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जहां योग है, वहां न कोई रोग है

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष

शिप्रा सिंह
शरीर और मन के समग्र स्वास्थ्य में योग की महत्ता पूरी दुनिया तक भारत ने पहुंचायी है. सरस्वती और सिंधु सभ्यता के प्राचीन अवशेषों में भी योग के प्रमाण मिलते हैं. योग सिर्फ़ आसनों तक ही सीमित नहीं है बल्कि इससे कहीं अधिक है. सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह अपने मन, शरीर और सांसों की देखभाल करना है. योग शब्द संस्कृत के “युज” से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ होता है- एकजुट करना या एकीकृत करना. योग 5000 वर्ष से भारतीय ज्ञानपीठ का एक महत्वपूर्ण अंग है. 2700 ईसा पूर्व एवं इसके बाद पतंजलि काल तक योग की मौजूदगी के ऐतिहासिक प्रमाण हैं.


आज का वक्त और योग की जरूरत

योग में हम आसन, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से मन, श्वांस और शरीर के विभिन्न अंगों में सामंजस्य बनाना सीखते हैं. प्राण वह शक्ति है जो हमारे शरीर को ज़िंदा रखती है और हमारे मन को शक्ति देती है. ‘प्राण’ से हमारी जीवन शक्ति का उल्लेख होता है और ‘आयाम’ का अर्थ है नियमित करना. इस प्रकार प्राणायाम का अर्थ हुआ खुद की जीवन शक्ति को नियमित करना. आज जब पूरा विश्व कोरोना महामारी का मुकाबला कर रहा है, तो योग उम्मीद की एक किरण भी बना हुआ है. हमारे ऋषियों-मुनियों ने योग के लिए “समत्वम् योग उच्यते” ये परिभाषा दी थी. उन्होंने सुख-दुःख में समान रहने, संयम को एक तरह से योग का पैरामीटर बनाया था. जब हम प्राणायाम करते हैं, ध्यान करते हैं, दूसरी यौगिक क्रियाएं करते हैं, तो हम अपनी अंतर-चेतना को अनुभव करते हैं. योग हमें स्ट्रेस से स्ट्रेंथ की ओर, नेगेटिविटी से क्रिएटिविटी का रास्ता दिखाता है. योग हमें अवसाद से उमंग और प्रमाद से प्रसाद तक ले जाता है.

21 जून को ही क्यों मनाते हैं योग

21 जून के दिन मनाने के पीछे एक खास वजह है.भारतीय संस्कृति के मुताबिक ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है. इस दिन उत्तरी गोलार्ध पर सबसे ज्यादा सूर्य की रोशनी पड़ती है. साल के 365 दिनों में से 21 जून साल का सबसे बड़ा दिन होता है. 21 जून के दिन सूर्य जल्दी उगता है और देरी से ढलता है. कहा जाता है कि इस दिन सूर्य का तप सबसे ज्यादा प्रभावी होता है. इसी वजह से 21 जून को इंटरनेशनल योगा डे’ के रूप पर मनाया जाता है. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की शुरुआत सबसे पहले साल 2015 में हुई थी.11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN) ने 21 जून को योग दिवस की घोषणा की थी.तब से भारत समेत पूरी दुनिया इस दिन को ‘विश्व योग दिवस’ के रूप में मनाती है.

करो योग, रहो निरोग

योग भारत की देन है, इसमें कोई दो राय नहीं है. योग एक ऐसा वरदान है जो अगर जिंदगी में आत्मसात कर लिया जाए तो इंसान स्वस्थ्य रहने के साथ सकारात्मक ऊर्जा से भर उठता है.योग एक ऐसा विज्ञान है जो इंसान को मानसिक शारीरिक और भावनात्मक तौर पर मजबूत बनाता है. आधुनिक युग में तनाव और चिंता को कम करने के लिए योग रामबाण है. कहा जाता है कि’ करो योग रहो निरोग’ इस सिर्फ स्लोगन नहीं है बल्कि कई मायनों में सच भी है. कोरोना वायरस महामारी को ध्यान में रखते हुए इस साल एक ऐसी थीम रखी गई है जो आपकी सुरक्षा और सेहत दोनों का ख्याल रखेगी. लोगों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे इसलिए इस साल यानी 2021 के लिए ‘बी विद योग, ‘बी एट होम’ यानी ‘योग के साथ रहें, घर पर रहें’ थीम गयी है.

