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झिरी से कब खत्म होगा कचरे का पहाड़ !

10 साल में भी नहीं लग सका वेस्ट डिस्पोजल प्लांट

RANCHI: शहर की सफाई रांची नगर निगम के जिम्मे है. हर घर और दुकान से कूड़ा कलेक्ट करने के बाद उसे झिरी डंपिंग यार्ड भेज दिया जाता है. इस वजह से झिरी में कूड़े का पहाड़ खड़ा हो गया है. बारिश के कारण स्थिति नारकीय हो गई है और आसपास के लोगों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है. अब बारिश की वजह से उनकी परेशानी और बढ़ गई है. कीड़े मकोड़ों का आतंक बढ़ गया है. लेकिन आजतक झिरी में वेस्ट डिस्पोजल प्लांट लगाने की योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है. जबकि इसके लिए 10 साल से अधिक समय से नगर निगम योजना बना रहा है. इसके लिए अबतक दो एजेंसियां आई और चली भी गई. अब निगम ने इसका जिम्मा गेल इंडिया को दिया है. चूंकि गेल इंडिया ने वेस्ट से गैस बनाने के लिए प्लांट लगाने की इच्छा जताई है और एमओयू भी किया जा चुका है. लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी आजतक काम शुरू नहीं हो पाया है. वहीं अब मानसून आ चुका है. ऐसे में प्लांट लगाने का काम तो फिलहाल शुरू नहीं हो पाएगा. वहीं लोगों को राहत के लिए थोड़ा लंबा इंतजार करना होगा.

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मार्च में गेल ने किया था एमओयू

झिरी में वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए रांची नगर निगम ने सीएम की मौजूदगी में गेल इंडिया के साथ एमओयू किया था. इसके बाद से तीन महीने का समय बीत चुका है. लेकिन प्लांट लगाने को लेकर गेल एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है. जबकि नगर निगम और गेल इंडिया के बीच 22 साल के लिए एमओयू हुआ. जिसके तहत गेल को निगम की ओर से झिरी में आठ एकड़ जमीन देने की बात कहीं गई है. जहां गेल अपने खर्च पर 150-150 मीट्रिक टन के दो प्लांट लगाएगा. जिसमें सॉलिड वेस्ट से गैस व खाद बनाकर बेचने की बात कही गई है. इसके अलावा प्लांट लगने से आसपास के लोगों को भी राहत मिल जाती.

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दो एजेंसिया एक कदम भी नहीं चली

2011 में ए-टू-जेड ने संभाला था मोर्चा

2010 तक नगर निगम एनजीओ की मदद से शहर की सफाई कर रहा था. ऐसे में सफाई को दुरुस्त करने को लेकर ए टू जेड को काम दिया गया. डोर टू डोर कलेक्शन करने से लेकर उसके डिस्पोजल की भी योजना बनी. एजेंसी ने काम में लापरवाही बरती और शहर को साफ भी नहीं कर पाई. इस चक्कर में डिस्पोजल भी अधर में लटक गया. एजेंसी को काम से हटा दिया गया.

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2015 में एसेल इंफ्रा आई, हो गई फेल

एक एजेंसी के फेल होने के बाद नगर निगम ने टेंडर निकाला और एजेंसियों को सफाई के लिए आमंत्रित किया. जिसमें एसेल इंफ्रा की एमएसडब्ल्यू ने काम संभाला. इसके बाद एजेंसी ने वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने की बात कही. लेकिन न तो शहर साफ हुआ और न ही एनर्जी प्लांट लगाया जा सका. निगम ने एजेंसी को टर्मिनेट कर दिया.

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मेयर आशा लकड़ा का कहना है कि पहले काम करने वाली एजेंसियों को तो अनुभव नहीं था. गेल को इस फील्ड में काम करने का अनुभव है. प्लांट लगाने में थोड़ा टाइम तो लगेगा. चूंकि ये लोग कुछ कचरे से खाद बनाएंगे और कुछ से गैस. जल्द ही इसका काम शुरू होने की संभावना है.

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