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सरकारी आफिसों में अंधेरगर्दी पर किससे करें सवाल…कौन सुनेगा ?

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Dhanbad : धनबाद के जिला सचिवालय यानी कंबाइड बिल्डिंग में दिन में अंधेरा छाया रहता है. यहां गंदगी हर तरफ फैली है. गुरुवार को इसी भवन के दुतल्ला पर स्थित डीआरडीए के सभागार में धनबाद नगर निगम बोर्ड की बैठक में शहर को चकमक करने के सुनहले सपने दिखाते हुए करीब 20 करोड़ की योजनाओं को पारित किया गया. इतनी बड़ी बड़ी योजनाएं बनानेवाले कहां छोटी छोटी बातों पर ध्यान दें. भवन की जिन सीढ़ियों से निगम के 50 से अधिक पार्षद, नगर आयुक्त और मेयर चढ़कर ऊपर पहुंचे रहे हैं. उन्हें सीढ़ियों पर लंबे अरसे से की जा रही पान की पीक की चित्रकारी कैसे दिखती. भला हो किसी ने उनको यह दिखाकर शर्मिंदा नहीं किया.

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निगम की प्राथमिकता क्या है? सफाई या कुछ और ?

कुछ लोग इस पर बात कर रहे थे. तो कुछ इसके लिए निगम को जिम्मेवार मानने से इनकार कर रहे थे. इसलिए कि निगम किसी बिल्डिंग की सफाई नहीं करता. वह तो सिर्फ सार्वजनिक स्थलों की सफाई के लिए जिम्मेवार है? इसका जवाब किसी ने दिया. क्या निगम को उस बिल्डिंग की पहले सफाई नहीं करवानी चाहिए जहां उसकी बोर्ड की मीटिंग है? निगम सफाई के लिए किसी को भी विवश कर सकता है. कार्रवाई कर सकता है भले कोई प्राइवेट परिसर ही क्यों न हो. सवाल है कि निगम की प्राथमिकता क्या है? सफाई या कुछ और ?

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मिश्रित भवन में इतना अंधेरा क्यों है?

झारखंड सरकार के 23 विभागों का यहां दफ्तर है. बिहार के मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह ने इस भवन का उद्घाटन किया था. यहां डीसी के भी बैठने का चेंबर है. यह जिला सचिवालय की तरह है. इसके बाद भी इस आफिस की अंधेरगर्दी यह बता देती है कि जिले में विकास और स्वच्छता के प्रति संबंधित विभाग कितना गंभीर हैं. मिश्रित भवन के मुख्यद्वार से प्रवेश करते ही गलियारे में अंधेरे का साम्राज्य नजर आता है. प्रथम तल पर जाते ही खिड़कियों, छज्जे और लान में हर तरफ गंदगी दिखती है. यहां गंदगी एक दो दिन से नहीं है. यह सालों से है. इसे देखकर समझा जा सकता है. यह तो ऊपर का हाल है. अंदर बहुत ही बुरा है. सिस्टम से त्रस्त लोगों की बड़ी जमात है. उनकी कोई नहीं सुनता.

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