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पाकिस्तान की बजाये बांग्लादेश से क्यों नहीं होती भारत की तुलना

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Girish Malviya

पिछले एक महीने से न्यूज़ चैनलों पर दिन-रात पाकिस्तान की बात होती रहती है. कभी कभी तो लगता है कि हम कहीं पाकिस्तान में ही तो नहीं रहते, पाकिस्तान को पापीस्तान बताना और मोदी की गोदी में बैठ जाना न्यूज़ चैनल्स का प्रिय शगल है.

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आपने कभी सोचा कि हर बात में हमारी तुलना पाकिस्तान से ही क्यों की जा रही है. जबकि तुलना चीन के साथ होनी चाहिए. और चीन के अलावा अगर किसी मुल्क से विशेषकर मुस्लिम मुल्क से तुलना करनी है तो बांग्लादेश से तुलना क्यों नहीं की जाती.

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पिछले दस सालों में बांग्लादेश ने अप्रत्याशित रूप से प्रगति की है. 2009 से अब तक बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय तीन गुनी हो गई है. हमारी प्रति व्यक्ति आय कितनी बढ़ी है? हमने यह कभी सोचने की जहमत नहीं उठायी, ना ही हमारे मीडिया ने यह सवाल सरकार से पूछा?

आज हर तरह से बांग्लादेश हमसे आगे निकल रहा है. बांग्लादेश की पिछले साल आर्थिक वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही और भारत की आर्थिक वृद्धि इस तिमाही 5 फीसदी तक आ गयी है. वहां एक व्यक्ति की औसत उम्र 72 साल हो गई है, जो कि भारत के 68 साल और पाकिस्तान के 66 साल से भी ज़्यादा है.

निर्यात ओर निवेश के मोर्चे पर आप भारत और बांग्लादेश की तुलना कीजिए मोदीराज के विकास की असलियत आपके सामने आ जाएगी.

2014 से बांग्लादेश का निर्यात लगातार 7 प्रतिशत की दर से बढ़ा है. वहीं 2014 बाद भारत का निर्यात लगातार गिर रहा है. 2013 में भारत का निर्यात 488 बिलियन डॉलर का था, जो अब घटकर 433 बिलियन डॉलर रह गया है. इसी दौरान भारत में निवेश ठहर-सा गया जबकि बांग्लादेश में 14.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा है.

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जन धन के खाते और डिजिटल लेनदेन पर हमारे प्रधानमंत्री बड़ा जोर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में ऐसे लोगों की तादाद 48 फ़ीसदी है जिनके पास बैंक खाता तो है लेकिन उससे कोई लेन-देन नहीं करते.

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दूसरी तरफ़ बांग्लादेश में ऐसे निष्क्रिय खाते 10.4 फ़ीसदी लोग के ही हैं. विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2017 में बांग्लादेश में जिन लोगों का बैंक खाता है उनमें से 34.1 फ़ीसदी लोगों ने डिजिटल लेन-देन किया जो दक्षिण एशिया में औसत 27.8 फ़ीसदी ही है.

गलत आर्थिक नीतियों से पिछले 6 से 7 सालों में हमारा टेक्सटाइल सेक्टर बिल्कुल बर्बादी की हालत में पहुंच गया है, जबकि हम प्रमुख कपास उत्पादक देश हैं और बांग्लादेश में कपास का उत्पादन नहीं होता है लेकिन तब भी भारत बांग्लादेश से पीछे है. टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बांग्लादेश अब चीन के बाद विश्व में दूसरे नम्बर पर है.

बांग्लादेश में बनने वाले कपड़ों का निर्यात सालाना 15 से 17 फ़ीसदी की दर से आगे बढ़ रहा है. 2018 में जून महीने तक कपड़ों का निर्यात 36.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हसीना का लक्ष्य है कि 2019 तक इसे 39 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए.

कोई हमारे प्रधानमंत्री से भी पूछे कि उन्होंने अपने औद्योगिक उत्पादन को बढ़ाने के क्या लक्ष्य निर्धारित किये हैं. यहां तो मोदी जी का ध्यान सिर्फ नफऱत की पैदावार बढ़ाने पर है और नफरत का ही उत्पादन बढ़ रहा है. बहुत जल्द हम नफरत फैलाने में विश्व में नम्बर वन बन जाएंगे. बधाई तो बनती है मोदी जी को इस बात के लिए.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं, और ये उनके निजी विचार हैं.)

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