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रांची में लोग क्‍यों करने लगे हैं पुलिस के साथ मारपीट?

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Ranchi: राजधानी रांची में पुलिस और आम जनों के बीच टकराव और झड़प की घटनाएं बढ़ गयी हैं. इसी दिसंबर महीने में सिर्फ रांची में ही ऐसी मारपीट और झड़प की कई घटनाएं देखने को मिली हैं. इस तरह की घटनाओं को लेकर मनोवैज्ञानिक डॉ पवन का कहना है कि आज की जनता जागरुक हो गयी है और पढ़ी-लिखी है. आम लोगों के बीच पुलिस की छवि अच्छी नहीं है और ना ही पुलिस के प्रति आम लोगों को विश्वास है. पुलिस अगर आम लोगों से अच्छे से व्यवहार करें, तो ठीक है. लेकिन वही पुलिस जब सोचती है कि हम सरकारी आदमी हैं और वर्दी का रौब दिखा कर लोगों के साथ गलत व्यवहार करती है तो आम लोग भी आक्रोशित हो जाते हैं, जिसके चलते आम लोग और पुलिस के बीच मारपीट की घटनाएं हो रही हैं.

आम लोगों में पुलिस के प्रति कम हुआ विश्वास

लोगों को किसी तरह का आवेदन देने या शिकायत दर्ज कराने के लिए थानों का चक्कर लगवाया जाता है. अगर कोई व्यक्ति प्राथमिकी दर्ज कराने जाता है तो पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने से ही कतराने लगी है. थानों से लोगों को बहाना बनाकर भगा दिया जाता है. इन सब कारणों से लोगों के बीच पुलिस की एक नकारात्मक छवि बनी है. जिसकी वजह से लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास कम होता जा रहा है. हाल के दिनों में ऐसी कई घटनायें देखने को मिली:

17 दिसंबर: पंडरा ओपी और सुखदेव नगर थाना की पुलिस यौन शोषण की एक पीड़िता को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए दौड़ाती रही.

16 दिसंबर: पुलिस पर सवाल खड़े करते हुए चित्रा कुमारी नाम की महिला ने अपने ऊपर जानलेवा हमले के आरोप में कई लोगों पर मामला दर्ज करवाया. इस पर महिला का कहना है कि एफआईआर से छेड़छाड़ हुई है. उसके मुताबिक थाना में कमजोर धाराओं के साथ मामला दर्ज किया गया.

15 दिसंबर: पीएम के निजी सचिव के भाई ओली मिंज के बैंक अकाउंट से 50- 50 हजार रुपये करके एक लाख रुपये की निकासी हो गयी थी. इस मामले में भुक्तभोगी डोरंडा थाना में शिकायत दर्ज कराने गये, तो वहां महिला मुंशी ने ओली मिंज के साथ बदसलूकी की और उन्हें थाना से भगा दिया था.

13 दिसंबर: गोशाला के समीप गोरखनाथ लेन स्थित दुकानदार ने जमीन मालकिन के कहने पर कोतवाली पुलिस द्वारा मारपीट का आरोप लगाया.

6 दिसंबर: सीआरपीएफ के जवान पवन कुमार मुंडा ने लापुंग थाना प्रभारी विकास कुमार पर बर्बरता से पिटाई का आरोप लगाया था.

हाल के दिनों में हुई पुलिस और आम लोगों के बीच मारपीट की घटनाएं

13 सितंबर: पुलिस और बाइक सवार युवकों के बीच सुजाता चौक के समीप झड़प हो गयी थी. इस हंगामे में ट्रैफिक डीएसपी रंजीत लकड़ा को हाथ में हल्की चोट लग गयी. जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस के जवानों ने सोनू मिश्रा नाम के युवक की जमकर पिटाई कर दी.

13 दिसंबर: गोशाला के समीप गोरखनाथ लेन स्थित दुकानदार ने जमीन मालकिन के कहने पर कोतवाली पुलिस द्वारा मारपीट का आरोप लगाया.

6 दिसंबर: सीआरपीएफ के जवान पवन कुमार मुंडा ने लापुंग थाना प्रभारी विकास कुमार पर बर्बरता से पिटाई का आरोप लगाया था.

07 दिसंबर: कोकर चौक के समीप हंगामा करने की सूचना पर पुलिस कार्रवाई के लिए पहुंची, तो राजेश, राकेश और रामू नामक तीन युवक पुलिस से उलझ गये. युवकों ने पीसीआर में तैनात जमादार मनोहर कुमार के साथ धक्का-मुक्की की और गाली-गलौज किया.

07 दिसंबर: खेलगांव चौक पर दुर्घटना के बाद जांच के लिए पहुंचे पीसीआर के अफसर के साथ बाइक सवार युवक  छोटू उर्फ बंतेश ने उनके साथ धक्का-मुक्की किया.

01 दिसंबर: सुखदेवनगर थाना की पुलिस ने ट्रैफिक सिपाही पर जानलेवा हमला और मारपीट के आरोप में चालक देववंश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

22 दिसंबर: चुटिया थाना के पास हाईकोर्ट के वकील और चुटिया यातायात थाना प्रभारी के बीच मारपीट.

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