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सचिव ने कहा-15 दिनों में जांच कर रिपोर्ट दो, विभाग ने दबाई चिट्ठी, क्या ठेकेदार को बचा रहे हैं मंत्री ?

सिद्धार्थ कंस्ट्रक्शन को क्यों बचाना चाहते हैं मंत्रीजी ?

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Pravin kumar
Hazaribagh: केरेडारी में 23 करोड़ की लगात से बन रहे घाघरा डैम पर आखिर राजनीति क्यों हावी है? आरोप लग रहे हैं कि जल संसाधन विभाग के मंत्री से अच्छी लाइजनिंग होने की वजह से सिद्धार्थ कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ जांच प्रतिवेदन जमा करने में विभाग ने देरी की.

23 करोड़ की लागत से घाघरा जलाशय का जीर्णोद्धार एवं घाघरा नाले का निर्माण कार्य किया जा रहा है. कंपनी के द्वारा निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किए जाने के बाद भी हजारीबाग और रामगढ़ जिले में सरकारी कार्य का टेंडर लेने में अग्रणी रहा है.

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हैरानी की बात है कि सिद्धार्थ कंस्ट्रक्शन कंपनी के विरूद्ध निर्माण कार्यों में अनियमितता और घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग करने की शिकायत मिलने के बाद भी जांच में देरी की गई. वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के द्वारा इस संबंध में विभाग को बार-बार लिखा जाता रहा है.
वहीं अधीक्षण अभियंता द्वारा तय समय में जांच नहीं करने के पीछे का कारण विभाग के मंत्री के साथ सिद्धार्थ कंस्ट्रक्शन के बेहतर रिश्ते को बताते हैं. एक ओर मंत्री का संरक्षण तो दूसरी ओर जनप्रतिनिधि विभाग को बार-बार स्मरण पत्र सौंप रहे थे.

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क्या है पूरा मामला ?

हजारीबाग जिले के केरेडारी में घाघरा जलाशय के निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत स्थानीय विधायक निर्मला देवी लगातार करती रही हैं. विभाग को शिकायत मिलने के बाद जांच का जिम्मा अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में विभागीय उड़नदस्ते को दी गई. आरोप है कि अधीक्षण अभियंता ने जांच न कर उसे टालने की कोशिश की.

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कब की गई थी अनियमितता की शिकायत ?

निर्माण कार्य में की जा रही गड़बड़ी की शिकायत 13 मार्च 2018 को स्थानीय विधायक निर्मला देवी ने की. इसके बाद 5 अप्रैल को नीतू कुमारी ने विभाग से इसकी शिकायत की. शिकायत में कहा गया कि घाघरा जलाशय और इससे निकलने वाली नहर के पक्कीकरण के कार्य में सिद्धार्थ कंस्ट्रक्शन द्वारा घोर अनियमितता बरती जा रही है. सीमेंट और गिट्टी बेहद कम मात्रा में उपयोग की जा रही है, जबकि बालू ज्यादा मिलाया जा रहा है. संवेदक ने जो स्लैब बनाए हैं, वो टूट रहे हैं. सिद्धार्थ कंस्ट्रक्शन को 76 स्लैब को छोड़कर बाकी सभी स्लैब का भुगतान कर दिया गया. शिकायत के बावजूद सिद्धार्थ कंस्ट्रक्शन निर्भीक होकर घटिया निर्माण करता रहा.

शिकायत के बाद जांच करने पहुंची टीम
शिकायत के बाद जांच करने पहुंची टीम

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अवर मुख्य सचिव ने अपने पत्र में क्या लिखा ?

केरेडारी प्रखंड में घाघरा जलाशय तथा घाघरा नाला निर्माण कार्य में अनियमितता और घटिया सामग्री उपयोग किए जाने की बार-बार स्मरण पत्र प्राप्त हो रहे हैं. 6 अप्रैल 2018 को लिखे पत्र में अवर सचिव ने जांच रिपोर्ट 15 दिनों में विभाग को सौंपने को कहा था. लेकिन विभाग के अवर सचिव के द्वारा लिखे पत्र की अवहेलना अधीक्षण अभियंता करते रहे. पुन: अवर सचिव विनय कुमार के द्वारा 17 जुलाई 2018 को पत्र जारी कर जांच में हो रही देरी के सबंध में स्पष्टीकरण सहित जांच प्रतिवेदन 30 जुलाई तक विभाग में जमा करने को कहा. इसके बावजूद विभाग के अधीक्षण अभियंता के द्वारा जांच रिपोर्ट तय समय में नही सौपा गया.

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शिकायत पर आनन-फानन में 30-31 जुलाई को की गई जांच

अनियमितता और घटिया निर्माण सामग्री उपयोग करने के कई प्रमाण घाघरा जलाशय व घाघरा नाला निर्माण में जांच टीम को मिली. कार्यपालक अभियंता भवानंद मंडल के नेतृत्व में रांची से जाकर विभाग की टीम ने घाघरा डैम के जीर्णोद्धार व नहर पक्कीकरण योजना की जांच की.

विधायक प्रतिनिधि अंबा प्रसाद
विधायक प्रतिनिधि अंबा प्रसाद

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जांच के दैरान विधायक प्रतिनिधि के रूप में मौजूद अंबा प्रसाद क्या कहती हैं ?

केरेडारी में घाघरा जलाशय तथा घाघरा नाला निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता की जांच करने विभागीय उड़नदस्ता रांची के साथ कार्यस्थल पर गई थी. क्योंकि उक्त कार्य में ग्रामीणों द्वारा लगातार घटिया निर्माण की शिकायत मिल रही थी. मैंने सही जांच करवाने का प्रयास किया. यह योजना एक महत्वपूर्ण जन उपयोगी योजना है. इसलिए संवेदक मेरे मामा हों, चाहे मेरे घर का कोई भी सदस्य हो, भ्रष्टाचार से समझौता किसी भी सूरत से नहीं किया जा सकता है. जनता ने हम लोगों को अपने परिवार को लाभ दिलाने के लिए अपना प्रतिनिधि नहीं चुना है. हम लोग जनता के हित में किसी भी हद तक संघर्ष करने के लिए तैयार हैं.

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