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आरबीआई क्या 28 प्रतिशत पैसा रिजर्व रखे? गरीबों के काम आना चाहिए पैसा : जेटली

कुछ देशों में केंद्रीय बैंक आठ प्रतिशत रिजर्व बनाये रखते हैं, कुछ पारंपरिक आर्थिक सोच वाले देशों में केंद्रीय बैंक 14 प्रतिशत रिजर्व बनाए रखते हैं;  भारत में आरबीआई का रिजर्व क्या 28 प्रतिशत रखना चाहिए?

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NewDelhi : हमें राजकोषीय घाटे के प्रबंधन के लिए आरबीआई का पैसा नहीं चाहिए.  1997, 2004 और 2013 में इस संबंध में भी विशेषज्ञ समिति बनी थी.  आरबीआई की आर्थिक पूंजीगत स्थिति के बारे में चर्चा चल रही है. कुछ देशों में केंद्रीय बैंक आठ प्रतिशत रिजर्व बनाये रखते हैं, कुछ पारंपरिक आर्थिक सोच वाले देशों में केंद्रीय बैंक 14 प्रतिशत रिजर्व बनाए रखते हैं;  भारत में आरबीआई का रिजर्व क्या 28 प्रतिशत रखना चाहिए?  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह सब सोमवार को लोकसभा में कहा.  कहा कि सरकार को राजकोषीय घाटे के प्रबंधन के लिए रिजर्व बैंक का पैसा नहीं चाहिए, लेकिन इसके अधिशेष पैसे का बैंकों के पुन: पूंजीकरण और गरीबी कम करने में उपयोग किया जा सकता है.  वित्त वर्ष 2018-19 की पूरक अनुदान मांगों के दूसरे बैच पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए जेटली ने कहा, सरकार चाहती है कि नीतिगत विचार विमर्श हो जाये. जेटली ने कहा कि अगर कुछ पैसा आ जाये तो बैंकों के पुन: पूंजीकरण और गरीबी को कम करने में मदद मिलेगी.

 वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों से पार पाते हुए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने मुद्रास्फीति, राजकोषीय घाटे, चालू खाता घाटा को नियंत्रण में रखा और भारत को पांच वर्षों तक सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनाये रखा. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि यूपीए 2 के दौरान मुद्रास्फीति की दर 10.4 प्रतिशत थी जो एनडीए सरकार के दौरान औसतन 3.5 प्रतिशत रही. आजादी के बाद से पहली बार राजकोषीय अनुशासन सबसे व्यवस्थित है। विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में है. उन्होंने कहा कि गांव-गांव को पक्की सड़कों से जोड़ा गया है और इस पर कांग्रेस सरकार की तुलना में तीन गुणा अधिक खर्च किया गया है.

2022 तक हर गरीब को पक्का मकान देने की पहल की गयी है

 2022 तक हर गरीब को पक्का मकान देने की पहल की गयी है.  2014 में देश में 39 प्रतिशत घरों में शौचालय थे जो अब बढ़कर 97 प्रतिशत हो गये हैं.  देश में एक गांव भी नहीं बचा जहां बिजली नहीं हो.  छह करोड़ गरीबों को गैस का चूल्हा दिया गया है; जेटली ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत पहले 100 दिन में 6 लाख लोगों का अस्पताल में मुफ्त इलाज हुआ है;  उन्होंने कहा कि जीएसटी के कारण आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या काफी बढ़ी है. कहा कि हमारी सरकार आने के समय आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या 3.8 करोड़ थी जो चार वर्षो में बढ़कर 6.8 करोड़ हो गयी है;  जीएसटी के तहत 360 वस्तुओं पर कर घटाया गया है जिससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा, जबकि टैक्स का बेस बढ़ाकर वसूली बढ़ी है.  वित्त मंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने केवल नारे देने का काम किया जबकि मोदी सरकार ने सहारा देने का काम किया. गरीबी नारों से नहीं दूर होती है बल्कि सहारों से दूर होती है. 

कांग्रेस के समय में एनपीए को छिपा कर रखा गया

 जेटली ने कहा कि डूबे ऋण के संबंध में गैर निष्पादित आस्तियां 2.5 लाख करोड़ होने की बात कही गयी, जबकि समीक्षा के बाद पता चला कि यह रकम 8.5 लाख करोड़ रुपये है;  इस प्रकार से कांग्रेस के समय में एनपीए को छिपा कर रखा गया.  मंत्री के जवाब के बाद सदन ने 2018-19 की पूरक अनुदान मांगों के दूसरे बैच और इससे संबंधित विनियोग विधेयक को मंजूरी दे दी.  सरकार ने 2018-19 की पूरक अनुदान मांगों के दूसरे बैच के तहत 85,948.86 करोड़ रुपये के सकल अतिरिक्त व्यय को अधिकृत करने के लिए संसद का अनुमोदन मांगा था जिसमें से लगभग 15,000 करोड़ रुपये निवल नकद व्यय संबंधी है.

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