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कोई पूछने को तैयार नहीं, कहां हैं IL&FS के सीईओ रवि पार्थसारथी ?

Girish Malviya

91 हजार करोड़ के IL&FS घोटाले में घूस देने वाले और घूस लेने वाले दोनों आरोपी संभवतः विदेश में गुलछर्रे उड़ा रहे हैं. ओर मोदी सरकार से कोई ये भी पूछने को तैयार नही है कि इन घोटालों के वक्त IL&FS के सीईओ रहे रवि पार्थसारथी आखिर हैं कहां?

क्या वह भारत में ही है या इलाज कराने के बहाने विदेश चला गया है? अभी तक उसकी गिरफ्तारी की कोई खबर नहीं है, जबकि IL&FS में नम्बर दो ओर तीन की पोजिशन पर रहे लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. मीडिया इस बारे में कोई सवाल क्यों नही उठा रही है?

कल एसएफआईओ की जांच मे IL&FS के वरिष्ठ अधिकारियों और शिव ग्रुप के चेयरमैन सी शिवशंकरण के बीच ई-मेल्स से हुई बातचीत सामने आने पर पता चला है कि IL&FS के तीन टॉप अधिकारियों रवि पार्थसारथी, विभव कपूर और हरि शंकरण ओर शिव ग्रुप के चेयरमैन सी शिवशंकरन की गहरी मिलीभगत रही है.

इन अधिकारियों ने शिव ग्रुप को पिछला लोन चुकाने के लिए नया लोन जारी किया, ताकि पिछला लोन एनपीए कैटेगरी में नहीं जा सके. उसे इसी तरह से 15 बार लोन दिए गए, जिसके बदले में IL&FS के तीन टॉप अधिकारियों को विदेशों में घूमना-फिरना जैसे प्राइवेट जेट्स और हेलिकॉप्टर की सवारी, रेजॉर्ट्स बुकिंग की सुविधाएं शिवशंकरन द्वारा दी गयी.

सी शिवशंकरन वही उद्योगपति हैं, जिसका नाम एयरसेल मैक्सिस सौदे में यूपीए के समय वित्तमंत्री रहे पी चिदम्बरम के पुत्र कार्ति चिदम्बरम के साथ उछला था. फिलहाल एयरसेल के पूर्व प्रमोटर सी शिवशंकरण का नाम IDBI बैंक के 600 करोड़ रुपये डिफॉल्ट के आरोप में सामने आया है.

अब आप पूछेंगे कि यह शिवशंकरण कहां है? आपको जानकर हैरानी होगी कि यह पिछले साल अक्टूबर 2018 में ही विदेश भाग गए हैं. और इनके भागने का रास्ता खुद मोदी सरकार ने ही साफ किया है CBI ने IDBI बैंक के 600 करोड़ रुपये डिफॉल्ट के आरोपी एयरसेल के पूर्व प्रमोटर सी शिवशंकरण के खिलाफ लुकाउट सर्कुलर को नरम कर दिया था.

सूत्रों ने बताया था कि सीबीआई हेडक्वॉर्टर के निर्देश पर सर्कुलर के प्रावधानों को हल्का करते हुए शिवशंकरण सहित अन्य को विदेश जाने की छूट दे दी गई है.

शिवशंकरण के पास सेशल्स की नागरिकता है. सूत्रों ने उस वक्त यह भी बताया था कि एजेंसी ने संबंधित जांच अधिकारी और ब्रान्च के हेड को मौखिक रूप से निर्देश दिया कि वे आव्रजन प्राधिकरणों को सर्कुलर नोटिस को हल्का करने के लिए लिखें, जिससे शिवशंकरण और अन्य विदेश यात्रा कर सकते हैं.

सूत्रों ने कहा कि जब जांच अधिकारी और बेंगलुरु ब्रान्च के प्रमुख ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो जांच को AC-3 यूनिट दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया. यहां से इमिग्रेशन अथॉरिटीज को सर्कुलर में बदलाव करने को कहा गया.

ये है न खाऊंगा न खाने दूँगा की बात करने वालो की सच्चाई जो सामने न आने पाए इसके लिए सेना के सम्मान और राष्ट्रवाद की तगड़ी डोज आपको पिलाई जा रही है.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं)

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