Opinion

#WHO, डॉ हर्षवर्धन और बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के रि

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Girish Malviya

WHO में डॉ हर्षवर्धन को 34 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन बनाया जाना. कुछ लोग इसे मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि बता रहे. उन्हें लग रहा है कि हर्षवर्धन WHO के महानिदेशक ही बन गये हैं, जो अब ट्रेडोस की जगह प्रेस कांफ्रेस करते नजर आयेंगे !

दरअसल यह WHO की रोटेशन प्रणाली के तहत किया गया डिसिजन है. बोर्ड के चेयरमैन का पद कई देशों के अलग-अलग ग्रुप में एक-एक साल के हिसाब से दिया जाता है. पिछले साल ही तय हुआ था कि अगले एक साल के लिए यह पद भारत के पास रहेगा.

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लेकिन हां भारत की तरफ से डॉ हर्षवर्धन को इस पद के लिए भेजा जाना आश्चर्य की बात जरूर है. क्योंकि अब तक वो जो बोलते-बताते रहे हैं, अगर वही सब आगे करते रहें, तो देश को असहज जरूर करेंगे.

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यह वही डॉ हर्षवर्धन हैं जिन्होंने कुछ दिन पहले जब हवाई अड्डों पर थर्मल स्कैनर लगाये गये तब कहा थाः “इस प्रक्रिया में विदेशों से आ रहे लोगों को हवाई अड्डे पर एक स्कैनर से होकर गुजरना होता है. इस दौरान यदि थर्मल स्कैनर से गुजरने वाले किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान सामान्य व्यक्ति के तापमान से अधिक पाया जाता है, तो ऐसे संदिग्ध की मेडिकल जांच की जाती है. शरीर का तापमान अधिक होने पर थर्मल स्कैनर तुरंत इसकी जानकारी दे देता है. थर्मल स्कैनर एक इंफ्रारेड कैमरे की तरह काम करता है. इस स्कैनर के जरिए गुजरनेवाले व्यक्ति के शरीर में मौजूद विषाणु इंफ्रारेड तस्वीरों में दिखाई पड़ते हैं. विषाणुओं की संख्या अधिक या खतरनाक स्तर पर होने पर व्यक्ति के शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है’.

देश के हर अखबार की वेबसाइट में उनका यह बयान छपा था. जिसमें वह थर्मल स्कैनर से ‘वायरस’ दिखने की बात कर रहे थे. आप भी गूगल पर इसे सर्च कर सकते हैं. अब यह नहीं पूछा जाने चाहिए कि ऐसे व्यक्ति को स्वास्थ्य मंत्री किसने बनाया?

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अब बात करते हैं कि ऐसे व्यक्ति को WHO क्यों भेजा जा रहा है. दरअसल उनके बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन से सम्बंध बहुत ही बेहतरीन रहे हैं.  18 नवम्बर 2019 को ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन और माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स की मीटिंग हुई थी. जिसमे उन्होंने बिल ऐंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ औपचारिक MOU साइन किया. इसके अलावा जिसमें बिल गेट्स की विशेष रुचि है, यानी नेशनल ‘डिजिटल’ हेल्थ मॉडल उसका ड्राफ्ट भी वही फाइनल कर रहे हैं. कोरोना काल में लगभग हर हाई लेवल की मीटिंग में बिल ऐंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के प्रतिनिधि मौजूद रहें, ऐसा वे और नीति आयोग सुनिश्चित करते हैं. कमाल की बात है कि देश के सारे बड़े NGO इस मीटिंग में आते हैं. लेकिन संघ का कोई प्रतिनिधि वहां मौजूद नहीं होता.

बिल गेट्स फाउंडेशन के साथ उनके पुराने रिश्ते हैं. दरअसल, 26 मई 2014 को जब मोदी सरकार बनी थी तब उन्हें ही स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था. लेकिन छह महीने में ही उन्हें इस पद से हटा दिया गया औऱ उनकी जगह जेपी नड्डा को बैठा दिया गया. लेकिन इन छह महीनों में वह भारत के टीकाकरण कार्यक्रम की रूप रेखा फाइनल कर चुके थे. इस टीकाकरण प्रोग्राम को दिसंबर 2014 में लॉन्च किया गया. आज भी यह योजना बदस्तूर जारी है. इस योजना का नाम हैः ‘मिशन इन्द्रधनुष’

दरअसल मिशन इन्द्रधनुष एक बूस्टर टीकाकरण कार्यक्रम है. जो कम टीकाकरण कवरेज वाले 201 ज़िलों में शुरू हुआ था. बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की इस प्रोग्राम में विशेष रुचि थी. ‘अप्रैल 2015 से जुलाई 2017 के बीच चले इस कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 25.5 मिलियन बच्चों और 6.9 मिलियन गर्भवती महिलाओं को कवर किया गया’. इस यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम में पहले 7 रोगों के लिए टीका लगाया गया. बाद में रोगों की संख्या 12 कर दी गयी. फाउंडेशन के अच्छे रिश्ते जेपी नड्डा जी से कायम हो गये. 2017 के आखिर में पता लगा कि बिल गेट्स फाउंडेशन इस टीकाकरण प्रोग्राम में बड़ी गड़बड़ी कर रहा है. इसलिए आरएसएस के बढ़ते दबाव में मिशन इन्द्रधनुष में बिल गेट्स फाउंडेशन की भूमिका को सीमित कर दिया गया.

वैसे आपको एक बात और बता दूं अफ्रीकी देश नाइजीरिया में बिल गेट्स पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने नाइजीरिया में टीकाकरण प्रोग्राम को चालू करने के लिए 10 मिलियन डॉलर की रिश्वत दी है. उन पर नाइजीरिया में अब मुकदमा भी चलाया जा रहा है यह बात पूरे विश्व मीडिया में चल रही है लेकिन आप तो हमारे देश के मीडिया का हाल जानते ही हैं. उसे तो बिल गेट्स को देवता जो सिद्ध करना है.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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