22 दिसंबर को निकलेगा संताली भाषा विजय दिवस

Jamshedpur : पूर्व सांसद सह आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सलखन मुर्मू ने कहा है कि मातृभूमि और मातृभाषा को स्वर्ग से भी महान माना गया है. आदिवासियों के अस्तित्व, पहचान, हिस्सेदारी के लिए तो हासा (भूमि) और भाषा लाइफ- लाइन की तरह हैं. इनके बगैर आदिवासी अस्तित्व की कल्पना कठिन है. आज आदिवासी (संताल) समाज को ईर्ष्या और द्वेष त्याग कर सब के सहयोग की बहुत जरूरत है. परंतु दुर्भाग्य से संताल परगना की राजधानी दुमका में 10 अक्टूबर 2021 को आयोजित संताली लेखकों के सम्मेलन में संताली भाषा को झारखंड की प्रथम राजभाषा ( अनुच्छेद 345 ) बनाने और प्रकृति पूजक आदिवासी को सरना धर्म कोड देकर 2021 की जनगणना में शामिल करने की महत्वपूर्ण विषय को नहीं उठाने पर आदिवासी सेंगेल अभियान जहां दुख प्रकट करता है वहीं इसकी निंदा करता है. संताली को प्रथम राजभाषा और सरना धर्म कोड के सवाल पर आदिवासी सेंगेल अभियान को भारत सरकार की तरफ से क्रमशः पत्र संख्या: 11034/01/2020 तारीख: 5.8.2020 और पत्र संख्या 24013/3/2021 तारीख 6.9.2021 प्राप्त हुआ है. तत्कालीन झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से भी पत्र संख्या: 4/ 2018- 1894 तारीख 14.10.2020 प्राप्त हुआ है. परंतु लंबे समय तक एक संताल के राज्यपाल, संताल के मुख्यमंत्री और एक संताल के विरोधी दल के नेता होने के बावजूद झारखंड में संताल समाज को तिरस्कार ही मिला है.

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उदासीनता समझ से परे

संताली भाषा मोर्चा के नेतृत्व में चले संताली भाषा आंदोलन में आप लोगों के सहयोग के लिए धन्यवाद. परंतु फिलहाल संताली भाषा को झारखंड की प्रथम राजभाषा बनाने के सवाल पर आप लोगों की उदासीनता समझ से परे है. इस मामले पर एक महाशय सिद्धार्थ साहू के निरंतर समर्थन और चेष्टा तारीफ ए काबिल है. इस निमित हम सिद्धार्थ साहू की प्रशंसा करते हैं.

प्रथम राजभाषा बनाना सभी का दायित्व

संताली भाषा का झारखंड प्रदेश की प्रथम राजभाषा बनने से यह झारखंड की Lingua franca या संपर्क भाषा बन सकती है. इस भाषा का उपयोग नीचे से ऊपर तक पठन-पाठन का माध्यम के साथ सरकारी कार्य, व्यवसाय, सरकारी नौकरी की प्राप्ति और सिनेमा, टीवी, खबर कागज आदि के माध्यम से पूरी दुनिया में फैल सकती है. यही प्रथम बड़ी ऑस्ट्रो- एशियाटिक भाषा के साथ राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त आदिवासी भाषा है. अतएव संताली भाषा को झारखंड की प्रथम राजभाषा बनाना हम सब का एक बड़ा ऐतिहासिक दायित्व है.

22 दिसंबर को संताली भाषा विजय दिवस

हासा, भाषा, जाति, धर्म आदि के संरक्षण और प्रगति के लिए आदिवासी सेंगेल अभियान, संताली भाषा विजय दिवस- 22 दिसंबर 2021 से “सरना धर्म और संताली राजभाषा सगाड़ या रथ” का संचालन एक सप्ताह के लिए पांच प्रदेशों (झारखंड, बंगाल, बिहार, ओडिशा और असम) में करेगा. आशा है आदिवासी समाज प्रेमी सहर्ष अपना सहयोग प्रदान करेंगे.

साहित्य समाज का दर्पण

साहित्य समाज का दर्पण होता है. उस साहित्य रूपी आईने में समाज के भले- बुरे का प्रतिबिंब झलकना चाहिए. इस तथ्य की पुष्टि केंद्रीय साहित्य अकादमी, दिल्ली ने सेंगेल की चिट्ठी के प्रत्युत्तर में चिट्ठी संख्या 16/14/ 1038 तिथि 12/13.5.2021 द्वारा प्रदान किया है. उम्मीद है संताली साहित्य में भी संताल समाज की समस्या और समाधान का जिक्र हो रहा है. केंद्रीय साहित्य अकादमी समाज के लिए ही साहित्य और साहित्य के लिए ही साहित्य के रचनाकार ( लेखक / कवि). परंतु यदि रचनाकारों की रचना / कृति से आदिवासी समाज को कोई लाभ (प्रतिष्ठा) प्राप्त ना हो तो वैसी साहित्य रचना और रचनाकारों से आदिवासी समाज को क्या लाभ है ? आदिवासी सेंगेल अभियान सभी प्रतिष्ठित रचनाकारों से उम्मीद करता है कि जिन महत्वपूर्ण मुद्दों को आप लोगों ने दुमका के सम्मेलन में नजरअंदाज कर दिया है उन्हें समाज हित में महत्व देंगे. पूरा करेंगे.

करें गुरु गोमके रघुनाथ मुर्मू का स्मरण

चलो हम सब गुरु गोमके रघुनाथ मुर्मू के इस महत्वपूर्ण उक्ति का स्मरण कर आगे बढ़ चलें-
दारे गुजुग कान नेलते मिरु चेंड़े
राग दादा दया हया गे,
गुजुग कान आबोआग जाति धोरोम दारे,
चेदग बाबो राग दादा आबो ओना नेलते ?

जब मरे वृक्ष को देख तोता क्रंदन करता है

सलखन मुर्मू का कहना है कि जब मरते हुए वृक्ष को देखकर तोता पक्षी भविष्य की चिंता में क्रंदन कर रहा है. तब हम आदिवासी अपनी जाति- धर्म के वृक्ष को मरते हुए देखकर भी चुप क्यों हैं ?

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