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पश्‍चिम बंगाल : घरेलू नौकरानियों के संगठन पीजीपीएस को ट्रेड यूनियन का अधिकार मिला

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Kolkata  :  पश्‍चिम बंगाल में  घरेलू नौकरानियों के संगठन  पश्चिम बंगाल गृह परिचारिका समिति  (पीजीपीएस)  को ट्रेड यूनियन का अधिकार मिल चुका है.  तृणमूल कांग्रेस के ट्रेड यूनियन नेता और राज्य सरकार में मंत्री शोभनदेव चटर्जी के  अनुसार  पीजीपीएस राज्य में ट्रेड यूनियन का अधिकार हासिल करने वाला घरेलू नौकरानियों का पहला संगठन है.  खबरों के अनुसार पीजीपीएस ने ट्रेड यूनियन का अधिकार मिलने पर  22 जून को कोलकाता में  रैली निकाल कर अपने हक में आवाज उठाई.   इस अनूठी रैली    में दो हजार से ज्यादा महिलाएं शामिल थीं.  बता दें  कि संगठन ने इन महिलाओं को मौलिक सुविधाएं मुहैया कराने की मांग के  अलवा  दूसरों के घरों  का कामकाज करने वाली इन महिलाओं को रोजाना न्यूनतम 54 रुपये प्रति घंटे की दर से मजदूरी देने और घर का शौचालय इस्तेमाल करने की अनुमति देने की मांग की है. साथ ही  हर माह चार दिन की छुट्टी, वेतन समेत मातृत्व अवकाश, पेंशन, रोजगार का समुचित कांट्रैक्ट, एक वेलयफेयर बोर्ड का गठन और बच्चों के लिए क्रेच की व्यवस्था करने  की  मांग  की  है .  जान  लें  कि  देश में घरेलू कामकाज करने वाली महिलाएं अब भी असंगठित क्षेत्र में हैं और अकसर इनके शोषण और इनके साथ मारपीट की खबरें सामने आती रहती हैं. लेकिन इनका कोई ताकतवर संगठन नहीं होने की वजह से ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं होती. कई जगह उनसे बहुत ज्यादा काम लिया जाता है और साप्ताहिक छुट्टी तक नहीं दी जाती.

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 असंगठित क्षेत्र के मजदूरों में दो-तिहाई संख्‍या  महिलाओं की है

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खबरों के अनुसार गोपीनाथन नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना था.

गैर-सरकारी आंकड़ों के अनुसार असंगठित क्षेत्र के मजदूरों में दो-तिहाई तादाद महिलाओं की है. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक लाख से ज्यादा महिलाएं यह काम करती हैं. यह महानगर से सटे आसपास के कस्बों से रोजाना तड़के यहां पहुंचती हैं और कई घरों का काम निपटाने के बाद देर शाम घर लौटती हैं. ट्रेड यूनियन अधिकार मिल जाने के बाद क्या घरेलू नौकरानियों की समस्याएं कम हो जाएंगी? पीजीपीएस  की अध्यक्ष विभा नस्कर के अनुसार  पहले तो हमें चार साल इस अधिकार के लिए लड़ाई लड़नी पड़ी. अब ट्रेड यूनियन का दर्जा पाने के बाद हम अपने हक में जोरदार तरीके से आवाज उठा सकते हैं. 22 जून को आयोजित रैली तो महज शुरूआत थी.  समिति बड़े पैमाने पर आंदोलन की रूप-रेखा बना रही है. विभा के अनुसार  उनकी राह आसान नहीं है. लेकिन ट्रेड यूनियन के दर्जे ने घरेलू कामकाज करने वाली महिलाओं के लिए उम्मीद की एक नयी किरण तो पैदा कर ही दी है. हम अपने अधिकारों की यह लड़ाई भी देर-सबेर जीत कर रहेंगे. पीजीपीएस  की अध्यक्ष विभा नस्कर 13 वर्षों से लोगों के घरों में साफ-सफाई का काम करती हैं. उनके  अनुसार जिन घरों में हम काम करते हैं, वहां के लोग हमें इंसान नहीं समझते.  बासी और बेकार खाना दिया जाता है.  कई घरों में घरेलू नौकरानियों का शारीरिक व मानसिक शोषण किया जाता है.

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