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डीके पांडेय जैसे व्यक्ति को जब सत्ता का संरक्षण मिल जाता है, तो वह कुछ भी करने से नहीं हिचकता

Surjit Singh

झारखंड के पूर्व डीजीपी डीके पांडेय एक बार फिर से चर्चा में हैं. इस बार चर्चा की वजह कोई बाहर का नहीं है. इस बार आग की चिंगारी घर से ही निकल रही है. तीन दिनों से वह मीडिया में बने हुए हैं. ऐसी-ऐसी बातें सामने आ रही हैं, जो जितना आपराधिक है, उससे कहीं अधिक घृणित और शर्मनाक.

इस लेख में हम उनके कुछ ऐसे कृत्यों की चर्चा करेंगे, जो यह साबित करता है कि डीके पांडेय जैसे व्यक्ति को जब सत्ता का संरक्षण मिलता है, तो वह कुछ भी करने से नहीं हिचकता. हर लक्ष्मण रेखा को लांघ देता है. और मुस्कुराता रहता है.

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ना पद की गरिमा का ख्याल, ना शपथ की लाज

पुलिस प्रमुख के पद पर रहते हुए वह कभी सत्ताधारी दल का नारा “सबका साथ-सबका विकास” लगाते रहे. कभी गेरुआ वस्त्र पहनकर पूजा पंडाल में घूमते रहे. तो कभी गले में सांप लटका कर खेलते दिखे और वन अधिनियमों की धज्जियां उड़ाते रहे. ना पद की गरिमा का ख्याल, ना शपथ की लाज.

फर्जी नक्सल सरेंडर

डीके पांडेय जब झारखंड में सीआरपीएफ के आइजी थे, तब झारखंड में फेक नक्सली सरेंडर का केस सामने आया. तकरीबन 514 युवकों का करियर बर्बाद हो गया. इस मामले में डीके पांडेय दोषी हैं या नहीं, जांच एजेंसी व कानून अभी तक यह तय नहीं कर पाया है. इतने बड़ी दाग के बाद भी रघुवर दास ने अपने कार्यकाल में इस सख्स को डीजीपी जैसे पद पर पोस्ट किया.

बकोरिया कांड

डीजीपी बनने के बाद डीके पांडेय के कार्यकाल में बकोरिया कांड हुआ. इस घटना में कथित तौर पर एक नक्सली समेत 12 निर्दोष लोग मारे गये. पुलिस के जिन अफसरों ने इस घटना के बारे में सच्चाई बताने की कोशिश की, उसे रघुवर सरकार में किनारे कर दिया गया. इस मामले में करीब एक दर्जन आइपीएस या तो तंग किये गये या आने वाले दिनों में परेशान होंगे. अभी इस मामले की जांच सीबीआइ कर रही है. मृतकों के परिजनों को न्याय की उम्मीद है.

टंडवा-पिपरवार में टीपीसी द्वारा लेवी वसूली

चतरा के टंडवा में टीपीसी के उग्रवादी हर माह 10 करोड़ से अधिक की लेवी वसूलते थे. मीडिया ने जब इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो तत्कालीन एडीजी अभियान अनिल पाल्टा ने कार्रवाई शुरु की. कार्रवाई शुरु होते ही उन्हें इस पद से हटा दिया गया.

अनिल पाल्टा के हटते ही चतरा के टंडवा व पिपरवार में लेवी वसूलने का काम शुरु हो गया. डीजीपी रहते डीके पांडेय ने कई शिकायतों के बाद भी इसकी जांच नहीं की. बाद में कुछ कार्रवाईयां हुईं. फिलहाल अवैध वसूली से संबंधित कई मामलों की जांच एनआइए कर रही है.

महिला आइपीएस से कहा थाः मसाज पार्लर खोल लो

डीके पांडेय, जब डीजीपी बने, उस वक्त एक महिला आइपीएस सीआइडी में पदस्थापित थी. एक बार डीके पांडेय ने उस महिला आइपीएस से कह डाला कि तुम मसाज पार्लर खोल लो. इस घटना के बाद महिला आइपीएस कई दिनों तक परेशान रहीं.

बाद में डीके पांडेय ने कई अफसरों के सामने महिला आइपीएस से खेद व्यक्त किया. इस मामले की चर्चा सत्ता शीर्ष तक भी पहुंची. पर रघुवर सरकार ने डीके पांडेय से एक बार कुछ पूछा तक नहीं.

अवैध तरीके से जमीन खरीद कर घर बनाया

डीजीपी पद पर रहते हुए डीके पांडेय ने पत्नी के नाम कांके के चामा में जमीन खरीदा और आलिशान बंगला का निर्माण कराया. जिस जमीन पर बंगला बना है, वह जमीन खरीद-बिक्री योग्य है ही नहीं. जांच में इसकी पुष्टि भी हुई. पर, कार्रवाई अब तक नहीं हुई.

कहा तो यह भी जा रहा है कि अगर सिर्फ बंगला निर्माण के खर्च को जोड़ दिया जाये, तो वह उनकी आय से कहीं ज्यादा का होगा.

अब बात हाल की घटना की. जिस कारण वह चर्चा में बने हुए हैं. उनकी बहु ने उनपर गंभीर आरोप लगाये हैं. जबकि उनके बेटे की तरफ से तर्क दिया जा रहा है कि एक साल पहले तलाक हो चुका है. सच क्या है. यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा.

लेकिन सिर्फ तीन माह के भीतर तलाक हो जाना किसी के गले नहीं उतर रहा. इसके अलावा एक पक्ष को अदालत में उपस्थित ही नहीं होना भी सवालों के घेरे में है. सवाल उठ रहा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि डीके पांडेय व उनके पुत्र ने रेखा मिश्रा को अंधेरे में रख कर तलाक का एकतरफा फैसला करवा लिया. यह भी जांच का ही विषय है.

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