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आखिर क्यों आजसू गिरिडीह सीट पर अबतक नहीं कर पाया उम्मीदवार का ऐलान, ये हैं चार वजहें

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Akshay/Ravi

Ranchi: झारखंड में आजसू को एक ही सीट पर लोकसभा चुनाव लड़ना है. वो सीट है गिरिडीह लोकसभा सीट. एनडीए फोल्डर की यह सीट आजसू के खाते में जानें की अपनी वजह है. लेकिन ऐसी क्या वजह है कि सब तय होने के बावजूद आजसू सीट पर उम्मीदवार की घोषणा नहीं कर रहा है.

दूसरी तरफ मीडिया रिपोर्ट और चंद्रप्रकाश चौधरी की लोकसभा क्षेत्र में मौजूदगी यह साफ कर चुकी है कि मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ही उम्मीदवार होंगे. बस एक औपचारिकता बाकी है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि पार्टी उम्मीदवार का नाम घोषित करने में तारीख पर तारीख क्यों दे रही है.

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क्यों नहीं सुदेश महतो यह घोषणा कर देते हैं कि चंद्रप्रकाश चौधरी ही गिरिडीह से उम्मीदवार होंगे. इसके पीछे चार वजहें हैं. जानते हैं कौन सी वो चार वजहें हैं.

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क्या जेएमएम का इंतजार रहे हैं सुदेश

सुदेश महतो भले ही कभी झारखंड की राजनीति में एक चमकता सितारा हों. लेकिन हाल के दिनों में दो बार सिल्ली से विधानसभा और एक बार रांची से लोकसभा सीट हारने के बाद उनके अपने राजनीतिक करियर पर संकट गहरा रहा है. ऐसे में सुदेश की चाहत है कि वो इस बार गिरिडीह से किसी भी हाल में हार का मुंह ना देखना पड़े. सूत्रों की मानें तो सुदेश भी अपनी किस्मत गिरिडीह से आजमाना चाह रहे थे. लेकिन जिस तरीके से उनके रिश्तेदार और आजसू के कद्दावर नेता चंद्रप्रकाश चौधरी ने गिरिडीह पर अपना दावा ठोका है. उससे सुदेश महतो डायरेक्ट चंद्रप्रकाश चौधरी को चुनाव लड़ने से मना नहीं कर पाए. बीजेपी के नेताओं का मानना है कि यह आजसू की अपनी समस्या है. वो खुद ही समस्या का हल ढूंढें.

ढुल्लू का नहीं मिलेगा साथ

ढुल्लू महतो का आजसू से अपना लगाव रहा है. वो पार्टी में बतौर सक्रिय सदस्य रहे हैं. पार्टी छोड़ने की वजह भी कहीं ना कहीं सुदेश महतो ही थे. लेकिन चंद्रप्रकाश चौधरी से उनकी नजदीकी आज भी कायम है.

चुनाव में ढुल्लू ने अपनी राजनीतिक समझ को दिखाते हुए पूरा साथ देने का वादा किया है. ढुल्लू महतो चंद्रप्रकाश चौधरी के साथ-साथ रैलियां कर रहे हैं.

ऐसे में अगर सुदेश महतो गिरिडीह से चुनाव लड़ते हैं तो ढुल्लू महतो का साथ मिलना मुश्किल हो जाएगा. पार्टी भी जानती है कि इस चुनाव में बेड़ा पार करने के लिए ढुल्लू महतो का साथ कितना जरूरी है.

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आंतरिक कलह होने का डर

हर बार तारीख बढ़ने की तीसरी वजह है कि सुदेश महतो के फैसले से आंतरिक कलह गहरा सकता है. पार्टी दो फाड़ में बंट सकती है. इसलिए किसी फैसले पर पहुंचने से पहले सुदेश पूरा समय ले रहे हैं.

वो अब भी कोई राजनीतिक दांव खेल सकते हैं. वो ऐसे दांव के तलाश में हैं, जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी नहीं टूटे. लेकिन इसकी संभावना काफी कम आंकी जा रही है. बीजेपी भी नहीं चाह रही है कि लोकसभा चुनाव के दौरान आजसू किसी आंतरिक कलह से गुजरे.

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सुदेश मारना चाह रहे मौके पर चौका

गिरिडीह लोकसभा सीट पर आजसू की जो रणनीति बनती दिखायी दे रही है. वो हर बार से ज्यादा मजबूत दिखायी दे रही है. हर बार आजसू के सामने बीजेपी का भारी-भरकम उम्मीदवार होता था.

जिसके खिलाफ आजसू को वोट जुटाने पड़ते थे. लेकिन इस बार गिरिडीह से निर्भय शाहबादी, बाघमारा से ढुल्लू महतो, गोमिया में आजसू की मजबूत पकड़, टुंडी में पार्टी का खुद का विधायक होना और बेरमो में एक विपक्षी पार्टी का साथ भी मिलने की खबर पुष्ट रूप से आ रही है.

लिहाजा ऐसे मौके पर सुदेश महतो मौके पर चौका जड़ने की सोच रहे हैं. लेकिन राजनीति में कुछ भी तय कहा नहीं जा सकता.

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