योग के चार मार्ग

योग के चार मुख्य मार्ग बताये गये हैं. कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योग, क्रिया योगा. कर्म योग को पश्चिमी संस्कृति में ‘कार्य के अनुशासन’ के रूप में भी जाना जाता है. यह योग के चार महत्वपूर्ण भागों में से एक है. यह निःस्वार्थ गतिविधियों और कर्तव्यों के साथ संलग्न हुए बिना तथा फ़ल की चिंता किए बिना कोई काम करना सिखाता है. असल में कर्म जो हम करते हैं वह क्रिया है और उसका नतीज़ा इसकी प्रतिक्रिया है. व्यक्ति का जीवन अपने कर्म चक्र द्वारा शासित होता है. अगर उस व्यक्ति के अच्छे विचार, अच्छे कार्य और अच्छी सोच है तो वह सुखी जीवन जिएगा वहीं वह व्यक्ति अगर बुरे विचार, बुरे काम और बुरी सोच रखता है तो वह दुखी और कठिन जीवन जिएगा आज की दुनिया में ऐसे निस्वार्थ जीवन जीना बहुत मुश्किल है क्योंकि मानव कर्म करने से पहले फ़ल की चिंता करने लगता है.

 

ज्ञान योग– इसे ‘विज़डम योग’ के रूप में भी जाना जाता है. यह सभी के बीच एक बहुत ही कठिन और जटिल रास्ता है. यह किसी व्यक्ति को गहरी अंतरात्मा के मन से ध्यान और आत्म-प्रश्न सत्र आयोजित करने के द्वारा विभिन्न मानसिक तकनीकों का अभ्यास करके आंतरिक आत्म में विलय करना सिखाता है. यह पथ 6 मौलिक गुणों – शांति, नियंत्रण, बलिदान, सहिष्णुता, विश्वास और ध्यान केंद्रित करके मन और भावनाओं को स्थिर करना सिखाता है. लक्ष्य को प्राप्त करने और सर्वोत्तम तरीके से इसे करने के लिए एक सक्षम गुरु के मार्गदर्शन में ज्ञान योग का अभ्यास करने की सलाह दी जाती है.

 

भक्ति योग– इसे ‘आध्यात्मिक या भक्ति योग’ के रूप में भी जाना जाता है. यह दिव्य प्रेम के साथ जुड़ा हुआ है क्योंकि यह प्रेम और भक्ति के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान का सबसे बड़ा मार्ग है. इस योग के रास्ते में एक व्यक्ति भगवान को सर्वोच्च अभिव्यक्ति और प्यार के अवतार के रूप में देखता है. भक्ति योग मन और हृदय की शुद्धि से जुड़ा है और कई मानसिक और शारीरिक योग प्रथाओं द्वारा इसे प्राप्त किया जा सकता है. यह प्रतिकूल परिस्थितियों में भी साहस देता है.

 

क्रिया योग– यह शारीरिक प्रथा है जिसमें कई शरीर मुद्राएं ऊर्जा और सांस नियंत्रण या प्राणायाम की ध्यान तकनीकों के माध्यम से की जाती हैं. इसमें शरीर, मन और आत्मा का विकास होता है. क्रिया योग का अभ्यास करके पूरे मानव प्रणाली को कम समय में सक्रिय किया जाता है. सभी आंतरिक अंग जैसे कि यकृत, अग्न्याशय आदि सक्रिय हैं. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक हार्मोन और एंजाइमों को सक्रीय अवस्था में लाया जाता है. रक्त ऑक्सीजन की उच्च मात्रा को अवशोषित करता है और जल्द डी-कार्बोनाइज हो जाता है जो आमतौर पर बीमारियों की संख्या घटाता है.

सिर में अधिक परिसंचरण के माध्यम से मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय किया जाता है जिससे मस्तिष्क की कामकाजी क्षमता बढ़ जाती और व्यक्ति जल्दी थका हुआ महसूस नहीं करता और यादाश्त भी तेज हो जाती है.

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