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क्या टाला जा सकता था सूरत हादसा ?

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Rajesh Kumar Das

News Wing Desk : सूरत के तक्षशिला कॉम्प्लेक्स में शुक्रवार को भीषण आग लगी, जिसमें वहां एक कोचिंग संस्थान में पढ़ने गए 20 बच्चों समेत कई लोगों की हुई मौत एक हृदयविदारक घटना है. भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी समेत कई लोगों ने इस घटना पर अपना दुःख प्रकट किया है, अखबारों ने इस दुखद खबर को पहले पन्ने पर स्थान दिया है, समाचार चैनलों ने भी चुनावी टीआरपी के ऊपर इस खबर को प्राथमिकता दी है.

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शनिवार या सोमवार को जब भी सरकारी दफ्तर खुलेंगे, सरकारी लोग अपने उन पुराने पत्रों को खंगालेंगे जिसके मार्फत उन्होंने बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों में फायर फाइटिंग की सुविधाओं के लिए सम्बंधित लोगों को पत्र लिखा था. मगर उनपर कोई ईमानदार कारवाई अब तक नहीं की है. वे मूलतः खुद को बचाने की कोशिश ही करेंगे. धीरे-धीरे लोग भी इस खबर को भूल जाएंगे. मगर जिनके बच्चे इस दुखद घटना में असमय उनका साथ छोड़कर चले गए हैं, उनके दुखों का हिसाब लगाना बेहद कठिन है.

क्या #नयाभारत ऐसा ही रहेगा? मैंने नागरिक सुविधाओं और लोगों की सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों को सरकार के प्रकाश में लाने की कोशिश की है, सरकार की सुस्ती ने हालांकि मुझे निराश जरूर किया है. परंतु मेरे हौसले में कमी नहीं आयी है. इस महत्वपूर्ण नागरिक विषय पर भी काफी कुछ किया जा सकता है.

  1. हरेक राज्यों के अपने फायर फोर्स कानून, रूल्स और रेगुलेशन है, उन्हें सरल तरीके से जागरूकता हेतु जनता तक पहुंचाने की जरूरत है.

  2. नेशनल बिल्डिंग कोड में फायर सेफ्टी guidelines दिए हुए हैं. जिन्हें आधार बना कर ही बिल्डिंगों का निर्माण और उनका प्रबंधन किया जाना चाहिए.

  3. बिल्डिंगों में साधारण मोडिफिकेशन करके भी आग लगने की स्थिति में काफी लोगों की जानें बचायी जा सकती है. छोटी बिल्डिंगों से कूदते वक्त उन्हें लपकने की संरचनाएं तो बेहद आसानी से क्रिएट की जा सकती है.

  4. बिल्डिंग की छतों पर अगर कच्चा निर्माण या ट्रस आदि की छतों को ना बनाया जाय तो आग लगने की स्थिति में लोग खुली छतों पर जाकर भी अपनी जान बचा सकते हैं. हालांकि छतों के दरवाजे खुले होने चाहिए और वहां छतों के बाहरी हिस्से से या तल्लावार नीचे उतरने के लिए सीढ़ियां भी दी जा सकती है.

  5. नगर निगम सेट बैक, साइड और रियर ओपन स्पेस पर ज्यादा कोई ध्यान नहीं देता है. जिसकी वजह से आग लग जाने पर लोगों की जान जाने का खतरा बहुत बढ़ा रहता है.

  6. आग लगने की स्थिति में सीढ़ियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. अतः इनकी चौड़ाई, उन्हें बनाने में फायर टाइम प्रणाली का सही इस्तेमाल, फायर रेटिंग, उनके लोकेशन, वेंटीलेशन और बड़ी बिल्डिंगों में एक से ज्यादा सीढ़ियां बहुत जरूरी है.

  7. पूर्व में देश के कई अस्पतालों में आग लगने की कई घटनाएं भी सामने आयी है, इसलिए अगर वहां इस प्रकार की घटनाएं हो जाय तो कैसे मरीजों को वहां से बाहर निकाला जाए, इसका बहुत ज्यादा ध्यान रखा जाना चाहिए.

  8. नवाचारी तरीके से बिल्डिंग कनेक्ट प्रणालियों को छोटी बिल्डिंगों के केस में इवेलुएशन के लिए आजमाया जाना चाहिए, इससे भी काफी जानें बचायी जा सकती है.

और भी काफी कुछ किया जा सकता है अगर सरकारी इक्षाशक्ति हो, लोग जागरूक रहें और बिल्डर कम्यूनिटी भी इस मुहिम का साथ दे!!

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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