Jharkhand Story

कहानियां झारखंड आंदोलन की-1 : जैक के गठन के सवाल पर जब डॉ रामदयाल मुंडा का गुस्सा लालू यादव और राजेश पायलट पर उतरा

Ranchi :  साल था 1993. झारखंड आंदोलन अपने चरम पर था. सरकार और आंदोलनकारियों के बीच जैसे चूहे बिल्ली का खेल चल रहा था. आंदोलन धीरे-धीरे उग्र होता जा रहा था. ऐसे ही समय में केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया. वार्ता के लिए जो जगह चुनी गयी थी, वह तत्कालीन गृहमंत्री स्व राजेश पायलट का दिल्ली स्थित आवास था.

ट्राइबल एडवायजरी काउंसिल के पूर्व सदस्य और झारखंड आंदोलनकारी रतन तिर्की बताते हैं- झारखंड क्षेत्र स्वायत्तशासी परिषद (जैक) के गठन को लेकर वार्ता हो रही थी. मैं भी उस वार्ता में शामिल था. मुझे याद है कि गृहमंत्री राजेश पायलट के आवास पर शाम सात बजे वार्ता शुरू हुई. मैराथन की तरह चली यह वार्ता दूसरे दिन सुबह सात बजे तक चली. उस समय राजेश पायलट पीले रंग की टी-शर्ट और हाफ पैंट पहने हुए थे. बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद भी बैठक में थे. आंदोलनकारियों की ओर से गुरुजी शिबू सोरेन, डॉ रामदयाल मुंडा, स्व सुधीर महतो, साइमन मरांडी, सूरज मंडल, स्टीफन मरांडी, सूर्य सिंह बेसरा, प्रभाकर तिर्की, देवशरण भगत, विनोद भगत, अलफ्रेड एक्का, जोय बाखला, राजेंद्र महतो, संजय बसु मलिक, बशीर अहमद जैसे लोग शामिल थे. सरकार आंदोलनकारियों को शांत कराना चाहती थी, पर हमलोग भी अपनी बातों पर अड़े हुए थे.

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लालू यादव चतुर नेता थे. वह चाहते थे कि झारखंड एरिया डेवलपमेंट काउंसिल देकर आंदोलनकारियों को शांत कर दिया जाये. जबकि गुरुजी सहित हम सभी चाहते थे कि झारखंड क्षेत्र स्वायत्तशासी परिषद का गठन हो. बहस होने लगी. काफी गहमागहमी हुई. कानूनी प्रावधानों की बातें हुईं, राजनीति के सारे प्रपंचों को आजमाया गया.

मुझे याद है कुछ समय के लिए लालू प्रसाद बैठक हॉल से बाहर निकले. बाहर बिहार के गृहसचिव जियालाल आर्य और डीजीपी अरुण पाठक भी मौजूद थे. वह लालू प्रसाद को कुछ ज्ञान बांट रहे थे. इसके बाद फिर बैठक शुरू हुई. सारी बातें मेरी आंखों के सामने हो रही थी. मैंने महसूस किया कि बहस तेज होने लगी थी, पर इसका कोई नतीजा नहीं निकल रहा था. गुरुजी भी गर्म होने लगे थे. किसी बात पर उन्होंने (गुरुजी ने) भी सख्ती दिखाते हुए कहा कि हमलोग शांति से अपनी बात समझाना चाहते थे, पर अब लगता है कि आंदोलन ही एकमात्र रास्ता है. उधर लालू यादव भी अड़े हुए थे.

तब डॉ रामदयाल मुंडा ने खड़े होकर गृहमंत्री से कहा कि आप फेल हो गये. उन्होंने जमकर लालू यादव और गृहमंत्री को खरी-खोटी सुनायी… कहा कि यहां गुरुजी शिबू सोरेन के साथ आंदोलनकारी बैठे हैं. आपलोगों ने बात करने बुलाया है या फिर बेइज्जत करने. मैंने डॉ रामदयाल मुंडा का इतना तमतमाया चेहरा और गुस्सा पहली बार देखा था. गुस्से में डॉ रामदयाल मुंडा ने सुबह चार बजे बैठक का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी. कहा कि यहां बैठक की क्या जरूरत थी, जब बात को मानना ही नहीं था. डॉ मुंडा का रौद्र रूप लालू यादव और राजेश पायलट देखते रह गये. दोनों फिर नरम पड़े. फिर बात आगे बढ़ी और सहमति बनी कि झारखंड क्षेत्र स्वशासी परिषद (जैक) का ही गठन होगा, जिसके लिए नियमावली बनायी जायेगी. कहा गया कि कानूनविदों से बात कर जल्द ही इसका गठन किया जायेगा. तब जाकर बात बनी और सुबह सात बजे बैठक में शामिल लोगों ने उस कागज पर हस्ताक्षर किये, जिस पर जैक के गठन होने पर सहमति दी गयी थी.

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