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पिता की कंपनी “जोहार” जब विवादों में आयी तो किया किनारा, अब उसे ही अपनी उपलब्धि बता रहे हैं मंत्री जयंत सिन्हा

जोहार एक एनजीओ के तौर पर जिला और आस-पास स्वास्थ्य सेवा देने का काम करती है.

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–               उन्हें भी बतायी अपनी उपलब्धी जिसमें मंत्री का रोल ही नहीं 

Ranchi/Hazaribagh: पॉलिटिक्स में यब बात जगजाहिर है कि जिससे जनप्रतिनिधि की छवि खराब होने लगे, उससे किनारा कर लिया जाता है. लेकिन थोड़ा समय बीतने के बाद जब पब्लिक बातों को भूलने लगती है, तो उसी चीज को अपनाने में नेता गुरेज नहीं करते. हजारीबाग लोकसभा की राजनीति कुछ इसी लाइन-लेंथ पर चल रही है. जी हां, बात हो रही है हजारीबाग से सांसद और केंद्र में राज्यमंत्री जयंत सिन्हा की. जयंत सिन्हा के पिता यशवंत सिन्हा की कंपनी जोहार को लेकर ऐसा हो रहा है. जोहार एक एनजीओ के तौर पर जिला और आसपास स्वास्थ्य सेवा देने का काम करती है. जब यह कंपनी सिर्फ पांच महीने की थी, तो कंपनी को बैंकों की तरफ से सीएसआर फंड से करीब 47 लाख रुपए मिले थे. नियमों की बात करें तो ऐसे फंड लेने के लिए कंपनी कम-से-कम तीन साल पुरानी होनी चाहिए. मामला जब मीडिया में आया तो जोहार को लेकर दोनों पिता और पुत्र की काफी बदनामी हुई थी. उस वक्त जयंत सिन्हा ने मीडिया में बयान दिया था, कि कंपनी से उनका कोई लेना-देना नहीं है. कंपनी का सारा काम-काज उनके पिता देखते हैं. लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि जब मंत्री जी को क्षेत्र में अपनी उपलब्धी गिनाने की जरूरत पड़ी, तो अपने चौथे रिपोर्ट कार्ड में उन्होंने जोहार को अपनी उपलब्धी बतायी और कहा कि जोहार से क्षेत्र के लोगों को काफी फायदा हो रहा है. कंपनी अच्छा काम कर रही है.

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पिता यशवंत सिन्हा ने बताया था कि मंत्री करते हैं “जोहार” की देख-रेख

जोहार का मामला तूल पकड़ने के बाद पिता यशवंत सिन्हा ने “दैनिक भास्कर” को दिए एक इंटव्यू में कहा था कि

सवालः अपनी कंपनी जोहार की गतिविधियों के बारे में बताएं.

जवाबः मुझे इसकी गतिविधियों के बारे में बहुत कुछ जानकारी नहीं है. यह मंत्री जी के दिल्ली ऑफिस से कंट्रोल होता है.

सवालः किसी भी कंपनी ट्रस्ट एनजीओ को तीन साल के बाद सीएसआर कि राशि मिलने का नियम है. आपकी कंपनी को तो महज पांच महीने बाद ही यह फंड मिल गया.

जवाबः विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी होगी. मुझे नहीं है और किस बैंक ने कंपनी के लिये यह नियम तोड़े हैं, वही जवाब दे सकता है.

सवालः केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया है. वह हितों के टकराव का भी मामला है.

जवाबः इस समय मैं आपके सारे सवालों का जवाब नहीं दे सकता

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सिर्फ जोहार ही नहीं, उपलब्धियां ऐसी जिसमें मंत्री जी का रोल नहीं

ऐसा नहीं है कि सिर्फ जोहार को लेकर ही विवाद है. जोहार के अलावा भी जयंत सिन्हा ने लोकसभा में जो उपलब्धियां गिनायी हैं, उसपर सवाल उठ रहे हैं. दरअसल जयंत सिन्हा ने दूसरे साल की कुछ उपलब्धियां गिनायी हैं, जो सूचना का अधिकार से मांगे गए जवाबों से साबित होता है कि वो उनकी उपलब्धियां नहीं हैं.

–               मंत्री जी के दावों में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से रामगढ़ जिले में कई तरह के काम गिनाए गए हैं. लेकिन सुनील कुमार महतो को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी में विभाग का कहना है कि केंद्रीय राज्य मंत्री की तरफ से किसी तरह की कोई अनुशंसा नहीं की गयी है.

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–               हजारीबाग जिले के 20 खराब बीसीबी को बदला गया. 401 जले और खराब पड़े ट्रांसफार्मरों की मरम्मत की गई. और 385 जले और खराब पड़े ट्रांसफार्मरों को बदला गया, साथ ही दो ट्रांसफार्मर की क्षमता 5 मेगावाट से 10 मेगावाट तक बढ़ाई गई. 11 किलो वाट लाईन को एक 12.50 किलोमीटर तक बढ़ाया गया और एलटी लाइन को एक 8.60 किलोमीटर तक बढ़ाया गया. 40 खराब पड़े खंभों को बदला गया. लेकिन बिजली विभाग की सूचना का अधिकार के तहत कहा गया है कि विभाग जनहित के लिए समय-समय पर खुद से ट्रांसफार्मर बदलते रहती है. खंभे के लिए किसी विधायक या सांसद की अनुशंसा की जरूरत नहीं है.

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