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आइएसएम आइआइटी को यह क्या हो गया है, चिंतित हैं लोग

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Ranjan jha

Dhanbad: यहां के लोगों के लिए आइएसएम आइआइटी जैसे संस्थान में लगातार चल रही गतिविधियां और घटनाएं चिंतित करनेवाली हैं. सन 1962 में स्थापित आईएसएम में पहले ऐसा नहीं हुआ था. हालांकि छोटी-मोटी घटनाएं होती थीं.

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यह अलग बात है कि दस साल पहले तक आइएसएम आइआइटी में बमुश्किल एक हजार स्टूडेंट्स थे. अब इनकी संख्या साढ़े सात हजार से ज्यादा है. ऐसे में आइएसएम को बीते साल आइआइटी टैग मिलने से क्या फायदा हुआ यह तो आमलोग जानते नहीं, लेकिन उन्हें यहां के स्टूडेंट्स की खामियां और यहां हो रही वारदातें यह सोचने को विवश करती है कि बड़े संस्थान का मतलब क्या होता है?

कुछ साल पहले की बात है, जब आइएमएम स्टूडेंट्स ने यहां पूजा टॉकिज में तोड़फोड़ की थी. इस मामले के बाद स्टूडेंट्स ने एक मौन रैली निकालकर क्षमा-याचना की थी. यहां के छात्र समाधान और प्रयास के माध्यम से गरीब बच्चों की शिक्षा-दीक्षा, ब्लड डोनेशन आदि का काम बढ़-चढ़कर करते रहे हैं.

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इन सकारात्मक गतिविधियों से परे कैंपस में आए दिन स्टूडेंट्स के बीच होनेवाली मारपीट, हो हंगामे की वजह से सालाना कार्यक्रम में व्यवधान, लैब से कीमती उपकरण की चोरी करते स्टूडेंट का पकड़ा जाना, आये दिन कैंपस से छात्रों के लैपटॉप की चोरी, सहपाठी के चेक पर फर्जी साइन कर पैसा निकालने की कोशिश जैसी घटनाएं कैंपस प्रशासन, पुलिस और लोगों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है.

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कैंपस में अनुशासन बनाए रखना चिंता का विषय

कैंपस में बाइक ले जानेवालों को रोकना, देर रात शहर में मटरगश्ती और शराब पीकर हल्ला-हुड़दंग करनेवाले छात्रों को हॉस्टल में कैद करके रोकना, यहां के सुरक्षा कर्मियों और प्रशासन के लिए भारी चुनौती का काम है. कॉलेज प्रबंधन ने कैंपस में शराब पीने पर रोक लगा दी है. समुचित कारण बताए बिना देर रात किसी स्टूडेंट्स को कैंपस से बाहर निकलने नहीं दिया जाता है. इतनी कड़ाई के बाद भी लोकल स्टूडेंट जो अपने घर से आकर पढ़ाई करते हैं, वह स्वच्छंद होते हैं. साथ में हॉस्टल में रहनेवाले लड़के देर रात ट्रेन बस पकड़ने के नाम पर निकल जाते हैं और कुछ तो शाम में निकलकर हॉस्टल लौटते ही नहीं. अगर यह कहें कि यहां के छोटे-बड़े रेस्टोरेंट आईएसएम स्टूडेंट्स की बदौलत ही आबाद हैं. तो यह बात काफी हद तक सही होगी. कैंपस से निकलनेवाले ज्यादातर छात्र बिग बाजार निकलते हैं.

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हीरक रोड पर खुले एकांत में स्थित रेस्टोरेंट का रुख करते हैं या बैंक मोड जाते हैं. पीना पिलाना अनिवार्य है. देर रात खूब पीकर हंगामा करते आईएसएम स्टूडेंट्स अक्सर स्टेशन रोड पर मिल जाते हैं. पहले कैंफस में शराब पीने पर कड़ाई नहीं थी. तो सड़कों पर ऐसा दृश्य नहीं दिखता था. वैसे कैंपस में भांग-गांजा के उपयोग पर तो रोक नहीं लग सकती. इस तरह देखें तो आईएसएम छात्रों के कारण यहां नशे का कारोबार तेजी से चल निकला है.

यहां के कारोबार को नयी ताकत मिली है

ऐसा नहीं है कि आईएसएम के कारण सिर्फ गिने-चुने कारोबार बढ़े हैं. बल्कि हर तरह का कारोबार फला-फूला है. स्टूडेंट्स को रोज हर तरह की चीज की जरूरत है. वह उसे स्थानीय बाजार से ही पूरा करते हैं. छात्रों के साथ टीचिंग, नॉनटीचिंग स्टाफ एक बड़े शहर के कारोबार को गति देने के लिए काफी हैं.

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यहां के छात्रों से कोयलांचल की प्रतिभाओं को लाभ

आईएसएम के बहुत से स्टूडेंट्स खाली समय में यहां के कोचिंग इंस्टीच्यूट में पढ़ाकर अपना खर्च चलाते हैं. इनके कारण कोयलांचल में कोचिंग इंस्टीच्यूटों की चल पड़ी है. यहां के छात्रों को इसका भरपूर फायदा मिल रहा है.

कई आत्महत्या की घटनाएं

आईएसएम आईआईटी के रिसर्च स्कॉलर रंजन राठी ने शुक्रवार को हॉस्टल में आत्महत्या कर ली. आत्महत्या की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है. इससे पहले सकेंड इयर के एक छात्र ने आत्महत्या की थी. एक रिसर्च स्कॉलर का पति भी फांसी पर झूल गया था. लेकिन, उसे बचा लिया गया. आईएसएम कैंपस बड़ा हुआ है, तो यहां हमेशा सब कुछ पॉजीटिव ही होगा. ऐसा जरूरी नहीं पर अपेक्षा है कि यहां की हर बात निराली ही हो. आम जिंदगी से अलग.

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