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कौन बनेगा बोकारो विधायकः बिरंची नारायण, परिंदा सिंह, राजेश महतो, मंटू यादव, प्रकाश सिंह लंबी है लिस्ट

Akshay Kumar Jha

Ranchi/Bokaro: सेक्टरों में बंटा बोकारो शहर और एक बड़े बाजार की तरह फैला चास. यानी बोकारो विधानसभा का विधायक इस बार कौन होगा. इस बात की चर्चा चुनाव आने से पहले तेज होनी लाजमी है.

कई तरह की बातें हो रही हैं. यूं तो बीजेपी इस विधानसभा क्षेत्र को एक सुरक्षित सीट मानती है. लेकिन राजनीति का गणित बिगड़ जाना बोकारो के लिए संभव है.

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दिग्गज नेता समरेश सिंह को पहली बार चुनाव लड़ते हुए बिरंची नारायण पूरे राज्य में रिकॉर्ड वोट से हराते हैं. तो महज दो साल से राजनीति करने बोकारो आए प्रकाश सिंह मौजूदा विधायक को नाको चने चबवा देते हैं.

ऐसा बोकारो में संभव है. कई सालों से बैकफुट में रहने वाली कांग्रेस अब फ्रंट फुट में आकर खेल रही है. ताल ठोक कर बीजेपी को चैलेंज कर रही है.

जो भी हो इस बार की सीधी टक्कर कांग्रेस और बीजेपी के बीच होनी है. अगर कांग्रेस और जेएमएम का गठबंधन नहीं हुआ तो जेएमएम भी राजनीति पासा पलटने का माद्दा रखे हुए है. लेकिन फिलवक्त बोकारो की राजनीति विधायक के लिए दावेदारी है.

पूरी शिद्दत से लगी है कांग्रेस

बोकारो विधानसभा की राजनीति करीब 25 सालों से झारखंड के राजनीति के महारथी समरेश सिंह के आस-पास घूमती रही है. लेकिन ढलती उम्र के पड़ाव में अब विधायकी और राजनीति दोनों सिंह घराने से दूर हो चली है.

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इस दूरी को नापने की कोशिश उनकी बहुरानी परिंदा सिंह भरसक कर रही है. मंझले बेटे माना सिंह की पत्नी परिंदा करीब एक साल पहले कांग्रेस का दामन थाम चुकी हैं.

लेकिन क्षेत्र में सक्रिय वो करीब चार साल से हैं. बोकारो की राजनीति समझ रखने वालों का कहना है कि फिलहाल परिंदा सिंह ही है जो सिंह घराने की राजनीति विरासत वापस ला सकती है. लेकिन कांग्रेस का बोकारो में हाल एक अनार सौ बीमार वाली है.

बोकारो की राजनीति में हमेशा से हस्तक्षेप करने वाले ददई दुबे भी बोकारो से कांग्रेस की टिकट पर लड़ने की सोच रखे हुए हैं. वहीं विश्रामपुर विधानसभा से वो अपने बेटे को भी कांग्रेस से चुनाव लड़ाना चाह रहे हैं.

ऐसे में पार्टी किस विधानसभा के टिकट के लिए हामी भरती है, ये देखने वाली बात होगी. बोकारो के कांग्रेस जिला अध्यक्ष मंजूर अंसारी भी अल्पसंख्यक कार्ड खेलने की पूरी तैयारी में हैं. बोकारो के पूर्व विधायक मरहूम इजराईल अंसारी के बेटे पूर्व जिला परिषद सदस्य इजराफिल अंसारी उर्फ बबनी भी अपने पिता के पुराने वफादारी को पार्टी को याद दिलाने की कोशिश में लगे हैं.

जिला परिषद सदस्य संजय कुमार भी अपने लोगों के बीच अपनी दावेदारी को पुख्ता करने में लगे हैं. पूर्व जिला परिषद सदस्य जवाहर लाल महथा, उमेश गुप्ता, सीके ठाकुर, पी नैयर और साधु चरण गोप दावेदारों की लिस्ट में हैं.

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बोकारो विधानसभा के लिए कांग्रेस का एक पत्ता कभी भी खुल सकता है. कांग्रेस पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर की राजनीति हरकत से फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि वो विधानसभा में दावेदारी कर सकते हैं.

