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बारिश शुरू होते ही नरक बन जाते हैं राजधानी के बस स्टैंड, पैदल चलना भी हो जाता है दूभर

बारिश शुरु होते ही रांची के तीनों प्रमुख बस पड़ाव की हालत नरकीय हो जाती है

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Ranchi: बारिश शुरु होते ही रांची के तीनों प्रमुख बस पड़ाव की हालत नरकीय हो जाती है. जलजमाव और कीचड़ से सने रास्ते से होकर गुजरना यात्रियों की मजबूरी बन जाती है. बिरसा मुंडा बस स्टैंड का हाल ऐसा है कि कीचड़ की वजह से  आधी बसें तो स्टैंड के बाहर ही लग रही है. स्टैंड परिसर में बने रेस्टोरेंट के सामने जलजमाव है और यहां खुले में खाद पदार्थ भी बेचे जा रहे हैं. सरकारी बस डिपो जहां से एसी बस खुलती है वहां की हालत भी जर्जर है. यात्रियों के लिए बनाए गए वेटिंग हॉल भी खंडहर बन गये हैं. इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

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वहीं कुछ दिन पहले कंक्रीट झड़ने से एक यात्री के सिर में चोट भी आई थी. एक साल में नगर निगम को लगभग 43 लाख रुपए का राजस्व देने वाले आईटीआई बस स्टैंड में यात्री सुविधा के नाम पर सिर्फ बदहाल सुलभ शौचालय और व्यवस्थाओं के नाम पर सिर्फ कीचड़ है.

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सरकारी बस स्टैंड से रोजाना खुलती हैं 50 बसें

स्टेशन रोड स्थित सरकारी बस स्टैंड से रोजाना 50 एसी बसों का संचालन किया जाता है. प्रतिदिन लगभग दो हजार यात्री एसी बस से अपने गंतव्य के लिए सफर करते हैं. इस बस स्टैंड से जमशेदपुर, हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, कोडरमा और चाईबासा के लिए बसें चलती हैं. दस मिनट के अंतराल पर यहां से बस विभिन्न शहरों के लिए जाती हैं. लेकिन इस बस स्टैंड में सुविधाओं की घोर कमी है.

एक मात्र प्याऊ वो भी कचड़े से घिरा

कहने को तो सरकारी बस स्टैंड वीआईपी(एसी) बसें खुलती हैं. लेकिन यहां सुविधा नदारद है. यात्रियों के लिए पीने के पानी के लिए एकमात्र टंकी बनाया गया है, लेकिन इसके आसपास कचड़े का अंबार और गंदगी की वजह से यात्री बोतलबंद पानी के भरोसे अपनी यात्रा पूरी करते हैं.

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खादगढ़ा बस स्टैंड से खुलती है 500 बस

भगवान बिरसा मुंडा बस स्टैंड (खादगढ़ा) टर्मिनल का सौंदर्यीकरण किया गया है. इस बस स्टैंड से प्रतिदिन 500 बसें खुलती हैं. जिसमें 20 हजार यात्री सफर करते हैं. लेकिन बरसात के शुरू होते ही परेशानी बढ़ने लगती है. टर्मिनल के बाहर कीचड़ के ऊपर बस खड़ी होने की वजह से यात्रियों और बस कर्मियों को मुसीबतें बढ़ने लगी हैं. टर्मिनल के आगे और पीछे बस बारिश के कारण कीचड़ में खड़ी होती है. इसके आसपास के परिसर में कई रेस्टोरेंट हैं, लेकिन यहां बारिश के पानी के निकास की व्यवस्था नहीं होने की वजह से रेस्टोरेंट के इर्द-गिर्द जलजमाव रहता है.

सबसे नारकीय हालत में आईटीआई बस स्टैंड

बारिश शुरू होते ही नरक बन जाते हैं राजधानी के बस स्टैंड, पैदल चलना भी हो जाता है दूभर

इटकी रोड स्थित आईटीआई बस स्टैंड का हालत सबसे अधिक दयनीय है. आईटीआई बस स्टैंड से प्रतिदिन कई जिलों के अलावा दर्जनों बस, यात्रियों को लेकर छत्तीसगढ़,पश्चिम बंगाल एवं बिहार के लिए खुलती हैं. यात्रियों की सुविधा के नाम पर इस स्टैंड में एकमात्र सुलभ शौचालय है और रोशनी के नाम पर मात्र एक हाईमास्ट लाइट लगा हुआ है. इसके अलावा ना तो यात्रियों के लिए विश्राम गृह की सुविधा है और ना ही बस संचालकों, एजेंटों और ड्राइवरों के लिए कोई सुविधा है. वहीं खुले आसमान के नीचे ही एजेंट को टिकट काटना पड़ता है. स्टैंड में लगने वाले बसों की वजह से  बाहर की सड़कें भी जाम हो जाती हैं. जिस वजह से इस रोड में अक्सर मुसाफिरों को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है.


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