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जानिए कौन हैं वो मध्यस्थ जिनके कारण कृषि कानूनों पर झुकी सरकार?

जानिए पर्दे के पीछे के उस शख्स के बारे में सबकुछ

Uday Chandra

New Delhi : किसान आंदोलन के 55वें दिन और 10वें दौर की बातचीत के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने कृषि कानूनों पर नरम रुख अपना लिया है. इसके साथ ही किसान नेताओं के तेवर भी आज थोड़े नरम थे.

माना जा रहा है कि सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व पर हुई 10वें दौर की बातचीत में केंद्र सरकार ने मसला सुलझाने के लिए अहम कदम बढ़ा दिया है. लेकिन जानकारों के मुताबिक सरकार और किसान नेताओं की नरमी के पीछे बाबा लक्खा सिंह हैं, जो पर्दे के पीछे से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं.

नानकसर गुरुद्वारे के प्रमुख बाबा लक्खा सिंह का नाम 7 जनवरी को पहली बार सामने आया था. उस वक्त कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने उनसे मुलाकात की थी. उसके बाद से ही अटकलें लगने लगी थीं कि सरकार बाबा के जरिये किसानों को मनाने की कोशिश कर सकती है.

उस बैठक में बाबा लक्खा सिंह ने सबसे पहले कहा था कि जब तक समाधान नहीं निकल रहा, तब तक कानून स्थगित किया जा सकता है. कहा जा रहा है कि  सरकार ने बाबा लक्खा सिंह की सलाह मान ली है.

बाबा लक्खा सिंह कोई राजनीतिक हस्ती नहीं हैं. वे नानकसर गुरुद्वारे के प्रमुख हैं. पंजाब, हरियाणा सहित तमाम राज्यों में नानकसर गुरुद्वारे हैं. बाबा लक्खा इन सभी नानकसर गुरुद्वारों की प्रबंधक कमेटी के प्रमुख हैं. नानकसर की सिखों के बीच काफी आस्था है. इस नाते बाबा लक्खा सिंह को भी सिख समुदाय काफी मानता है, उनकी बात पर भरोसा करता है.

नानकसर का महत्व क्यों है

1870 में सिख संप्रदाय के एक संत हुए थे. बाबा नंद सिंह जी. सिखों में बाबा नंद सिंह को लेकर अटूट आस्था है. उन्होंने 1943 में पंजाब के नानकसर में देह त्यागा था. बाबा नंद सिंह ने ही नानकसर गुरुद्वारे की स्थापना की थी. इसी वजह से उनको बाबा नंद सिंह– नानकसर वाले के नाम से भी जाना जाता है. उनके बाद उनके शिष्यों ने नानकसर गुरुद्वारे की तमाम शहरों में स्थापना कराई, जिसे लेकर सिखों में काफी आस्था है.

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