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फारुख अब्दुल्ला हिंदुओं को उपदेश देने वाले कौन होते हैं? : जदयू

नैशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला द्वारा अयोध्या में राम मंदिर को लेकर दिये गये बयान पर सियासी घमासान जारी है

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NewDelhi : जदयू नेता पवन वर्मा ने फारुख अब्दुल्ला के राम मंदिर वाले बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें हिंदुओं को उपदेश देने की जरूरत नहीं है. कहा कि राम मंदिर आस्था का प्रश्न है.  इस प्रश्न पर इसी आधार पर सोचा जा सकता है. बता दें कि नैशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला द्वारा अयोध्या में राम मंदिर को लेकर दिये गये बयान पर सियासी घमासान जारी है.  जान लें कि फारूक अब्दुल्ला ने राम मंदिर के संदर्भ में कहा था कि इस मुद्दे पर लड़ाई देशवासियों के लिए नहीं है.  कहा था कि राम लोगों के हृदय में रहते हैं और अगर अयोध्या में मंदिर बनता भी है तो श्रीराम वहां रहने नहीं आयेंगे.  इस पर तल्ख प्रतिक्रिया देते हुए वर्मा ने कहा, सबसे पहले तो मैं फारूक अब्दुल्ला को कहूंगा कि हिंदुओं को उनके उपदेश की जरूरत नहीं है.  राम लोगों के दिल में रहते हैं मंदिर में नहीं, यह कहने वाले वह कौन होते हैं?

फारूक अब्दुल्ला से सलाह नहीं सुनना चाहते

पवन वर्मा ने कहा, पहले तो उन्होंने कहा कि दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी कर राम मंदिर को तूल दिया जा रहा है.  फिर उन्होंने कहा कि राम के रहने के लिए मंदिर निर्माण की कोई जरूरत नहीं है.  ऐसा कहने वाले फारूक अब्दुल्ला कौन होते हैं?  वर्मा ने कहा कि लोग मंदिर जाते हैं पूजा करने के लिए और यह लोगों का धार्मिक विश्वास है. जदयू नेता ने यह भी कहा कि सरकारों का काम है कि वह विकास कार्य करें.  किसी भी देश में आस्था और विकास के सवाल को एक-दूसरे के विरोध में नहीं देखा जाता है.  इन दोनों के बीच का संतुलन सही होना ही चाहिए, लेकिन हम फारूक अब्दुल्ला से ऐसी कोई और सलाह नहीं सुनना चाहते हैं.

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