न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

कौन बचा रहा है छह पुलिसकर्मियों की मौत के जवाबदेह अफसरों को

1,986

Surjit Singh

eidbanner

लातेहार के बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र में 26 जून की शाम नक्सली हमले में छह जवानों के शहीद होने के लिए जवाबदेह अफसरों को कौन बचा रहा है. नक्सल अॉपरेशन के दौरान जो सावधानियां बरती जानी चाहिए, उस पर किन अफसरों ने ध्यान नहीं दिया. किन अफसरों को इस बात की जानकारी थी कि लातेहार एसपी प्रशांत आनंद और गढ़वा के एसपी शिवानी तिवारी ने बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र में नाईट हॉल्ट किया. इन सवालों के जवाब जाने बिना भविष्य में इस तरह की गलतियों को सुधारना संभव नहीं होगा.

एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस  डीजीपी डीके पांडेय ने  मात्र कुछ ट्रकों के जलाये जाने की घटना के बोकारो के तत्कालीन एसपी ए विजयलक्ष्मी का तबादला करवा दिया था, वही डीके पांडेय छह जवानों की मौत के बाद क्यों खामोशी की चादर अोढ़ रखी है. क्या वर्तमान पुलिस व्यवस्था में अलग-अलग अफसरों के लिए अलग-अलग मापदंड हैं. अगर एेसा ही होता रहा तो विभाग में ऊपर से नीचे के अफसरों के बीच क्या संदेश जायेगा.

इसे भी पढ़ेंः बूढ़ा पहाड़ पर अफसरों की गलती से गयी छह जवानों की जान, कार्रवाई करने व गलती सुधारने के बजाय गलतियों को छिपाने में जुटा पुलिस महकमा

सवाल झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन पर भी उठ रहा है. कहने को यह संगठन पुलिसकर्मियों के हितों के लिए काम करता है. लेकिन हाल में इसके चुनाव में सीनियर अफसरों का हस्तक्षेप देखा गया. चुनाव जीतने वाले पदाधिकारी भी मदद करने वाले अफसरों के वफादार बनकर काम करते हैं. यही कारण है कि कुछ साल पहले तक इस तरह की घटना होने पर एसोसिएशन जिस तरह से आक्रामक रुख अख्तियार करता था, अब नहीं करता. अभियान के दौरान चिकित्सक को भी शामिल करने की मांग करके पुलिस मेंस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपना काम समाप्त होना मान लिया है.

mi banner add

बूढ़ा पहाड़ की घटना की जो सच्चाई सामने आ रही है, वह अफसरों की गंभीर रणनीतिक चूक की तरफ इशारा कर रहा है. अॉपरेशन प्लान यह था कि पुलिस फोर्स लातू लहेर से बूढ़ा पहाड़ के नीचे से होते हुए कुली, तुमैरा होते हुए शाम तक गढ़वा पहुंचेगी. अॉपरेशन के दौरान सबकुछ वैसा ही हो, जैसा की प्लान किया गया था, यह हमेशा संभव नहीं होता. कुछ एेसी बातें हुई, जिसके कारण पुलिस फोर्स मंडल डैम पिकेट पर नाईट हॉल्ट कर गई. अौर नक्सलियों के नजर में आ गयी. दूसरे दिन फोर्स कसरी महुआ के पहाड़ पर चढ़ गयी. जबकि यह अॉपरेशन प्लान में नहीं था. लौटने के दौरान सुरक्षात्मक उपाय नहीं किये गये, जिसके कारण नक्सली जवानों को निशाना बनाने में सफल रहे.

कहा यह जा रहा है कि लातेहार और गढ़वा जिला के एसपी के द्वारा अॉपरेशन प्लान में बदलाव करने की जानकारी पुलिस मुख्यालय को नहीं दी गयी. हालांकि कुछ अफसर यह भी कह रहे हैं कि पलामू प्रमंडल के डीआईजी और पुलिस मुख्यालय के एक सीनियर अफसर को जानकारी दी गयी थी. यहीं गलती हो गयी. डीआईजी और दोनों अफसरों ने एेसा कुछ नहीं किया, जिससे नक्सलियों के संभावित हमलों से बचा जा सके. दोनों एसपी को तो नक्सलियों से लड़ने का अनुभव ना के बराबर है ही. सवाल यह उठता है कि अॉपरेशन प्लान में बदलाव की जानकारी एडीजी अभियान और आइजी अभियान को क्यों नहीं दी गयी.  यही होता है जब किसी सिस्टम की जगह व्यक्ति महत्वपूर्ण हो जाता है, तब नीचे काम करने वाले लोग सिस्टम की जगह व्यक्ति के प्रति जिम्मेदार हो जाते हैं. बूढ़ा पहाड़ में भी यही हुआ. दोनों जिलोंं के एसपी ने सिस्टम की बजाय अफसर को जानकारी दी. नक्सलियों के गढ़ में एक्सपोज होने के बाद लौटने के दौरान सुरक्षात्मक इंतजाम नहीं किये गये.  नतीजा लौटने के दौरान नक्सलियों के निशाने पर आ गये.

पुलिस की रणनीतिक चूक सिर्फ घटना होने तक नहीं हुई. घटना के बाद भी कई घंटों  तक पुलिस को यह पता नहीं चल सका कि बूढ़ा पहाड़ पर कितने पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं और कितने लोग घायल हैं. घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का कोई प्रयास पुलिस अफसर नहीं कर सके. 14-18 घंटे तक घाययल जवान तड़पते रहें. दो जवानोंं की मौत तो समय पर इलाज नहीं मिलने की वजह से हो गयी. अन्य जवानों की स्थिति गंभीर होती गयी.  इसके लिए कौन जिम्मेदार है ?

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: