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थोक महंगाई दर बढ़ कर 5.77 प्रतिशत, खुदरा महंगाई दर पांच महीने के उच्चतम स्तर पर

 मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. ऐसे समय में मोदी सरकार को परेशान करने वाली आर्थिक मोर्चे पर एक बुरी खबर आयी है.

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NewDelhi :  मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. ऐसे समय में मोदी सरकार को परेशान करने वाली आर्थिक मोर्चे पर एक बुरी खबर आयी है. बता दें कि जून माह में महंगाई दर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है. इस माह थोक महंगाई दर बढ़कर 5.77 प्रतिशत हो गयी है. महंगाई दर बढ़ने का कारण महंगी होती सब्जियां और पेट्रोल-डीजल के दामों में इजाफा बताया गया है. पिछले महीने की बात करें तो, थोक महंगाई दर का 4.43 प्रतिशत थी. पिछले साल यह आंकड़ा मात्र 0.90 प्रतिशत था. अब जबकि मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है,  महंगाई के मुददे पर कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल मोदी सरकार को मॉनसून सत्र में घेरने की जुगत में हैं.

सालाना आधार पर सब्जियों के भाव 8.12 प्रतिशत ऊंचे रहे

सरकार द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार जून माह में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 1.80 प्रतिशत थी,  जबकि मई के महीने में यह आंकड़ा 1.60 प्रतिशत था. इस वक्त खुदरा महंगाई दर पांच महीने के उच्चतम स्तर पर है. इसी को आधार बना कर विपक्ष सरकार पर हमलावर हो सकता है. आंकड़ों पर नजर डालें, तो सब्जियों के भाव सालाना आधार पर 8.12 प्रतिशत ऊंचे रहे. मई में सब्जियों के दाम 2.5 प्रतिशत बढ़े थे. इसी क्रम में मई के  11.22 प्रतिशत के मुकाबले बिजली और ईंधन क्षेत्र की मुद्रास्फीति दर जून में बढ़कर 16.18 प्रतिशत हो गयी. इसका मुख़्य कारण  वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ना बताया गया है. इस दौरान आलू की कीमतें एक साल पहले की तुलना में 99.02 प्रतिशत  ऊंची चल रही थीं. मई में आलू में मुद्रास्फीति दर 81.93 प्रतिशत थी.

दालों के मूल्याेंं में  गिरावट बनी हुई है

प्याज की बात करें तो महंगाई दर जून में 18.25 प्रतिशत और पिछले महीने 13.20 प्रतिशत थी. हालांकि उपभोक्ताओं को दालों में राहत  मिली है. दालों के मूल़्यों में गिरावट बनी हुई है. बता दें कि जून में दलहनों के भाव सालाना आधार पर 20.23% घट गये थे. सरकार ने अप्रैल की थोक मूल्य मुद्रास्फीति में संशोधन कर 3.62 प्रतिशत कर दिया है. शुरुआती आंकड़ों में इसके 3.18 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था. पिछले  सप्ताह खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी हुए थे. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जून में पांच प्रतिशत रही जो पांच महीने का उच्च स्तर है.

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बढ़ती महंगाई दर रिजर्व बैंक के अनुमान के अनुकूल

बता दें कि देश की मौद्रिक नीति तय करने में भारतीय रिजर्व बैंक मुख्यत खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों का इस्तेमाल करता है. बढ़ती महंगाई दर रिजर्व बैंक के अनुमान के अनुकूल ही है. बैंक ने अपने ताजा अनुमान में अक्तूबर-मार्च छमाही में खुदरा महंगाई दर 4.7% रहने का अनुमान लगाया है. पूर्व में बैंक का पूर्वानुमान 4.4% था. रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति समीक्षा की पिछली बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की थी. जान लें कि आरबीआई ने चार साल बाद नीतिगत दर में वृद्धि की है. जानकारी दी गयी है कि मौद्रिक नीति समीक्षा समिति की तीन दिवसीय बैठक 30 जुलाई से होगी.

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