लेकिन उनकी राजनीतिक परिपक्वता का आंकलन लगाना जरा मुश्किल है. बोकारो में ज्यादा सिर फुटव्वल देख राजेश ठाकुर को बोकारो से उम्मीदवार बना दिया जाए तो ये कोई हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए.

बोकारो बीजेपी में काफी असमंजस

इस बात में कोई शक नहीं है कि बिरंची नारायण ने झारखंड में सबसे ज्यादा मतों से जीत हासिल की थी. बिरंची नारायण की माने तो उनके क्षेत्र में उनके नाम से ऑल इज वेल है. लेकिन बीते दिनों देखा गया है कि उनकी पार्टी के ही लोगों ने उनके खिलाफ आवाज बुलंद की है.

सोशल मीडिया को खंगाला जाए तो वहां भी उनकी खिंचाई बीजेपी से ही जुड़े लोग करते हैं. लेकिन राजनीति ज्ञान यह कहता है कि इन वजहों से किसी उम्मीदवार के टिकट पर कोई संकट नहीं बनता.

बोकारो में एयरपोर्ट और मेडिकल कॉलेज के विधायक के वादों की भी शिकायत लोगों के बीच है. ऐसे में दावेदारी करने वालों की कमी इस पार्टी में भी कम नहीं है.

बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष ही बिरंची नारायण के लिए सिर दर्द साबित हो सकते हैं. राजेंद्र महतो बिहार के वक्त में ही बोकारो जिला के बीजेपी जिलाध्यक्ष थे. बीजेपी के पुराने लोगों से इनकी काफी अच्छी बनती है.

कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के झारखंड प्रदेश प्रभारी ओम माथुर से पुरानी से पुरानी जान पहचान का फायदा उन्हें मिल सकता है.

राजेंद्र महतो हमेशा से राजनीति में सक्रिय रहे हैं. दूसरे पूर्व जिलाध्यक्ष जो बिरंची नारायण के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं, वो हैं रोहित लाल सिंह.

रोहित लाल सिंह बोकारो के लिए बीजेपी के काफी पुराने और जानेमाने नेता हैं. इसके अलावा भाजयुमो से जुड़े कुमार अमित भी टिकट की लाइन में खड़े हैं.

प्रकाश सिंह की राजनीति ने किया है दिग्गजों के नाम में दम

दो साल से बोकारो विधानसभा क्षेत्र में रांची के एक कॉलेज के प्रोफेसर प्रकाश कुमार सिंह सक्रिय नजर आ रहे हैं.

इनसे ज्यादा इनकी राजनीति करने के तरीके को लोग पसंद कर रहे हैं. कभी पूरे शरीर में पट्टी बांध कर नया मोड़ पर प्रदर्शन करते नजर आते हैं, तो कभी कुछ और.

जेवीएम से टिकट के लिए दावेदारी करने वाले प्रकाश सिंह का राजनीतिक वार मौजूदा विधायक बिरंची नारायण पर रहता है. हाल ही में एक मुद्दे को लेकर उन्होंने पीएमओ तक विधायक की शिकायत कर दी.

माना जा रहा है कि इस मामले में उनकी जीत भी हुई. किसी ना किसी तरीके से बोकारो मीडिया में वो बने रहने में सफल रहते हैं.
अपने आप को बोकारो का बेटा बोल कर लोगों से वोट की अपील करने में जुटे हैं.

वैसे बोकारो विधानसभा में जेवीएम पार्टी का कोई मजबूत आधार नहीं है. लेकिन प्रकाश सिंह अपनी राजनीतिक कोशिशों से लगातार आधार बनाने की कोशिश में लगे हैं.

गठबंधन ना हुआ तो मंटू यादव या राजेश महतो हो सकते हैं उम्मीदवार

जेएमएम के लिए मंटू यादव का चेहरा बोकारो में काफी पुराना है. हर हफ्ते किसी ना किसी मामले को लेकर इन्हें नया मोड़ पर पुतला दहन करते देखा जाता है. विधायक का चुनाव भी लड़ चुके हैं. सोरेन परिवार से काफी नजदीक है.

लेकिन पूर्व मंत्री अकलू राम महतो के बेटे राजेश महतो की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता मंटू यादव की उम्मीदवारी को परेशानी में डाल सकती है. लेकिन जेएमएम की सारी राजनीति गठबंधन पर टिकी है. देखना होगा कि क्या होता है.

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