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बोकारो में जो हुआ, वैसी हैवानियत अपने 28 साल के करियर में नहीं देखी : अनिल पालटा

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Bokaro : पिछले एक सप्ताह से बोकारो की को-ऑपरेटिव कॉलोनी का प्लॉट नंबर 229 पूरे राज्य के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है. वजह एक ऐसी घटना है, जिसे किताबों और टीवी सीरियल में ही अब से पहले तक देखा जाता रहा है. संपत्ति के लिए एक पैसे वाले डॉक्टर पर भाई-बहन को सालों से बंधक बनाकर रखने का आरोप लग रहा है. डॉक्टर और कोई नहीं, बल्कि बोकारो, धनबाद और गिरिडीह के नामचीन डॉक्टर डीके गुप्ता हैं. सालों से डॉ. गुप्ता बोकारो जिले में लोगों का इलाज करते आये हैं. डॉ. डीके गुप्ता का नाम आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है. पड़ोसियों के कहने पर पुलिस ने प्लॉट नंबर 229 में जाकर भाई-बहन को आजाद तो कराया, लेकिन एफआईआर करने में 72 घंटे लगा दिये. एफआईआर में हुई देरी की वजह से पुलिस के रवैये को भी लोग शक की नजर से देख रहे हैं. सवाल उठाया जा रहा है कि जब पुलिस ने ही कमरे से भाई-बहन को आजाद कराया, तो एफआईआर करने में पुलिस ने क्यों देर की.

बोकारो में जो हुआ, वैसी हैवानियत अपने 28 साल के करियर में नहीं देखी : अनिल पालटा

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स्कूल में IPS अफसर अनिल पालटा की सीनियर रही हैं मंजूश्री

बोकारो में जो हुआ, वैसी हैवानियत अपने 28 साल के करियर में नहीं देखी : अनिल पालटा
मंजूश्री

प्लॉट नंबर 229 में कैद भाई-बहन का मामला अब और हाईप्रोफाइल हो गया है. दरअसल, बहन मंजूश्री घोष और दीपक घोष, जिन्हें बंधक बनाकर रखा गया था, बोकारो के संत जेवियर स्कूल के छात्र थे. आईपीएस अधिकारी अनिल पालटा भी बोकारो के संत जेवियर स्कूल के स्टूडेंट रहे हैं और वह बंधक बनायी गयी मंजूश्री के जूनियर रहे हैं. मीडिया में खबर आने के बाद संत जेवियर स्कूल के पुराने छात्र दोनों भाई-बहन की मदद करने के लिए खुलकर सामने आ रहे हैं. इसी क्रम में अनिल पालटा भी मंजूश्री से मिलने के लिए शनिवार को बोकारो पहुंचे.

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एफआईआर में देरी क्यों हुई, एसपी साहब बतायें : पालटा

बोकारो दौरे के दौरान अनिल पालटा ने अस्पताल में पीड़ित भाई-बहन से मुलाकात की. उस मकान में गये, जहां दोनों भाई-बहन को कैद करके रखा गया था. मीडिया से बात करने के दौरान उन्होंने कहा, “मैंने अपने 28 साल के करियर में ऐसी अमानवीय घटना नहीं देखी है. मंजूश्री घोष मेरे से एक साल सीनियर थीं. स्कूल छोड़ने के बाद उनसे कभी मुलाकात नहीं हुई. यह घटना अपने आपमें झकझोरने वाली है. मामले को लेकर मैंने एसपी से भी बात की है.” उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज हुई है. जांच चल रही है कि आखिर कैसे एक मानसिक रूप से बीमार शख्स से प्रोपर्टी का एग्रीमेंट हुआ. इस बात की जांच हो रही है कि कहीं किसी दबाव में एग्रीमेंट तो नहीं कराया गया है. कहा कि संत जेवियर स्कूल के ओल्ड ब्वॉयज ग्रुप भाई-बहन के इलाज के लिए पैसा जमा कर रहा है. करीब आठ लाख रुपये अब तक जमा हो चुके हैं. वहीं, एफआईआर में हुई देरी पर पालटा ने जवाब दिया कि इस बारे मैं कुछ नहीं कह सकता, इसका जवाब एसपी साहब देंगे.

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कहां छिपे हैं डॉ. डीके गुप्ता

जिस घर में इतना बड़ा क्लिनिक चल रहा था, उस घर में घर का मालिक सालों से जानवर की तरह कैद करके रखा गया. सवाल है आखिर क्यों. सवाल यह भी कि किसने इन दोनों को कैद करके रखा. पुलिस ने एफआईआर करने में देर क्यों की? क्या पुलिस ने आरोपी डॉ. डीके गुप्ता को छिपने के लिए मौका दिया? मीडिया में बात आने के बाद डॉ. डीके गुप्ता को मामले की पूरी जानकारी हो गयी होगी. ऐसे में अगर वह बेकसूर हैं, तो कहां छिपे हैं? दीपक घोष को बांधकर किसने रखा और उनके पैर कैसे टूटे. ऐसी बहुत सारी कड़ियां हैं, जिनके जुड़ने पर मामले पर से पर्दा उठ सकेगा.

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