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सफेद हाथी बन गया है डीवीसी बोकारो थर्मल का अस्पताल, राजस्व में भी आयी कमी

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Bermo: बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी का हॉस्पीटल इन दिनों विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, लैब तकनीशियन आदि के अभाव में सफेद हाथी बनकर रह गया है. अस्पताल आने वाले मरीजों के द्वारा जब भी बेहतर इलाज और सुविधा की मांग की जाती है, तो उन्हें इलाज के लिए बाहर रेफर कर दिया जाता है. यही कारण है कि पिछले दिनों जब डीवीसी के सीवीओ डीके वर्मा ने चंद्रपुरा अस्पताल का दौरा कर निरीक्षण किया था तब उन्‍होंने कहा था कि चंद्रपुरा का डीवीसी अस्पताल सुविधा व इलाज के नाम पर महज रेफर करने वाला अस्पताल बनकर रह गया है. डीवीसी सीवीओ का यह बयान चंद्रपुरा के संदर्भ में आया था. लेकिन, लगभग ऐसी ही स्थिति बोकारो थर्मल के अस्पताल की भी बनकर रह गयी है.

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विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित नर्सिंग स्टाफ की है कमी

बोकारो थर्मल के हॉस्पीटल में वर्तमान में विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित मेडिकल ऑफिसर के पदों की कुल संख्या 21 है. जिसमें से महज 12 ही पदस्थापित हैं और 8 पद रिक्त हैं. 8 पद अस्पताल में रिक्त रहने के कारण ओपीडी, तीन शिफ्टों में इंडोर में डॉक्टरों की डयूटी सहित डीवीसी सीएसआर के तहत गांवों में इलाज के लिए डॉक्टर को भेजने में अस्पताल प्रबंधन को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ आर द्विवेदी, सर्जन डॉ किसन मंडल, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ संगीता रानी, एनेस्थिसिया डॉ संजय कुमार के तबादला के बाद उनके स्थान पर नेत्र विशेषज्ञ डॉ केपी गुप्ता, सर्जन डीके श्रीवास्तव, एनेस्थिसिया डॉ डीएम मिश्रा को पदस्थापित किया गया है. उक्त सभी डॉक्टर नियमित अस्पताल नहीं आते हैं. डिप्टी सीएमओ डॉ आर भट्टाचार्य अस्पताल एवं ऑफिस के काम के अलावा स्त्री रोग विशेषज्ञ का भी काम कर रहे हैं. अस्पताल में इसी प्रकार नर्सिंग स्टाफ के पदों की कुल संख्या 18 है. जबकि, पदस्थापित मात्र 12 हैं. लैब तकनीशियनों के तीन पदों में से एक का पद रिक्त है.

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पदस्थापन के बाद एक भी ऑपरेशन नहीं किया नेत्र सर्जन ने

बोकारो थर्मल डीवीसी अस्पताल में पदस्थापित नेत्र सर्जन डॉ केपी गुप्ता ने अपने पदस्थापना काल से 10 माह के दरम्यान एक भी मरीज की आंखों का ऑपरेशन नहीं किया है. इस प्रकार के मरीजों को सीधे अन्यत्र अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है. जबकि पूर्व में पदस्थापित नेत्र सर्जन डॉ आर द्विवेदी के कार्यकाल में प्रत्येक वर्ष दो से तीन सौ मरीजों की आंखों का ऑपरेशन किया जाता था. इसी प्रकार सर्जन डॉ डीके श्रीवास्तव भी महज औपचारिकता ही पूरी कर रहे हैं.

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महज दो घंटे ही डयूटी कर रहे हैं विशेषज्ञ डॉक्टर

नेत्र सर्जन डॉ केपी गुप्ता धनबाद से तथा सर्जन डॉ डीके श्रीवास्तव चंद्रपुरा से अपने पदस्थापना से ही प्रतिदिन बोकारो थर्मल अस्पताल आवाजाही करते हैं. दोनों ही अस्पताल के ओपीडी में नौ बजे आने की बजाय 10 बजे आते हैं और बारह बजते ही वापस चले जाते हैं. दूसरी पाली में बिना किसी सूचना के दोनों वापस चले जाते हैं. यह सिलसिला लगातार जारी है.

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10 दिनों में संविदा डॉक्टर ने दिया त्यागपत्र

अस्पताल में विगत 15 अक्टूबर को संविदा पर पदस्थापित डॉ राम कुमार ने अस्पताल के डिप्टी सीएमओ डॉ आर भट्टाचार्य के व्यवहार से तंग आकर 25 अक्टूबर को त्यागपत्र दे दिया. डॉ राम कुमार का कहना था कि उनकी पदस्थापना जेनरल ड्यूटी के लिए की गयी थी. जबकि उनसे डिप्टी सीएमओ के द्वारा शिफ्ट ड्यूटी करवाया जाता है. जिससे उनको असुविधा हो रही थी.

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राजस्व में भी आयी गिरावट

अस्पताल के ओपीडी व इंडोर में मरीजों को सुविधा नहीं मिलने के कारण अस्पताल के राजस्व में भी कमी देखने को मिल रही है. अस्पताल के सूत्रों के अनुसार साल 2017 के मार्च महीने में अस्पताल को ओपीडी में कुल राजस्व के रुप में 50 हजार रुपये प्राप्त हुए थे. जबकि, वर्ष 2018 के मार्च महीने में मात्र 34 हजार रुपये ही प्राप्त हुए हैं. लगभग ऐसी ही हालत इंडोर की भी है.

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मैन पावर की कमी को लेकर लगातार हो रहा पत्राचार

अस्पताल में मैन पावर की कमी को लेकर डिप्टी सीएमओ डॉ आर भट्टाचार्य के द्वारा विगत् वर्ष 2017 मई से ही लगातार पत्राचार किया जा रहा है. विशेषज्ञ डॉक्टरों के बिना अवकाश के चले जाने तथा दूसरी पाली में ड्यूटी नहीं करने के मसले पर डिप्टी सीएमओ ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी प्रोजेक्ट हेड कमलेश कुमार तथा डीवीसी मुख्यालय को लगातार भेजी जा रही है. डॉ राम कुमार के त्यागपत्र पर डिप्टी सीएमओ ने कहा कि वे शिफ्ट डयूटी करना नहीं चाहते थे.

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