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अपने वेतन को लेकर क्या है भारतीय राष्ट्रपति का ‘शिकवा’

KANPUR: राष्‍ट्रपति का पदभार संभालने के बाद पहली बार रामनाथ कोविंद कानपुर जिले में अपने पैतृक गांव परौंख जा रहे हैं.कानपुर देहात के झीझक रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार की शाम राष्ट्रपति की स्पेशल ट्रेन पहुंची. राष्ट्रपति यहां परिवारजन समते इष्टमित्रों से अलग ही अंदाज में मिले. राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि मैं आप सबका आशीर्वाद लेने आया हूं. मुझे इस रेलवे स्टेशन का हर लम्हा याद है. राष्ट्रपति ने अपने अंदाज में कहा कि लोग कहते हैं कि जब मैं सांसद था तो यहां झीझक रेलवे स्टेशन कई ट्रेनें रुकती थीं लेकिन बाद में बंद हो गईं. संभवत: कोरोना के चलते ऐसा हुआ होगा. मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में सभी ट्रेनों का ठहराव फिर से हो जाएगा.

ट्रेनों को रोकना गलत

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लोगों से कहा कि मेरी आपसे दूरी नहीं है. प्रोटोकॉल के तहत कुछ दूरी है. आप अपनी बात, शिकायत हम तक पहुंचा सकते हैं. उन्होंने कहा कि देश में आजादी के बाद बहुत विकास हुआ है. ऐसे में हम सबका भी दायित्व है कि विकास में सहयोग करें. उन्होंने कहा कि कई बार देखा गया है कि कुछ लोग धरना-प्रदर्शन करने के दौरान ट्रेनों को रोकते हैं, कहीं-कहीं ट्रेन में आग भी लगा देते हैं. जो कि एकदम गलत है. क्षणिक आवेश में उठाया गया ऐसा कदम कहीं ना कहीं हमारे ऊपर ही प्रभाव डालता है.

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आधे से ज्यादा टैक्स में चला जाता है वेतन

राष्ट्रपति कोविंद लोगों को संबोधित करते हुए अपने वेतन पर भी चुटकी ली, उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि सबसे ज्यादा वेतन देश के राष्ट्रपति को मिलता है. हमें भी 5 लाख मिलता है, जिसमें पौने 3 लाख टैक्स में चला जाता है. तो बताइये बचा कितना? और जितना बचा उससे कहीं ज्यादा तो हमारे अधिकारी और अन्य दूसरे लोगों को मिलता है. यहां जो टीचर्स बैठे हुए हैं उन्हें तो सबसे ज्यादा मिलता है.

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हेलिकॉप्‍टर से जाएंगे पैतृक गांव परौंख

 

राष्ट्रपति कोविंद कानपुर देहात जिले में अपने पैतृक गांव परौंख और कस्‍बा पुखरायां हेलिकॉप्‍टर के जरिए जाएंगे.  27 जून को परौंख गांव में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे वहां से 27 को ही वह वापस कानपुर आ जाएंगे. यहां रात में रुकने के बाद 28 जून की सुबह वह अपनी खास प्रेजिडेंशियल ट्रेन से लखनऊ के लिए रवाना होंगे. लखनऊ में वह दो दिन रुक कर 29 जून की शाम को एयरफोर्स के विमान से दिल्‍ली पहुंचेंगे.

 

परंपरा का पालन कर रहे कोविंद

राष्‍ट्रपति भवन की ओर से बताया गया कि राष्‍ट्रपति की अपने पैतृक गांव जाने की योजना काफी समय से थी लेकिन महामारी की वजह से ऐसा न हो सका. भारत के राष्‍ट्रपति देश की जनता से मिलने के लिए ट्रेन का इस्‍तेमाल करते आए हैं. राष्‍ट्रपति कोविंद भी उसी परंपरा का पालन कर रहे हैं.

 

पहले भी राष्ट्रपति कर चुके हैं ट्रेन से सफर

15 वर्षों बाद देश को कोई राष्‍ट्रपति ट्रेन से सफर कर रहा है. इससे पहले राष्‍ट्रपति अब्‍दुल कलाम साल 2006 में इंडियन मिलिटरी अकैडमी की पासिंग आउट परेड में हिस्‍सा लेने के लिए दिल्‍ली से देहरादून गए थे. देश के पहले राष्‍ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद भी अकसर ट्रेन यात्रा करते थे. राष्‍ट्रपति बनने के बाद वह बिहार के सीवान जिले में स्थित अपने पैतृक गांव जीरादेई गए थे. उन्‍होंने छपरा से जीरादेई के लिए स्‍पेशल प्रेजिडेंशियल ट्रेन पकड़ी और वहां तीन दिन रहे.

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