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गांधी जी की कमर में कौन सी ब्रांड की घड़ी लटकती थी?

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी में आजादी की संघर्ष गाथा पर क्विज

Ranchi : “ आज़ादी संघर्षों की बलिवेदी पर जान न्योछावर कर हमें प्राप्त हुई है. अक्सर हम पर्दे के पीछे के नायक को भूल जाते हैं. ऐसे विषय केन्द्रित क्विज आपको उन अनुछुए पन्नों से गुजरने का, उन बेशकीमती लम्हों को जीने का एक मौका देता है और आप एक ज़िम्मेदार नागरिक की तरह खिल कर बाहर आते हैं. ये मौका है कि आप किताब के ज्ञान से, देश प्रेम के ध्यान से अपने समाज का मान बढ़ाएं.” ये बातें डॉ. श्यामा प्रसाद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ तपन शांडिल्य ने “ भारत की आज़ादी के संघर्षगाथा “ पर आधारित क्विज प्रतियोगिता के उद्घाटन भाषण के दौरान कहीं. इस 1 घंटे के क्विज में क्विज होस्ट ने भारत की आज़ादी की 75 वीं वर्षगांठ के मौके पर संघर्ष के दौर से 75 नायाब प्रश्नों को बाहर लाया, जिसे छात्रों ने सराहा और उत्तर देने में बढ़- चढ़ कर हिस्सा लिया.

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संथाल विद्रोह के नायकों का नाम क्या है?

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Sanjeevani
Pushpanjali
Pitambara

संथाल विद्रोह जो 1855 में हुआ, वह आज़ादी की लड़ाई 1857 से पहले की लड़ाई रही और उनके नायकों के नाम सिद्धू कान्हू, चाँद भैरव और बहनें फूलो-झानो के बारे में पूछा गया. गांधी से कई पॉपुलर सवालों के अलावा पूछा गया.

दो प्रश्न छात्रों की तालियां बटोरने में कामयाब रहें, वो थें – गांधी जी की हत्या किस रिवॉल्वर से हुई थी और छात्रों के बीच से सही उत्तर के रूप में बेराटा एम 1934 सेमी-ऑटोमेटिक पिस्टल और दूसरा प्रश्न कि गांधी जी की कमर में लटकने वाली घडी किस ब्रांड की थी के जब में छात्रों ने सही उत्तर दिया – स्विस जेनिथ पौकेट वाच जिसे नेहरू ने 40 रूपये में खरीद कर गिफ्ट किया था. जो बाद में कानपुर स्टेशन में चोरी हो गयी थी और उसे बाद में चोर ने ही लौटा दिया था.

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एमिली शेंकेल कौन हैं?

आज़ादी के 75 साल के उपलक्ष्य पर 75 सवाल के गुलदस्ते में जो प्रश्न सबसे ज्यादा तालियां बटोर पाये, उनमें से कुछ प्रश्न थे, भारत के पहले उद्योग मंत्री कौन थे (डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ), या बटुकेश्वर दत्त और वीर सावरकर में क्या एक समानता है? ( दोनों जीवन के एक पड़ाव में सेल्युलर जेल के बंदी रहे ), या फिर अगर कस्तूरबा महात्मा गांधी की अर्धांगिनी रहीं तो झाबेरबा किनकी अर्धांगिनी थीं ( सरदार पटेल ), या एमिली शेंकेल कौन हैं ( सुभाष चन्द्र बोस की पत्नी ).

एक प्रश्न के जवाब में जब होस्ट डॉ विनय भरत ने पूछा कि भगत सिंह की माता का क्या नाम था ?( डी विद्यावती), हॉल तब तालियों से गूंज उठा, जब इसके जवाब में एक छात्र ने उत्तर दिया – “भारत माता .” अरोबिन्दो घोष के बारे में जब छात्रों को मालूम चला कि उन्हें साहित्य के नोबल पुरस्कार के लिए सन 1943 में नामित किया गया था, वे काफी उत्साहित हुए.

स्वंत्रता संग्राम में कलाकारों के योगदान के सन्दर्भ में अवनिंद्र नाथ टैगोर ( कविवर टैगोर के कजिन ) की “भारत माता” पेंटिंग और नन्द लाल घोष की बनाई “गांधी 1930” पेंटिंग को ऑनस्क्रीन कर प्रश्न पूछे गये. हर घर तिरंगा अभियान के तहत तिरंगे को मूर्त रूप देने वाले पिंगली वेंकाया (बरवाडा , 1929) का भी जिक्र हुआ.

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इन छात्रों ने मारी बाजी

जिन छात्रों ने सबसे ज्यादा जवाब दिया और तालियां बटोरीं, वे थे – रवि शंकर चौधरी (अंग्रेजी, सेमेस्टर II) , सुचेता बेरा ( अंग्रेजी ,सेमेस्टर II ), हर्ष श्रीवास्तव ( राजनीति विज्ञानं ,सेमेस्टर II ), मृत्युंजय कुमार ( राजनीति विज्ञानं , सेमेस्टर IV ) , रानी कुमारी ( अंग्रेजी, सेमेस्टर II ), नीतू कुमारी ( ई एल एल , सेमेस्टर II ), कृति कुमारी ( जूलोजी , एम् ए). इस मौके पर अंग्रेजी एमए की छात्रा दीपज्योति ने कार्यक्रम की शुरुआत में भारत की आज़ादी विषय पर अपने विचार रखे. वहीं एमए की छात्रा शिवानी मिश्रा अभिनीत फिल्म जॉनी वाकर को भी प्रदर्शित किया गया. छात्रों ने फिल्म को देखने के बाद तालियों से सभागार को गुंजायमान कर दिया.

DSW डॉ अनिल कुमार ने स्वागत भाषण दिया. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डिपार्टमेंट ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज एंड लिटरेचर ( ELL) के शिक्षक सौरभ मुखर्जी, कर्मा कुमार, श्वेता गौरव, शुभांगी रोहतगी और इंग्लिश डिपार्टमेंट की शिक्षिका दिव्या प्रिया का खास योगदान रहा.

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